Charanjit Singh Channi: कौन हैं पंजाब के पहले दलित CM चरणजीत सिंह चन्नी? क्यों बने कांग्रेस के लिए टेंशन
Who is Charanjit Singh Channi: पंजाब कांग्रेस में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा जिस नेता की हो रही है, वह हैं पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही बहस में चन्नी का नाम लगातार सुर्खियों में है। एक तरफ उनके समर्थक उन्हें पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के साथ उनके मतभेद भी खुलकर सामने आ रहे हैं।
पंजाब की सियासत में जब भी किसी बड़े फेरबदल या जमीनी नेता का जिक्र होता है, तो चरणजीत सिंह चन्नी का नाम सबसे ऊपर आता है।

खरड़ की गलियों में कभी पिता के साथ टेंट लगाने का काम करने वाले चन्नी ने साल 2021 में इतिहास रच दिया था, जब वे पंजाब के पहले दलित सिख मुख्यमंत्री बने। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर चरणजीत सिंह चन्नी कौन हैं, कैसे चन्नी फर्श से अर्श तक पहुंचे और आज कांग्रेस आलाकमान के लिए क्यों बड़ी 'टेंशन' बन चुके हैं।
Punjab first Dalit CM Channi: कौन हैं पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी?
चरणजीत सिंह चन्नी का जन्म रूपनगर जिले के चमकौर साहिब के पास मकरोना कलां गांव के एक बेहद साधारण मीडिल क्लास परिवार में हुआ था। उनके पिता हरसा सिंह काम की तलाश में कुछ समय के लिए मलेशिया भी गए थे। मलेशिया से लौटने के बाद उनका परिवार पंजाब के खरड़ में बस गया और एक टेंट हाउस की शुरुआत की। बचपन के दिनों में चन्नी खुद शादियों और कार्यक्रमों में टेंट के खंभे लगाने का काम करते थे। चन्नी ने अपनी स्कूली शिक्षा खरड़ से ही पूरी की। वे पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी काफी अच्छे थे।
चरणजीत सिंह चन्नी की एक खास पहचान यह है कि वे खुद को हमेशा एक छात्र के रूप में देखते हैं और लगातार अपनी योग्यता बढ़ाते रहते हैं। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी (चंडीगढ़) से लॉ की डिग्री ली है। पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी (जालंधर) से MBA किया है। जब वे पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे, तब उन्होंने राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन (MA) पूरा किया। इसके बाद भी उनकी पढ़ाई नहीं रुकी और वे PhD की डिग्री के लिए रिसर्च कर रहे हैं।
साधारण परिवार से निकलकर कैसे बने मुख्यमंत्री?
राजनीति चन्नी को विरासत में अपने पिता से मिली, जो बाद में अपने गांव के सरपंच चुने गए थे। चन्नी ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत जमीनी स्तर से की:
नगर पालिका की राजनीति: वे खरड़ नगर पालिका में लगातार तीन बार पार्षद चुने गए और दो बार नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष (President) भी रहे।
2007 में निर्दलीय जीत: साल 2007 में जब कांग्रेस ने उन्हें विधानसभा का टिकट देने से इनकार कर दिया, तो उन्होंने चमकौर साहिब सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
कांग्रेस में वापसी: उनकी लोकप्रियता को देखते हुए कांग्रेस उन्हें वापस पार्टी में लाई। इसके बाद उन्होंने 2012 और 2017 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लगातार जीता। चन्नी साल 2015 से 2016 तक पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे।
कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ बगावत और 2021 में बन गए पहले दलित CM
साल 2017 में जब कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार बनी, तो चन्नी को तकनीकी शिक्षा और रोजगार सृजन मंत्री बनाया गया। हालांकि, चन्नी शुरू से ही मुख्यमंत्री कार्यालय के अत्यधिक हस्तक्षेप से परेशान थे और प्राइवेट यूनिवर्सिटी को बढ़ावा देने की कैप्टन की नीतियों के विरोधी थे। साल 2021 में जब पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह चरम पर पहुंची, तो कैप्टन के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले 4 प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों में चन्नी भी शामिल थे, जिसके चलते अंततः कैप्टन को इस्तीफा देना पड़ा।
चंडीगढ़ में जब नए मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन चल रहा था, तब चन्नी खुद को डिप्टी सीएम की रेस में मान रहे थे। मुख्यमंत्री पद के लिए सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम लगभग तय हो चुका था। लेकिन ऐन वक्त पर तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने रंधावा के नाम पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। सिद्धू की जिद और राज्य में 32% से अधिक दलित आबादी के समीकरण को देखते हुए हाईकमान ने अचानक रामदासिया सिख समुदाय से आने वाले चरणजीत सिंह चन्नी के नाम पर मुहर लगा दी और वे पंजाब के पहले दलित सीएम बने।
विवादों से भी रहा पुराना नाता: 'मी टू' (MeToo) का आरोप
साल 2018 में चन्नी एक बड़े विवाद में फंस गए थे, जब पंजाब कैडर की एक महिला आईएएस (IAS) अधिकारी ने उन पर मोबाइल फोन पर अनुचित और आपत्तिजनक टेक्स्ट मैसेज भेजने का आरोप लगाया था। इस विवाद के दौरान चन्नी ने पूरी तरह चुप्पी साधे रखी थी। उस समय विपक्ष ने उन पर कई राजनीतिक हमले किए थे, हालांकि बाद में यह मामला शांत हो गया।
अब क्यों बने कांग्रेस के लिए बड़ी 'टेंशन'?
साल 2022 के चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद से चन्नी कुछ समय के लिए नेपथ्य में चले गए थे, लेकिन अब वे पंजाब कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी पहेली और टेंशन बन गए हैं। इस समय पंजाब कांग्रेस दो धड़ों में बंटी हुई है। एक धड़ा पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी का है और दूसरा वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का है।
चन्नी के समर्थक लगातार हाईकमान पर दबाव बना रहे हैं कि राजा वड़िंग को हटाकर चन्नी को पंजाब कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया जाए। हाल ही में दिल्ली में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में चन्नी ने राजा वड़िंग के नेतृत्व पर सीधा हमला बोला था। चन्नी ने हाईकमान के सामने मुद्दा उठाया कि राजा वड़िंग के अपने गढ़ 'गिद्दड़बाहा' के निकाय चुनावों में AAP ने क्लीन स्वीप कर दिया। चन्नी का तर्क है कि अगर अध्यक्ष अपने गढ़ में पार्टी को नहीं जिता पा रहे, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कैसे जीतेगी?
हाईकमान की बढ़ी मुश्किलें
कांग्रेस आलाकमान के लिए सबसे बड़ी दुविधा यह है कि यदि वे चन्नी को आगे करते हैं, तो राजा वड़िंग और उनका धड़ा नाराज हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ, पार्टी के अंदर कुछ नेता आगामी चुनाव के लिए किसी 'जट्ट सिख' को सीएम चेहरा बनाने की मांग कर रहे हैं, जो चन्नी (दलित चेहरा) के राजनीतिक भविष्य के आड़े आ सकता है। अब 2027 के चुनाव से पहले चन्नी और राजा वड़िंग के बीच बढ़ती यह दूरी कांग्रेस हाईकमान के लिए एक बार फिर पुराना सिरदर्द बनकर उभरी है, जिसका समाधान निकालने के लिए दिल्ली में बैठकों का दौर जारी है।












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