क्या शव ढोने की यही है सरकारी व्यवस्था? ढाई फीट का कचरा वाला ठेला ही मिला!
वहीं इस मामले में जब बरौनी जीआरपी थाना अध्यक्ष से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि ऐसे मामले में रेलवे स्ट्रेचर से शव को उठाया जाता है, फिर ऐसा क्यों होता मिला?
पटना। ट्रेन दुर्घटना से मौत के बाद रेलवे पुलिस का अमानवीय व्यवहार देखा गया। इस मामले के सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन ने इस पर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही लेकिन हालात बदलते नहीं दिख रहे हैं। कुछ इसी तरह का नजारा बिहार के बेगूसराय जिले के बरौनी स्टेशन पर देखने को मिला जहां स्टेशन पर कहीं जाने के इंतजार में बैठे एक यात्री की मौत हो गई। जब इस मौत की जानकारी रेलवे कर्मचारी को मिली तो उन्होंने तुरंत मामले की सूचना पुलिस को दी और मौके पर पहुंची पुलिस ने मुआयना करते हुए 2 मजदूरों को बुलाया और 5 फीट की लाश को ढाई फीट के कचरे की ट्रॉली में जैसे-तैसे डालते हुए उसे थाने के लिए भेजा। पुलिस का शव के साथ ये अमानवीय व्यवहार देख रहे सैकड़ों लोगों ने इसे शर्मनाक बताया और एक बार फिर रेलवे व्यवस्था पर कई तरह के सवाल खड़ा कर दिए।

तस्वीर देखिए मत सोचिए...!
जानकारी के मुताबिक मामला बरौनी जंक्शन की बुकिंग ऑफिस परिसर का है, जहां यात्री विश्राम गृह में 30 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। मौत के बाद बुकिंग ऑफिस में कार्यरत कर्मचारियों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने लाश को कब्जे में लेते हुए कचरे की ट्रॉली से थाने के लिए भेज दिया और मामले की जांच-पड़ताल करने लगी। जांच के दौरान मृत्य यात्री के पास से कागजात के साथ-साथ पंचायत के मुखिया ने एक परिचय पत्र बरामद किया जिसके आधार पर उसकी पहचान समस्तीपुर जिले के शाहपुर पटोरी के एक निवासी के तौर पर हुई, मृतक का नाम अमीर शाह के रूप में की गई है।

कचरे का ठेला ही मिला था!
पूछताछ के दौरान उनके परिजनों ने बताया कि वो टीवी रोग से पीड़ित हैं और उनका इलाज चल रहा था। जिसके बाद जीआरपी ने उनके परिजनों को लाश सौंप दिया। जिस तरह लाश को कचरे की ट्रॉली से उठाकर लाने की बात उन्होंने सुनी पुलिस के साथ-साथ रेलवे प्रशासन और उसकी व्यवस्था पर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे। उनका कहना था कि मौत के बाद रेलवे के द्वारा मृतक को जो सुविधा दी जाती है वो सुविधाएं स्टेशन पर देखने को नहीं मिलती और तो और प्रशासन शव के साथ अमानवीय व्यवहार करती हैं।

क्या है सरकारी व्यवस्था...?
वहीं इस मामले में जब बरौनी जीआरपी थाना अध्यक्ष से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि ऐसे मामले में रेलवे स्ट्रेचर से शव को उठाया जाता है लेकिन स्ट्रेचर नहीं मिलने पर इस तरह से शव को थाने लाया गया।












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