चारा घोटाले के भूत ने नीतीश का चैन छीना

जनता दल ( यूनाइटेड) का भाजपा के साथ 17 साल पुराना संबंध टूटने के बाद अब नीतीश कांग्रेस के साथ आ सकते हैं जो कि (कांग्रेस) बिहार में अपना जनाधार ढूंढ रही है। भले ही राजद ने 2005 सत्ता खो दी हो पर यादव और मुस्लिम वोट बैंक हमेशा से ही उसके पास रहा है, जो कि अब कांग्रेस और नीतीश के साथ जा सकता है। हालांकि राजद की कमान अब राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने संभालने की बात कही है, पर इसे लेकर पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं में सहमति नहीं है।
नीतीश को माना गया पीएम पद का उम्मीदवार
1990 में अपने राजनीतिक करिअर का एक मुश्किल दौर देखने वाले नीतीश, कभी लालू यादव के खास मित्र थे। उन्होने 1994 में लालू से अलग होने के बाद समता पार्टी की आधारशिला रखी जिसके बाद उन्होने 2003 में जनता दल (यूनाइटेड) का गठन किया। नीतीश बिहार की पिछड़ी जातियों से संबंध रखते हैं, राज्य में यादव (पूरी आबादी का 13 फीसदी), कोरी ( पूरी आबादी का 5 फीसदी) और कुर्मी (पूरी आबादी का 2.5 फीसदी) हैं के साथ मिलकर अपनी प्रशासनिक क्षमता के आधार पर 2005 और 2010 में सत्ता पाने में कामयाब रहे, वहीं लालू के पतन के बाद अब उनकी राह और आसान हो गयी है। जो कि इस बार फिर से सत्ता में आने का सपना देख रहे थे।
चारा घोटाले में नीतीश भी हैं आरोपी
लालू के जेल जाने के बाद चारा घोटाले में नीतीश कुमार का भी नाम आ रहा है। घोटाले के एक मुख्य आरोपी श्याम बिहारी सिंहा ने सीबीआई के सामने स्वीकार किया था कि उन्होने नीतीश को दो बार पैसे दिये, जिसमें से पहली बार 1.40 करोड़ रूपये चुनाव के दौरान और दूसरी बार आस्ट्रेलिया ट्रिप के दौरान शॉपिंग करने के लिए साढ़े पांच लाख रूपये। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सीबीआई इस संबंध में 22 नवंबर तक जवाब दाखिल करे और अगर एजेंसी कोई संतोषजनक जवाब देने में नाकामयाब रही तो नीतीश के लिए मुश्किल हो सकती है। इस पर भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि चारा घोटाले में नीतीश कुमार का नाम आ गया है और अब उन्हें भी जेल जाना होगा। अगर सीबीआई कोई तार्किक उत्तर न दे सकी तो नीतीश के जेल जाते ही बिहार का राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।












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