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Inspirational Story: ‘हौसले को सलाम’, पैरों के सहारे परीक्षा दे रहे नंदलाल, दिल को छू लेगी उनकी कहानी

Inspirational Story:इंसान के अंदर कुछ करने का जज्बा हो तो वह सारी चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ ही जाता है। कुछ इसी तरह की कहानी नंदलाल की है जो पैरों के सहारे परीक्षा देते हुए भविष्य संवारने में लगा हुआ है।

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Inspirational Story: बिहार में प्रतिभा की कमी नहीं है, अपने हुनर का परचम प्रदेश के लाल विभिन्न क्षेत्रों लहरा चुके हैं। बिहार की धरती से सैकड़ों आईएएस और आईपीएस निकले हैं, जिन्होंने पूरे देश में एक अलग पहचान बनाई है। वहीं अब बिहार के एक और लाल ने खुद को IAS बनाने का सपना संजोया है। देश भर की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC की परीक्षा मानी जाती है। ग़ौरतलब है कि नंदलाल के दोनों हाथ नहीं हैं, इसके बावजूद वह पैरों के सहारे परीक्षा देकर एक नई ईबारत लिखने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी कहानी आपके दिल को छू लेगी।

नंदलाल के ‘हौसले को सलाम’

नंदलाल के ‘हौसले को सलाम’

नंदलाल संत टोला (हवेली खड़गपुर नगर क्षेत्र, मुंगेर) के निवासी हैं। अजय कुमार साह और बेबी देवी के बेटे नंदलाल के दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद पैर के सहारे परीक्षा देने की ख़बर जो भी सुन रहा तारीफ़ करते नहीं थक रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि बचपन में नंदलाल बिजली करंट की चपेट में आ गया था, जिस वजह से उसे अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े थे। उसने अपनी हिम्मत नहीं हारी मेहनत और जुनून के बल पर आगे बढ़ता चला गया। पैरों से उसने स्नातक की परीक्षा दी, वह भविष्य में IAS बनना चाहता है।

कामयाबी की बुलंदियों को छू रहे नंदलाल

कामयाबी की बुलंदियों को छू रहे नंदलाल

दिव्यांग नंदलाल ने साल 2017 में प्रथम श्रेणी से मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। साल 2019 में प्रथम श्रेणी से इंटरमीडिएट साइंस की परीक्षा पास किया। 500 नम्बरों में से उन्होंने 325 अंक हासिल किए थे। रसायन में 73, भौतिकी में 67 और गणित में 60 नम्बर हासिल किया था। साल 2022 में आरएस कॉलेज तारापुर (परीक्षा केंद्र) पर बीए पार्ट वन की परीक्षा दी थी। हाथों से दिव्यांग होने के बावजूद नंदलाल कामयाबी की सीढीयों पर चढ़ते जा रहे हैं।

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    साल 2006 में नंदलाल के साथ हुआ हादसा

    साल 2006 में नंदलाल के साथ हुआ हादसा

    हाथों से दिव्यांग नंदलाल के पिता अजय साह एक छोटी सी दुकान चलाकर परिवार का गुज़ारा कर रहे हैं। साल 2006 में बिजली करंट की चपेट में आने की वजह से उनके साथ यह हादसा हुआ था। नंदलाल के दादा ने उन्हें हिम्मत दी और पैरों से लिखने का हुनर सिखाया। जिसके बाद वह पैरों से परीक्षा देकर अच्छे नंबरों से पास करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। आपको बता दें कि तत्कालीन एसडीओ संजीव कुमार ने एक लाख रुपये से उनकी आर्थिक मदद भी की, उन्होंने कहा कि नंदलाल बीए करने के बाद बीएड की पढ़ाई कर आईएएस बनना चाहते हैं। आर्थिक स्थिति ठीक नही होने की वजह से कोचिंग करना नंदलाल के लिए मुश्किल है लेकिन फिर भी वह अपने लगन और जज्बे से आगे बढ़ रहे हैं।

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