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Inspirational Story: ‘कौमी एकता की मिसाल’, हिंदू समुदाय के लोग कर रहे मुगलकालीन मस्जिद की देखरेख

बिहार के नालंदा जिले से एक बार फिर कौमी एकता तस्वीर सामने आई है। बिहार शरीफ मुख्यालय से 12 किमी दूर धरहरा गांव है। अंदी पंचायत (अस्थावां प्रखंड) के लोगों के पहल की खूब तारीफ़ हो रही है।

Inspirational Story: Hindu community People Taking care of the Mughal era mosque

Inspirational Story: देश में जारी धार्मिक उन्माद के बीच बिहार के नालंदा जिले से कौमी एकता की तस्वीर सामने आई है। जहां के लोग कौमी एकता की मिसाल पेश कर रहे हैं। बिहार शरीफ मुख्यालय से 12 किमी की दूरी स्थित अंदी पंचायत के धरहरा गांव (अस्थावां प्रखंड) में हिंदू समुदाय के लोगों ने इंसानियत की मिसाल पेश की है। गांव में स्थित मुगलकालीन मस्जिद की देखरेख का ज़िम्मा हिंदू समुदाय के लोगों ने उठाया है। वहीं इसकी मरम्मत को लेकर काम भी शुरू करवा दिया गया है। आइए विस्तार से पूरा मामला जानतै हैं।

वीरान मस्जिद को आबाद करने की कवायद तेज़

वीरान मस्जिद को आबाद करने की कवायद तेज़

मानवता की मिसाल नालंदा जिले में पहले भी देखने को मिली है, माड़ी गांव में स्थित मस्जिद की देखरेख और उसमें 5 वक्त के अज़ान की ज़िम्मेदारी वहां के ग्रामीण उठा रहे हैं। ग़ौरतलब है कि सालों से मस्जिद में अज़ान टेप रिकॉर्डर के जरिए दिया जा रहा है, क्योंकि वहां मुस्लिम आबादी नहीं है। हिंदू समुदाय के लोग ही मस्जिद की देख रेख करते हैं। उसी की तर्ज़ पर धरहरा गांव में भी मस्जिद की देखरेख की ज़िम्मेदारी ग्रामीणों ने उठाई है। हिंदू समुदाय के लोगों ने मस्जिद की देखरेख की ज़िम्मेदारी उठाते हुए मस्जिद का सौंदर्यीकरण करवा रहे हैं।

मुगलकालीन मस्जिद की मरम्मत का शुरू हुआ काम

मुगलकालीन मस्जिद की मरम्मत का शुरू हुआ काम

धरहरा गांव का मस्जिद पूरी तरह जंगली दरखतों से ढक गया था, इसकी साफ़ सफ़ाई कराई जा रही है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि रमज़ान से पहले यह मस्जिद पूरी तरह से चकाचक हो जाएगा। अंदी पंचायत के धरहरा गांव निवासी पप्पू पासवान बताया कि कुछ महीने पहले उनके साथ हादसा हो गया था। हादसे की वजह से तबीयत बिगड़ गई थी। एक दिन रात में सोने के बाद ख़्वाब में उन्हें किसी अंजान व्यक्ति ने मस्जिद की देखरेख करने की बात कही। ख्वाब के बाद उन्होंन मस्जिद के मरम्मत का काम शुरू करवाया है।

पलायन की वजह से वीरान हुई मस्जिद

पलायन की वजह से वीरान हुई मस्जिद

मस्जिद के बारे में स्थानीय लोग बताते हैं कि जब देश का बंटवारा हुआ तो कुछ लोग गांव छोड़कर पाकिस्तान और बांग्लादेश चले गए। कुछ लोग ही गांव में बचे थे, धार्मिक विवाद की वजह से बचे हुए लोग भी गांव से पलायन कर गए। गांव से करीब दो किलोमीटर दूरी पर देशना गांव में कुछ लोग जाकर बस गए। वहां बहुत पुरानी लाइब्रेरी भी है। लोगों को वहां पलायन करने के बाद मस्जिद पूरी तरह से वीरान हो गया।

ग्रामीणों ने पेश की एकता की मिसाल

ग्रामीणों ने पेश की एकता की मिसाल

मस्जिद की देखरेख करने वाले शमीम अख़्तर ने बताया कि यह मस्जिद मुगलकालीन है। मस्जिद में वह इमामत (अज़ान के साथ साफ़ सफ़ाई) करते थे। बीमार होने की वजह से चलना फिरना मुश्किल हो गया और वह मस्जिद जाने में असमर्थ हो गए। इस वजह से मस्जिद में अज़ान और नमाज दोनों खत्म हो गई। धीरे-धीरे मस्जिद पूरी तरह जंगल की शक्ल में वीरान हो गया। ग्रामीणों की दरियादिली से एक बार फिर से मस्जिद को आबाद करने की शुरुआत की जा रही है। कल की तरह आज भी सभी लोग एक हैं और आगे भी इसी तरह एक होकर रहेंगे।

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