IIM topper ने शुरू किया सब्ज़ी बेचने का कारोबार, करीब 4 साल में बने करोड़ों के मालिक

IIM topper: इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद में कई बड़ी कंपनियां प्लेसमेंट के लिए आती हैं, चूंकि कौशलेंद्र वहां के गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों में शुमार थे तो उन्हें करोड़ों के पैकेज के साथ नौकरी मिल सकती थी।

IIM topper: इंसान पत्थर को भी तराश कर भगवान बना देता है, मेहनत और लगन से कामयाबी की बुलंदियों को छूता है। यह वाक्य आईआईएम टॉपर कौशलेंद्र कुमार पर सटीक बैठता है। किसी व्यक्ति को यह बोला जाए कि वह सब्ज़ी बेचकर करोड़ों के मालिक बन सकते हैं, तो वह सीधे यह कहेगा क्यों मज़ाक करते हो भाई ? लेकिन नहीं यह हकीकत है कि आप सब्ज़ी बेचकर भी करोड़ों के मालिक बन सकते हैं। बिहार के नालंदा ज़िले के रहने वाले कौशलेंद्र कुमार ने इसे साबित कर दिखाया है कि सब्ज़ी से भी करोड़ों का कारोबार हो सकता है। हालांकि आज के युवक यह चाहते हैं कि अच्छी पढ़ाई कर के अच्छी नौकरी मिल जाए और मोटी सैलरी उठाकर खुशहाल ज़िंदगी बिताएं, उन य़ुवाओं की सोच को कौशलेंद्र ने बदलने की कोशिश की है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कौशलेंद्र खुद आईआईएम टॉपर रहे हैं, और उन्होंने सब्ज़ी बेचकर करोड़ों एम्पायर खड़ा कर दिया है।

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    IIM topper ने शुरू किया सब्ज़ी बेचने का कारोबार, करीब 4 साल में बने करोड़ों के मालिक
    साधारण परिवार से है कौशलेंद्र का ताल्लुक

    साधारण परिवार से है कौशलेंद्र का ताल्लुक

    नालंदा जिले के मोहम्मदपुर गांव निवसी कौशलेंद्र का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। कौशलेंद्र के ज्यादातर तालीम सरकारी स्कूलों से ही हासिल की। उन्होंने नवोदय विद्यालय से शुरुआती पढ़ाई की। उसके बाद इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च जूनागढ़( सरकारी कॉलेज) से इंजीनियरिंग की शिक्षा ली। फिर उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए की डिग्रि ली। यूं कह लीजिए की उन्होंने पूरी तालीम ही सरकारी संस्थानों से पूरी की है। ग़ौरतलब है कि हिंदुस्तान के मशहूर संस्थान इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद में दाखिला लेना काफी मुश्किल होता है। वहां के गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों की सूची में कौशलेंद्र का नाम शामिल हैं।

    सब्ज़ी बेचने का क्यों किया फ़ैसला ?

    सब्ज़ी बेचने का क्यों किया फ़ैसला ?

    इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद में कई बड़ी कंपनियां प्लेसमेंट के लिए आती हैं, चूंकि कौशलेंद्र वहां के गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों में शुमार थे तो उन्हें करोड़ों के पैकेज के साथ नौकरी मिल सकती थी। इसके बावजूद उन्होंने सब्ज़ी बेचने का सोचा। उनके इस फैसले पर आपके ज़ेहन में भी यह सवाल रहा होगा कि टॉपर गोल्ड मेडलिस्ट होने के बाद उन्होंने नौकरी क्यों नहीं की ? दरअसल जब वह गुजरात में पढ़ाई कर रहे थे तो उन्होंने बिहार से मजदूरों का पलायन होते देखा, उनकी परेशानियों से रूबरू हुए। इसके बाद कौशलेंद्र ने फैसला लिया की वह कुछ ऐसा करेंगे जिससे प्रदेश के लोगों का पलायन रुक सके। वह एक किसान के बेटा थे, इसलिए उन्होंने सब्ज़ी बेचने के कारोबार में ही कैरियर की तलाश की।

    सब्ज़ी बेचने के लिए किया रिसर्च

    सब्ज़ी बेचने के लिए किया रिसर्च

    कौशलेंद्र ने बिहार की राजधानी पटना में दुकान खोली और सब्ज़ी बेचना शुरू किया और पहले दिन सब्ज़ी बेचकर 22 रुपये का मुनाफा कमया। क़रीब 4 साल बाद उन्होंने सबंज़ी के कारोबार से 5 करोड़ रुपये का एम्पायर खड़ा कर दिया। अब आप सोच रहे होंगे की सब्ज़ी बेचकर करोड़ों का एम्पायर खड़ा करना कैसे मुमकिन है? उन्होंने सब्ज़ी बेचने के कारोबार पर रिसर्च किया तो पाया की कम दामों पर किसान सब्ज़ी बेचते हैं। शहर में पहुंचते-पहुंचते सब्ज़ी के दाम बढ़ जाते हैं। गांव से शहर तक सब्ज़ी पहुंचाने में बिचौलिया सिस्टम की वजह से किसान को सही मुनाफा नहीं मिल पाता है।

    कौशलेंद्र का है करोड़ों रुपये का टर्नओवर

    कौशलेंद्र का है करोड़ों रुपये का टर्नओवर

    कौशलेंद्र ने फ़ैसला किया की वह बिचौलिया सिस्टम को बदल कर किसानों का सीधा मुनाफा पहुंचाएंगे। फिर उन्होंने किसानों के ज़रिए सब्ज़ी को सीधा शहरी बाज़ार में पहुंचाने का ब्लूप्ट तैयार किया और कामयाब भी हुए। उन्होंने पटना के पास एक कोल्ड स्टोरज बनवाया ताकि किसानों के द्वारा लाई गई सब्ज़ियां खराब नहीं हो। इस तरह उनके साथ किसा जुड़ते चले गए और आज की तारीख में 22 हज़ार से ज्यादा किसान कौशलेंद्र के जुड़े हुए हैं, अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं। इसके साथ ही कौशलेंद्र भी सब्ज़ी के कारोबार से करोड़ों का टर्नओवर कर रहे हैं।

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