Organic Farming: जैविक मखाना के बाद अब बढ़ी सीमांचल की जैविक मछलियों की मांग, लाखों कमा रहे प्रभात

Organic Farming: प्रभात कुमार सिंह मुन्ना ने बताया कि वह अमेरिकन रेहू और कतला जैसी मछलियों के कई किस्मों का उत्पादन कर रहे हैं। ग़ौरतलब है कि वह सभी किस्मों की मछली का जैविक विधि से उत्पादन कर रहे हैं। इन मछलियों के...

Organic Fish Farming In Bihar: बिहार में जैविक खेती कर किसान लाखों में कमा रहे हैं। पहले सब्जी की जैविक खेती कर मुनाफा कमा रहे थे। अब मछली पालन में भी जैविक प्रयोग कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। सीमांचल के जैविक मखाना की डिमांड तो मार्केट में बढ़ ही रही है। वहीं अब जैविक मछली की भी मांग बढ़ रही है। अररिया ज़िले के पैकपार (भरगामा प्रखंड) निवासी प्रभात कुमार सिंह मुन्ना ने यह अनोखा प्रयोग किया है। उनके इस प्रयोग को देखने के लिए पटना और दिल्ली से भी विभागीय टीम पहुंची थी। इनके काम काफी सराहना हो रही है।

मत्स्य पालन प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण

मत्स्य पालन प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण

प्रभात कुमार सिंह मुन्ना (किसान) के तालाब के पास ही राज्य सरकार की तरफ़ से मत्स्य पालन प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण किया जा रहा है। ट्रेनिंग सेंटर खुल जाने से स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के अवसर बनेंगे। इसके साथ ही जैविक मछली पालन को भी बढ़ावा मिलेगा। ग़ौरतलब है कि प्रभात कुमार ने जैविक मछली पालन की शुरुआत करने से पहले पहले तमिलनाडु और बांग्लादेश में जाकर ट्रेंनिंग ली। इसके बाद उन्होंने अपने गांव में इस अनोखे प्रयोग को कामयाब बनाया। 26 एकड़ के तालाब में वह मछली और मछली बीज उत्पादन कर रहे हैं।

जैविक विधि से मछली का उत्पादन

जैविक विधि से मछली का उत्पादन

प्रभात कुमार सिंह मुन्ना ने बताया कि वह अमेरिकन रेहू और कतला जैसी मछलियों के कई किस्मों का उत्पादन कर रहे हैं। ग़ौरतलब है कि वह सभी किस्मों की मछली का जैविक विधि से उत्पादन कर रहे हैं। इन मछलियों के खुराक में यूरिया (फॉस्फेट) का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इनके खुराक में सरसों की खल्ली, उबाला हुआ मक्का, गेहूं और धान शामिल है। खाने के तौर पर उन्हें खल्ली और अनाज ही दिया जा रहा है।

जैविक मछली ज्यादा पसंद कर रहे लोग

जैविक मछली ज्यादा पसंद कर रहे लोग

मछली उत्पादक प्रभात कुमार सिंह मुन्ना की मानें तो केमिकल का इस्तेमाल करते हुए मछली पालन और जैविक विधि से पालन में ज्यादा फर्क नहीं होता है। केमिकल का इस्तेमाल करते हुए मछली का अगर 1 साल में होता है तो वहीं जैविक विधि से मछली के ग्रोथ में 13 से 14 महीने का वक्त लगता है। इस तरह अगर मुनाफे की बात की जाए तो दोनों विधि से मछली पालन में हुए मुनाफे में ज्यादे का फ़र्क नहीं होता है। जैविक विधि से उत्पादित मछली की डिमांड ज्यादातर पटना, कोलकाता और दिल्ली समेत अन्य प्रदेशों में हो रही है। वहीं जैविक मछली की कीमत अन्य तरीक़े से उत्पादित मछली की कीमत से ज्यादा होती है। सेहत के ऐतबार से भी लोग जैविक मछली को ज़्यादा पसंद कर रहे हैं।

बाज़ार में बढ़ी जैविक मछली की डिमांड

बाज़ार में बढ़ी जैविक मछली की डिमांड

बाज़ार में जैविक मछली की डिमांड बढ़ते ही व्यापारी खुद प्रभात कुमार सिंह मुन्ना से संपर्क साध कर जैविक मछली की डिमांड कर रहे हैं। आपको बता दें कि मौजूदा समय में विभिन्न प्रकार की मछलियों के उत्पादन के लिए पैकपार बड़ा केंद्र बन चुका है। किसान प्रभात सिंह मुन्ना के मुताबिक 2 साल पहले मछली बीज उत्पादन शुरु किया था। अब सहरसा, सुपौल, पूर्णिया, मधेपुरा जैसे विभिन्न जिलों में जैविक मछली बीज की सप्लाई की जा रही है। मछली मिथिलांचल की पहचान होने के साथ ही यहां की संस्कृति का हिस्सा भी है। इस इलाके के ज़्यादातर परिवार का गुज़ार मछली उत्पादन से ही होता है।

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