कौन है IAS अफसर की पत्नी चंपा विश्वास? लालू राज में महीनों तक घर के अंदर होती थी हैवानियत, मोदी ने अब किया याद
Champa Biswas News: बिहार की राजनीति में जब भी "जंगलराज" का जिक्र होता है, तो उन अंधेरे सालों की कहानियां लोगों की रूह कंपा देती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार 26 सितंबर ही में 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' की शुरुआत के दौरान इसी दौर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लालू यादव के शासन में हालात इतने भयावह थे कि IAS अफसर से लेकर डॉक्टर तक इसके शिकार हुए और उनकी पत्नियों को तक हैवानियत झेलनी पड़ी।
पीएम मोदी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर IAS अफसर की पत्नी चंपा विश्वास का दर्दनाक किस्सा चर्चा में है। 1990 से 2005 तक का दौर बिहार की राजनीति में अपराध और सत्ता के गठजोड़ का प्रतीक माना जाता है। हत्या, अपहरण, रंगदारी और बलात्कार की घटनाएं इतनी आम हो गई थीं कि लोग इसे "जंगलराज" कहने लगे। इस दौरान सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि अफसरों और उनके परिवार तक को निशाना बनाया जाता था। इन्हीं घटनाओं में से एक थी IAS बीबी विश्वास की पत्नी चंपा विश्वास के साथ हुआ बर्बर अत्याचार।

कौन हैं चंपा विश्वास? (who is Champa Biswas)
चंपा विश्वास, 1982 बैच के IAS अधिकारी बीबी विश्वास की पत्नी थीं। बीबी विश्वास 1995 में बिहार के समाज कल्याण विभाग में सचिव पद पर कार्यरत थे। ऊंचे पद और प्रतिष्ठा के बावजूद उनके परिवार को जो कुछ सहना पड़ा, वह उस दौर की भयावह तस्वीर पेश करता है।
कैसे शुरू हुआ दर्दनाक सिलसिला
7 सितंबर 1995 को RJD विधायक हेमलता यादव ने चंपा विश्वास को अपने घर बुलाया। बताया जाता है कि वहीं हेमलता के बेटे मृत्युंजय यादव ने चंपा के साथ बलात्कार किया। इसके बाद चुप रहने की धमकी दी गई और कहा गया कि अगर उन्होंने किसी से इस बारे में बात की तो उनके पूरे परिवार को गंभीर अंजाम भुगतना होगा।
यहीं से चंपा विश्वास की जिंदगी एक अंतहीन डर और पीड़ा में बदल गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले दो सालों तक उन्हें लगातार यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया। सिर्फ चंपा ही नहीं, बल्कि उनकी मां, भतीजी और यहां तक कि घरेलू सहायिकाओं को भी निशाना बनाया गया।
न्याय की लड़ाई और राजनीतिक दबाव
जब चंपा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, तो उन्हें मामले को दबाने की सलाह दी गई। लेकिन चंपा चुप नहीं रहीं। उन्होंने बिहार के तत्कालीन राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर न्याय की गुहार लगाई। इस पत्र के सामने आने के बाद मामला सुर्खियों में आया और राजनीतिक गलियारों में भूचाल मच गया।
राज्यपाल के हस्तक्षेप के बाद 1997 में मृत्युंजय यादव को गिरफ्तार किया गया। हेमलता यादव कुछ समय तक फरार रहीं, लेकिन आखिरकार उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया।

अदालत का फैसला और निराशा
2002 में पटना की निचली अदालत ने मृत्युंजय यादव को 10 साल की सजा और हेमलता यादव को 3 साल की सजा सुनाई। इस फैसले से चंपा और उनके परिवार को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
बाद में पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलट दिया और दोनों को बरी कर दिया। यह फैसला चंपा विश्वास के लिए गहरी निराशा और न्याय व्यवस्था पर सवाल छोड़ गया।
गुमनामी में बीता जीवन
इस पूरे मामले ने चंपा विश्वास की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। पति बीबी विश्वास के निधन के बाद वे कोलकाता चली गईं और वहां गुमनाम जिंदगी जीने लगीं। हाल के वर्षों में उनके बारे में कोई सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है। वे अब पूरी तरह से सार्वजनिक जीवन से दूर हैं।
पीएम मोदी ने क्यों किया जिक्र?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में जंगलराज का जिक्र कर यह संदेश देने की कोशिश की कि बिहार में एनडीए सरकार आने के बाद महिलाओं की स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और सशक्त हैं, जबकि लालू राज में हालात बेहद खराब थे।
चंपा विश्वास की कहानी सिर्फ एक महिला की त्रासदी नहीं है, बल्कि उस दौर के बिहार की भयावह हकीकत की झलक भी है। यह याद दिलाती है कि सत्ता और अपराध के गठजोड़ ने कैसे प्रशासन को खोखला कर दिया था। आज जब यह किस्सा फिर से चर्चा में है, तो यह बिहार की राजनीति और समाज दोनों के लिए एक कड़वी याद बनकर सामने आता है।












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