कौन हैं IAS अलंकृता जिन्हें दफ्तर जाते दिखी लापरवाही, गाड़ी से उतर तुरंत की कार्रवाई,प्रेरणादायक है इनकी कहानी

Success Story Of IAS Alankrita Pandey: यूपीएससी परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। इस हाई प्रोफाईल एग्जाम में कई अभ्यर्थी शामिल होते हैं, लेकिन कामयाबी गिने चुने परीक्षार्थियों को मिलती है। इसके बाद ही IAS, IPS और IFS जैसा उच्च पद हासिल होता है।

UPSC परीक्षा पास कर अपनी अलग पहचान बनाने वाली IAS अधिकारी अलंकृता पांडेय के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके काम करने के अंदाज़ से चारों तरफ़ तारीफ़ हो रही है। IAS अधिकारी अलंकृता पांडेय मौजूदा वक्त में जहानाबाद की डीएम हैं।

IAS Alankrita Pandey seen carelessly while going office got out of the car and took immediate action

सोमवार जहानाबद डीएम अलंकृता पांडेय दफ़्तर जा रही थीं। अचानक उनकी नज़र लचर ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ी, फिर क्या था वह तुरंत उतरी और ख़ुद से ही ट्रैफिक कंट्रोल करने लगीं। वैसे लोग जो की यातायात नियमों का पालन नहीं कर रहे थे, उनका तुरंत मौके पर चालान काटा गया। लापरवाही बरतने वाले ट्रैफिक कर्मियों को फटकार लगाई।

वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में जहानाबाद डीएम अलंकृता पांडेय ने कहा कि, कई बार ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए दिशा निर्देश दिए गए थे, लेकिन उस पर अम्ल नहीं किया जा रहा था। जब ऑफिस जा रही थी तो फिर दिखा कि लोग ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसलिए खुद से ही लोगों को जागरूक करने के लिए चालान काटा गया। करीब 80 गाड़ियों के चालान काटे गए।

IAS अलंकृता पांडेय ने कहा कि यह लोगों की भलाई के लिए ही किया गया, क्योंकि जान बहुत कीमती है। एक बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने से जान चली जाए तो फिर कुछ भी कर के वापिस नहीं आ सकता है। कम से कम लोग फाइन के डर से ही ट्रैफिक नियमों का पालन करेंगे। इससे सुरक्षित तो रहेंगे। जहानाबाद डीएम अलंकृता पांडेय के इस पहल की लोग जमकर तारीफ़ कर रहे हैं।

IAS अलंकृता पांडेय की सोच जितनी शानदार है, वैसे ही उनकी कामयाबी कहानी भी काफी प्रेरणादायक है। साल 2015 में अलंकृता पांडेय ने पहली कोशिश में ही यूपीएससी परीक्षा में कामयाबी हासिल कर ली थी। उन्होंने 85वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की थी।

उत्तर प्रदेश के कानपुर की रहने वाली 2016 बैच की IAS अधिकारी अलंकृता पांडेय को शुरुआत में वेस्ट बंगाल कैडर अलॉट हुआ था। IAS अंशुल अग्रवाल से शादी के बाद इंटर कैडर ट्रांसफर कर उन्हें बिहार भोज दिया गया। आईएएस अलंकृता के यूपीएससी का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा। साल 2014 में ही उन्होंने यूपीएससी एग्ज़ाम की तैयारी का फैसला किया, लेकिन बीच साल में ही वह डिप्रेशन की मरीज़ हो गई थी।

एंटी डिप्रेशन दवाई और एंगर मैनेजमेंट के साथ-साथ दोस्तों और परिवार के लोगों की काउंसलिंग उन्होंने इस मर्ज़ से बाहर निकलने की कोशिश भी की। लेकिन साल 2014 के UPSC प्रीलिम्स में शामिल नहीं हो पाईं। साल 2015 में वह मर्ज़ को मात देते हुए पहली बार UPSC Exam दी और कामयाब हो गई।

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए अलंकृता रोज़ाना आठ घंटे पढ़ाई करती थीं। ग़ौरतलब है कि वह यूपीएससी एग्ज़ाम देने से पहले बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी में काम करती थीं। उन्होंने MNNIT इलाहाबाद से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की तालीम ली है।

आपको बता दें कि अलंकृता पांडेय को इंटर कैडर तबादले के लिए सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) और बाद में दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा था। दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले पर केंद्र सरकार की तरफ़ से कैडर बदला गया था। इंटर कैडर तबादला के लिए उन्हें दो साल से ज्यादा वक्त तक परेशानी झेलनी पड़ी थी।

अलंकृता पांडेय ने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए कामयाबी का मंत्र भी दिया है। सुबह 6 बजे उनके दिन की शुरुआत होती है। जॉगिंग और योग के बाद वह पढ़ाई करने बैठती थीं। किसी प्रकार की परेशानी महसूस होती तो कागज पर आईएएस की तैयारी क्यों शुरू लिखती थीं। इससे अपने गोल (लक्ष्य) को टारगेट कर पाती थी।

अलंकृता ने एक ही सबजेक्ट की कई किताबों की पढ़ने की बजाए एक ही किताब को कई बार पढ़ा। पहले मैक्रो लेवल पर पकड़ हासिल की और बाद में माइक्रो लेवल के प्वॉइंट्स क्लियर किए। सब्जेक्टवाइज और ऑब्जेक्टिव की तैयारी कर उन्होंने मई 2015 में UPSC मेन्स के सिलेबस की तैयारी पूरी कर ली थी।

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