Historic Temple In Bihar: इस ज़िले में है हज़ारों साल पुराना मंदिर, सोने चांदी से किया गया था निर्माण
Bihar Temple News: बिहार में घूमने के लिए कई ऐतिहासिक जगहें मौजूद हैं। आप मुजफ्फर जिले में स्थित हज़ारों साल पुराने मंदिर को घूमने ज़रूर जाएं। मान्यता है कि वहां हर मनोकामना पूरी होती है।

Muzaffarpur Temple News: बिहार में पर्यटन के ऐतबार से घूमने के लिए कई ऐतिहासिक धरोहर मौजूद हैं। देश विदेश से लाखों की तादाद में सैलानी यहां घूमने आते हैं। आज हम आपको मुजफ्फरपुर ज़िले में स्थित ऐतिहासिक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका निर्माण सोने चांदी से करवाया गया था। स्थानीय लोगों की मानें तो यह मंदिर हज़ारों साल से भी ज्यादा पुराना है। मुजफ्फरपुर जिले के बरियारपुर गांव (बंदरा प्रखंड) में शिव शक्ति धाम मंदिर मशहूर है। यहां के बाबा बुद्धेश्वर नाथ को ग्रामीण बुढ़वा महादेव की संज्ञा देते हैं। आपको बता दें कि बिहार के मशहूर शिव मंदिरों में बुढ़वा महादेव मंदिर की भी गिनती होती है।
मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड में दो मंदिर मुतलुपुर का बाबा खगेश्वर नाथ और बरियारपुर का बाबा बुद्धेश्वर नाथ मंदिर काफी मशहूर हैं। इन दोनों मंदिरों का ज़िक्र वार्षिक विशेषांक कल्याण में गीताप्रेस गोरखपुर ने किया है। बंदरा प्रखंड के बरियारपुर गांव के लोगों की मानें तो शिवशक्ति धाम उर्फ बुद्धेश्वर महादेव मंदिर हज़ारों साल से भी ज्यादा पुराना है। मंदिर की देखभाल करने वाली धर्मदा कमेटी के अध्यक्ष विमल कुमार सिंह ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि हज़ार साल पहले धार नगर (मध्य प्रदेश) से राजा माधव सिंह बरियारपुर गांव पहुंचे थे।
राजा माधव सिंह जल मार्ग से मुजफ्फरपुर के बरियारपुर गांव (बंदरा प्रखंड) पहुंचे थे। उसी दौरान भगवान शंकर का स्वयंभू शिवलिंग खुद ही प्रकट हो गया था। वहीं पास को पोखर में सोना-चांदी से भरी एक नाव बिना पतवार के लगी हुई थी। उसी सोने-चांदी और धन से मंदिर का निर्माण करवाया गया था। स्थानीय लोगों की मानें तो इस मंदिर में हर मनोकामना पूरी होती है। इस मंदिर को मनोकामना मंदिर भी कहते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि भगवना शिव से मांगी सभी मुरादें यहां पूरी होती हैं।

ग्रांमीणों ने कहा कि यह मंदिर इलाके का सबसे पुराना मंदिर है, इसलिए ग्रामीण इस मंदिर में मौजूद भगवान शंकर मूर्ति को बुढ़वा महादेव भी बुलाते हैं। विमल कुमार सिंह (अध्यक्ष, मंदिर कमेटी) ने बताया कि यह मंदिर शांत माहौल में स्थित है। यहां पूजा पाठ के लिए माहौल काफी खुशनुमा रहता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि मंदिर के 1 किलोमीटर के दायरे में कोई आबादी नहीं है। पूजा करने के लिए शांत वातावरण हमेशा ही रहता है। सुबह-शाम की पूजा की जाती है।
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