Historic Shivling In Bihar: इस शिवलिंग का कोई नहीं सुलझा पाया रहस्य, ख़ुद अंकुरित होकर निकलने का है दावा
Historic Shivling In Saharsa: बिहार में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जहां की अनोखी मान्यता है और सथ्नीय लोगों का अलग-अलग दावा भी है। आज हम आपको बिहार के सहरसा ज़िले में मौजूद एतिहासिक शिवलिंग के बारें में बताएंगे। जिसका रहस्य आज तक कोई सुलझा नहीं पाया है, ग्रामीणों का दावा है कि 14वीं शताब्दी में अंकुरित शिवलिंग प्रकट हुआ था।
काठो पंचायत (सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल क्षेत्र, सहरसा) में स्थित बाबा मटेश्वर धाम में अंकुरित शिवलिंग मौजूद है। स्थानयी लोगों का दावा है कि समतल जमीन से लगभग 40 फीट ऊंचे टीले पर स्थापित काले पत्थर शिवलिंग खुद से अंकुरित होकर प्रकट हुआ है।

4 फीट चौड़ा और ढाई फीट ऊंचे शिवलिंग को लेकर लोगों का दावा है कि इसका ताल्लुक पाताल लोक से है। शिवपुराण में भी इस शिवलिंग की चर्चा की गई है। स्थानी लोगों का कहना है कि आज की तारीख तक इंजीनियरों की टीम भी शिवलिंग की गहराई को नहीं माप पाई। अष्टदल में कटे शिवलिंग और चबूतरे के बीच चारों तरफ़ 1 इंच का जगह है।
कुमरजीत (मंदिर के पुजारी) ने बताया कि यह स्थल एक सिद्ध पीठ मंदिर है। मृतेश्वरनाथ महादेव के अपभ्रंस की शक्ल में मटेश्वरनाथ भी कहा जाता है। पुजारी कुमरजीत ने दावा करते हुए कहा कि पूरी दुनिया में यही एक शिवलिंग है, जहां पानी चढ़ाने पर गायब हो जाता है। इसका आजतक किसी को भी पता नहीं चला है।
कुमरजीत (पुजारी) ने कहा कि पूरे साल शिवलिंग पर पानी चढ़ाया जाता है, लेकिन पानी गायब होने का रहस्य कोई सुलझा नहीं पाया है। वहीं शिवलिंग चढ़ाया जाने वाला पैसा, सुपारी और फूल भी खुद ही गायब हो जाता है। चैत्र-वैशाख के महीने में अपने आप जल ऊपर हो जाता है।
मंदिर के पुजारी ने कहा कि सावन के महीने बाबा मटेश्वर धाम में तिल रखने तक की जगह नहीं होती है। मुंगेर जिला के छर्राघाट से लोग जल भरकर मंदिर में बाबा का जलाभिषेक करने पहुंत हैं। मान्यता है कि यहां आने श्रद्धालु की हर तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।












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