बिहार: गांव में नहीं है एक भी मुस्लिम परिवार, हिंदु समुदाय के लोग करते हैं 5 वक़्त नमाज़ अदा

नालंदा जिले के माड़ी गांव (बेन प्रखंड) में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है फिर यहां तय वक्त पर पांच बार अज़ान होने के साथ ही नमाज़ भी अदा की जाती है।

नालंदा, 10 जून 2022। आज देश में नफरत इतना ज़्यादा बढ़ गई है कि धर्म के ठेकेदार आपस में छोटी-छोटी बातों लड़ने के लिए तैयार रहते हैं। लेकिन बिहार में एक ऐसा भी गांव है, जहां नफ़रत नहीं मोहब्बत के बीज बोये जाते हैं। आपको यक़ीन नहीं हो रहा होगा लेकिन हक़ीक़त में एक ऐसा गांव है जहां एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है फिर भी पांचो वक़्त की नमाज़ अदा की जाती है। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे की वहां हिंदु समुदाय के लोग नमाज़ अदा करते हैं।

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    मस्जिद के बाहर माथा भी टेकते हैं लोग

    मस्जिद के बाहर माथा भी टेकते हैं लोग

    नालंदा जिले के माड़ी गांव (बेन प्रखंड) में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है फिर यहां तय वक्त पर पांच बार अज़ान होने के साथ ही नमाज़ भी अदा की जाती है। हर चीज़ नियम के मुताबिक हिंदु समुदाय के लोग करते हैं। यहां तक कि गांव की मस्जिद की सफ़ाई भी हिंदु समुदाय के लोग ही करते हैं। ग़ौरतलब है कि उनके परिवार में खुशी के मौक़े पर मस्जिद के बाहर सब माथा भी टेकते हैं। गांव वालों का मानना है कि ऐसा करने से उनपर कोई भी परेशानी नहीं आती है। सभी लोगों की मुश्किलें आसान हो जाती है।

    गांव में नहीं है एक भी मुस्लिम परिवार

    गांव में नहीं है एक भी मुस्लिम परिवार

    स्थानी लोग बताते हैं कि यहां पहले मुस्लिम समुदाय के लोग रहते थे। लेकिन वक़्त के साथ धीरे-धीरे मुस्लिम समुदाय के लोग पलायन कर गए। अब यहां एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है लेकिन एक मस्जिद अभी भी है। मस्जिद के निर्माण को लेकर कोई जानकारी नहीं है और ना ही ये मालूम है कि मस्जिद की तामीर कब और किसने करवाई। ग्रामीणों की मानें तो यह मस्जिद क़रीब 250 साल पुरानी है। वहीं मस्जिद के सामने मज़ार भी है जहां लोग खुशी से चादरपोशी भी करते हैं।

    मुस्लिम नहीं तो फिर कौन देता है अज़ान ?

    मुस्लिम नहीं तो फिर कौन देता है अज़ान ?

    यह सवाल आपके भी मन में उठ रहा होगा कि माड़ी गांव में जब एक भी मुस्लिम भी परिवार नहीं है तो फिर मस्जिद में अज़ान कौन देता है। गांव वालो ने इसका एक उपाय निकाला है। उन्होंने अज़ान समेत नमाज़ की प्रकिया को रिकॉर्ड कर पेन ड्राइव में डाल कर रख लिया है। जब नमाज़ का वक़्त होता है तब अजान की रिकॉर्डिंग बजा दी जाती है और फिर तय समय पर रिकॉर्डिंग के ज़रिए ही नमाज़ अदा कर ली जाती है।

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