Gaya News: जंगलों और पहाड़ों के बीच बसे गांव के ऊपर से गुज़रता है तोप का गोला, ‘मौत के साए’ में जी रहे हैं लोग
Bihar Village:ग्रामीणों की मानें तो एक चौकीदार 9 गांवों में जाकर आर्मी अभ्यास की सूचना देता है। सूचना देने के लिए कई लोगों को रखना चाहिए ताकि सही तरीक़े से ग्रामीणों को सूचना मिल सके और लोग सतर्क हो जाएं।

Bihar Village: बिहार के गया के जिले के एक गांव में लोग दहशत में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर की दूरी पर गुलरबेद गांव में हाल ही में हुए बम धमाके में 3 लोगों की मौत हो गई वहीं दो लोग ज़ख्मी हो गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि तोप का गोला गिरने से यह हादसा हुआ है। गांव के लोगों की मानें तो सेना की फायरिंग रेंज से गोला आकर मांझी के घर पर गिरा था। वहीं आर्मी का कहना है कि जिस दिन यह हादसा हुआ उस दिन किसी भी प्रकार की फायरिंग प्रैक्टिस नहीं हुई थी। बहरहाल इस पूरे मामले में गया डीएम ने जांच के लिए कमेटी का गठन किया है।
जंगलों और पहाड़ों के बीच बसे गांव में करीब 250 लोगों की आबादी है। गांव वालों का कहना है कि यह क्षेत्र आर्मी फायरिंग रेंज के बीच में पड़ता है। गांव वालों का कहना है कि गुलेरबद के अलावा 40 गांव और हैं जो फायरिंग रेंज में आते हैं। फायरिंग प्रैक्टिस के दौरान गांव के ऊपर से तोप के गोले गुजरते हैं। गांव के सबसे बाहरी हिस्से में में पड़ने वाले मांझी के घर के आंगन में गोला गिरने से हादसा हुआ था। आज भी हादसे का निशान वहां मौजूद है। बुमेर पंचायत के मुखिया संजीव कुमार ने कहा कि पंचायत के 10 गांव फायरिंग रेंज की वजह से डैंजर जोन में है। आये दिन यहां हादसा होता है। लोगों की जानें जाती है लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है, ना ही पीड़ितों को मुआवजा मिलता है।
आर्मी से जब मुआवज़े की बाद की जाती है तो वह कहते हैं यह आर्मी का प्रतिबंधित क्षेत्र है, यहां इस तरह का हादसा होने पर मुआवजा देने कोई प्रावधान नहीं है। ग्रामीणों की मानें तो फायरिंग रेंज चिन्हित करने के लिए ना तो बाउंड्री है और न ही तार की फेंसिंग की गई है। इतना ही नहीं वहां किसी प्रकार का झंडे या निशान भी नहीं है, जिससे फायरिंग रेंज का पता लग सके। फायरिंग रेंज में हैंड ग्रेनेड की प्रैक्टिस के लिए बड़े-बड़े गड्ढे बनाए गए हैं। 3 फायरिंग रेंज बनाए गये हैं, त्रिलोकपुर-गोही पहाड़ फायरिंग रेंज लगभग 16 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। इसके अलावा मनफर-गोही और दिहुरी-डुमरी फायरिंग रेंज है। दोनों करीब 5 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ हैं। रॉकेट लॉन्चर से लेकर मोर्टार तक अलग-अलग विंग के जवान तय शेड्यूल पर अभ्यास करते हैं।
गांव वालों का कहना है कि फायरिंग रेंज में अभ्यास करने की सूचना बाराचट्टी थाने को आर्मी की तरफ से दी जाती है। थाने की तरफ़ से गांव के चौकीदार को अभ्यास की जानकारी दी जाती है। उसके बाद एक चौकीदार फायरिंग जोन में आने वाले 9 गांवों में जा जाकर लोगों को सतर्क करता है। हाल ही में हुए बम धमाके में जिला प्रशासन की तरफ से मृतक के परिजनों को 23 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी गई। वहीं डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने 5 सदस्यीय जांच टीम का गठन किया । सिटी एसपी, एसडीओ, डीएसपी (शेरघाटी) और फॉरेंसिक विभाग के अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं।
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