Bihar News: BPSC से बहाल भी हुए, स्कूलों में योगदान भी दिया, फिर शुरू इस्तीफ़ों का सिलसिला
Bihar BPSC Teacher News: बिहार में बीपीएससी (BPSC) परीक्षा पास करने के बाद बहाल हुए शिक्षकों की पोस्टिंग हुई, उन्होंने स्कूलों में योगदान भी दिया। लेकिन अब बीपीएससी शिक्षकों को शिक्षा विभाग के नियम रास नहीं आ रहे हैं। नतीजा यह हुआ की अब उन्होंने इस्तीफ़ा देना शुरू कर दिया है।
बिहार के औरंगाबाद ज़िले से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं, जहां अभी तक 30 शिक्षकों ने इस्तीफा दे दिया है। 9 शिक्षकों ने 1 फरवरी को जिला शिक्षा पदाधिकारी को इस्तीफ़ा सौंपा। डीईओ ने शिक्षकों का इस्तीफ़ा भी मंज़ूर कर लिया है।

शिक्षकों के लगातार इस्तीफ़ा देने के बाद से लोगों के ज़ेहन में यह सवाल घर कर रहा है कि आखिर मेहनत से नौकरी पाने वाले शिक्षक इस्तीफ़ा क्यों दे रहे हैं? टीचरों नें अपनी नौकरी छोड़ने की वजहों को तो साफ नहीं किया, सिर्फ़ निजी समंस्या बताते हुए इस्तीफ़ा दिया है।
इस्तीफ़ा पर चर्चा करते हुए लोगों के बीच से जो बाते सामने निकल आई हैं, वह चौंकाने वाली हैं। दरअसल बीपीएसी परीक्षा पास करने बाद पहले से कार्यरत टीचर्स की पत्नियों की भी बहाली हुई है। शिक्षा विभाग द्वारा ज़्यादातर शिक्षकों की पोस्टिंग अलग-अलग जगह ज़िलों में कर दी गई है।
पति दूसरे ज़िले में पढ़ा रहे हैं तो, पत्नी की पोस्टिंग अलग ज़िले में कर दी गई है। ज्यादातर शिक्षकों को यह बात रास नहीं आई, यह वजह है कि उन्होंने इस्तीफ़ा देना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि घर से काफी दूर पोस्टिंग है, आने-जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
ऐसी नौकरी नहीं चाहिए जिससे परिवारिक जीवन ख़राब होने लगे। इसलिए पद से इस्तीफ़ा दे दिया है।
1 फरवरी को प्राथमिक विद्यालय पाठक बिगहा (औरंगाबाद सदर प्रखंड) में पोस्टेड शिक्षक नीतू यादव, प्राथमिक विद्यालय चेचाढ़ी (ओबरा) में पोस्टेड प्रज्ञा परमिता महाराणा, मध्य विद्यालय केताकी-2 (देव) में पोस्टड ऐश्वर्या श्रीवास्तव ने इस्तीफ़ा दिया।
मध्य विद्यालय अमरपुरा (रफीगंज) में काम कर रहे अविनाश सिंह, खैरी मध्य विद्यालय में पोस्टेड हर्षवर्धन, प्राथमिक विद्यालय अधीन बिगहा से कृष्णा पांडेय, मध्य विद्यालय बलार में पोस्टेड उमाकांत मिश्र, प्राथमिक विद्यालय नाथू बिगहा (मदनपुर प्रखंड) में पोस्टेड रणधीर कुमार और प्राथमिक विद्यालय पाठक बिगहा में पोस्टे रजत यादव ने इस्तीफ़ा दे दिया।
विभिन्न स्कूलों में काम कर रहे शिक्षकों का कहना है कि के.के पाठक के नाम पर शिक्षा विभाग में बहुत मनमानी हो रही है। उनका कहना है कि पति-पत्नी दोनों शिक्षक हैं, तो उन्हें अलग-अलग जिले में पोस्टिंग देना सही नहीं है। कम वेतने में परिवार से दूर रहना मुमकिन नहीं है। पैसा बचेगा तभी तो परिवार चलेगा।
पत्नी के साथ रहकर एक ज़िले में नौकरी करते तो कुछ रुपये भी बचते। एक जगह पोस्टिंग होने से सही रहता, लेकिन शिक्षा विभाग में मनमानी चल रही है। इसलिए ऐसी नौकरी करने से क्या फ़ायदा कि परिवार को भी सही ढंग से नहीं चला पाएं।












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