इन लोगों के Gmail अकाउंट के डिएक्टिवेट होने का खतरा, एक्शन में आई बिहार सरकार
गूगल की ईमेल सेवा Gmail में फर्जी खातों की भरमार है। इसके अलावा गूगल क्रोम ब्राउजर में भी कई सुरक्षा चिंताएं सामने आई थीं, जिस वजह से कंपनी ने अपनी पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। अब कंपनी को ओर से लगातार यूजर्स को अलर्ट भेजा जा रहा। बिहार सरकार भी इस मामले में अलर्ट मोड पर है।
दरअसल पहले जीमेल पर अकाउंट बनाने के लिए किसी दूसरे अकाउंट का रिफ्रेंश जरूरी था, लेकिन अब आराम से मेल अकाउंट बन जाता है। कई लोग ट्रायल के तौर पर भी अकाउंट बनाकर छोड़ देते हैं, ऐसे में कंपनी के पास फर्जी खातों की भरमार हो गई है। इससे निपटने के लिए गूगल ने एक बड़ा कदम उठाया है।

गूगल के मुताबिक जिस अकाउंट से लगातार दो साल तक लॉगइन नहीं किया गया, उन्हें निष्क्रिय अकाउंट मान लिया जाएगा। हालांकि कंपनी ने ये साफ किया कि वो आपका अकाउंट हटाने से पहले मेल और रिकवरी मेल पर रिमाइंडर जरूर भेजेंगे। अगर तब भी आपने लॉगइन नहीं किया, तो आपके खाते को डिएक्टिवेट कर दिया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर क्रोम ब्राउजर में वेब पेमेंट्स, एपीआई, वीडियो आदि में गड़बड़ी पाई गई थी। जिसको गूगल ने दूर कर दिया है, ऐसे में वो सभी से ब्राउजर को अपडेट करने को कह रहा। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रसारण मंत्रालय ने ऑनलाइन सुरक्षा चिंताओं से निपटने के लिए 'द कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम' (CERT) बना रखी है। उसने भी सरकारी कर्मचारियों को गूगल क्रोम अपडेट करने की एडवाइजरी जारी की है। आमतौर पर सरकारी दफ्तरों में ब्राउजर्स को अपडेट नहीं किया जाता, ऐसे में सरकार चिंतित है।
इन एडवाइजरी को बिहार सरकार ने गंभीरता से लिया है। सरकार की आईटी टीम लगातार सभी दफ्तरों को इस एडवाइजरी के बारे में बता रही। ताकि वक्त पर ब्राउजर अपडेट हो सके। वहीं जिन जीमेल खातों का इस्तेमाल नहीं हो रहा, उन्हें डिएक्टिवेट होने से बचाने के लिए लॉगइन किया जा सके।
ये है सबसे बड़ी समस्या
वैसे तो सरकार की ओर से अधिकारियों को nic.in और gov.in के एक्सटेंशन वाले ईमेल आईडी दी गई है, लेकिन ज्यादातर अधिकारी जीमेल का ही इस्तेमाल करते हैं। इससे डेटा हैकिंग, फिशिंग और मालवेयर अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में उन अधिकारियों को भी अलर्ट किया जा रहा है।












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