Gaya News: फाइलेरिया बीमारी की रोकथाम के लिए ‘सर्वजन दवा सेवन अभियान’ की शुरुआत

Gaya Samachar: हाथीपांव (फाइलेरिया) क्यूलेक्स नामक मादा मच्छर के काटने से होता है। मच्छर के ज़रिए शरीर में फाइलेरिया परजीवी दाखिल हो जाते हैं। इसका असर पांच से दस साल बाद दिख सकता है। फाइलेरिया का असर पैर के अलावा हाथ में भी होता है।

फाइलेरिया की वजह से महिलाओं में स्तन का सूज जाना तथा पुरुषों में हाइड्रोसील की परेशानी होती है। फाइलेरिया हो जाने पर इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसे दवा के सेवन से रोका जाता है। फाइलेरिया रोधी का दवा सेवन करने से माइक्रोफाइलेरिया के परजीवी मर जाते हैं। हम इससे सुरक्षित रहते हैं। साल में एक बार अभियान चला कर दवा का सेवन कराया जाता है।

Gaya News: DM Launch of Sarvajan Dawa Sevan Karykaram for prevention of filariasis

इसी उद्देश्य से शनिवार (10 फरवरी) को जिला पदाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस एम की अध्यक्षता में 'सर्वजन दवा सेवन अभियान' की शुरुआत की गई। इस अभियान के तहत फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कराते हुए लोगों को फाइलेरिया से बचाने की मुहिम तेज़ की गई है।

इस साल एमडीए अभियान के दौरान 30,02,972 लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इस काम के लिए 1388 टीम बनाई गई है। गया जिले के विद्यालयों में 10 फरवरी से 13 फरवरी तक या अभियान चलाया जाएगा।

इसके अलावा 15 फरवरी से 28 फरवरी तक घर-घर में दवा खिलाया जाएगा। यह अभियान जिले के 16 प्रखंड में करवाया जाएगा। वहीं शहरी स्वास्थ्य केंद्र की जिसकी संख्या तीन है, वहां भी यह अभियान चलाया जाएगा।

समाहरणालय सभा कक्ष में जिला पदाधिकारी खुद उक्त दवा को खाकर आम जनों को संदेश दिया है कि आप भी फाइलेरिया का दवा हर हाल में खाएं। डॉ एमई हक ने बताया कि फाइलेरियारोधी दवाओं में अल्बेंडाजोल, डीईसी के साथ आइवरमेक्टिन शामिल किया गया है।

सभी लोगों से अपील किया कि वे स्वास्थ्यकर्मियों, आशा तथा आंगनबाड़ी सेविकाओं के सामने ही दवा का सेवन करें। दवा सेवन से किसी प्रकार का नुकसान नहीं है। फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कराया जा सके इसके लिए मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल के ओपीडी के समीप एक बूथ लगाया जायेगा।

फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कराने के लिए चिकित्सक और नर्सिंग स्टॉफ मौजूद रहेंगे। फाइलेरिया रोधी दवा सेवन से शरीर में मौजूद माइक्रोफाइलेरिया नष्ट होता है। आमतौर पर फाइलेरिया रोधी दवा खाने के बाद किसी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं होता है।

वैसे लोग जिनके अंदर फाइलेरिया के जीवित परजीवी होते हैं, दवा खाने के बाद कुछ प्रतिक्रियाएं जैसे बुखार, सिरदर्द, चक्कर आदि देखा जाता है। दवा सेवन के बाद फाइलेरिया परजीवियों के मरने की वजह से ये प्रतिक्रिया होती है। इसे एडवर्स ड्रग रिएक्शन या एडीआर कहा जाता है।इससे घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में इसकी सूचना आशा, एएनएम या अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को दें।

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