पूर्व केंद्रीय मंत्री तारिक अनवर फिर बनाए गए CWC सदस्य, जानिए कैसा रहा है सियासी इतिहास?
Tariq Anwar Political History: आगामी चुनाव को लेकर कांग्रेस आलाकमान भी कमर कस चुकी है। लोकसभा चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है। वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी संभालने के बाद से मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी संगठन को मज़बूत और एक्टिव करने में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में पार्टी के पदाधिकारियों की नियुक्ति का भी ऐलान किया है।
कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य (CWC) के अहम पद के लिए पार्टी के दिग्गज नेताओं को ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। कांग्रेस महासचिव सह सांसद के.सी. बेनुगोपाल की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में तारिक अनवर (पुर्व सांसद सह पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री) को फिर CWC मेंबर बनाया गया है।

कांग्रेस वर्किंग कमिटी में कुल तीस सदस्यों की नियुक्ति हुई है, जिसमें सोनिया गांधी(पुर्व अध्यक्ष), राहुल गांधी, पी.चिदम्बरम, दिग्विजय सिंह, अंबिका सोनी और अधीर रंजन चौधरी जैसे कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं। CWC सदस्य बनाए जाने पर तारिक अनवर ने मल्लिकार्जुन खड़गे (राष्ट्रीय अध्यक्ष) को बधाई दी है।
तारिक अनवर का जन्म बिहार की राजधानी पटना में 16 जनवरी 1951 को हुआ था। उनकी माता का नाम बिल्किस और पिता का नाम शाह मुश्ताक अहमद था। हेना अनवर से उनकी शादी हुई थी। चार बेटी और एक बेटा हैं। इनके सियासी सफर की बात करें तो बिहार के कटिहार लोकसभा सीट से वह सोलहवीं लोकसभा में सांसद रहे हैं।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य और में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रह भी चुके हैं। इससे पहले उन्होंने महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्यसभा मेंबर भी थे। वहीं वह केंद्रीय मंत्री (कृषि और खाद्य प्रसंस्करण) की ज़िम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
कटिहार निर्वाचन क्षेत्र से कई बार लोकसभा के लिए चुने गए तारिक अनवर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सीताराम केसरी के बहुत ख़ास माने जाते थे। इन्होंने बहुत ही कम उम्र में सियासी सफर शुरू कर लिया था। साल 1976 से 1981 तक उन्होंने बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस (आई) के अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी संभाली थी।
1982 से 1985 तक उन्होंने भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी संभाली। इसके बाद साल 1988 से 1989 तक बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर भी रहे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दिय और 1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया।
तारिक अनवर के सियासी सफर में सोनिया गांधी के खिलाफ विद्रोह की वजह से 1999 में बड़ा मोड़ आया। इसके बाद कांग्रेस हेडक्वार्टर में उनकी पहचान दूसरे सबसे शक्तिशाली इंसान के तौर पर होने लगी। चूंकि वह बिहार से कई बार लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर चुके थे। इसलिए साल 2004 में शरद पवार ने उन्हें महाराष्ट्र से राज्य सभा का सदस्य बना दिया।












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