Manmohan Singh ने बिहार के हक में लिए कई फ़ैसले, 2008 की त्रासदी में उनके पहल की आज भी होती है सराहना
Former PM Manmohan Singh Passes Away: हिंदुस्तान के कामयाब प्रधानमंत्री की सूची में एक नाम पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का भी शामिल है। डॉ. मनमोहन सिंह भारतीय रिजर्व बैंक में गवर्नर और योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
92 साल की उम्र में 26 दिसंबर गुरुवार को उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली में अंतिम सांस ली। पक्ष-विपक्ष के नेताओं ने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इसे अपूर्णिय क्षति बताया।बिहार में भी पूर्व प्रधानमंत्री की मौत पर शोक की लहर है।

सियासी गलियारों में मनमोहन सिंह का बिहार से गहरे लगाव को लेकर चर्चा जारी है। इसी क्रम में लोगों ने उनके द्वारा बिहार के लिए उठाए गए क़दमों पर चर्चा करते हुए कई वाक्या बताया। बिहार में विकास संबंधी समस्याओं में गहरी रुचि दिखाई है. उनकी पहल पर ही सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च, नई दिल्ली ने 1989 में 'बिहार: विकास की समस्याएं' शीर्षक से एक अध्ययन किया था।
इसके अलावा, उन्होंने बिहार की एग्रीकल्चर प्रोडक्टिविटी पर एक अध्ययन के लिए एसआर सेन की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था। राजकुमार शर्मा ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 2008 की त्रासदी में काफी अहम किरदार निभाया था, जब कुसहा बांध टूटने की वजह से बिहार भयंकर बाढ़ चपेट में आ गया था।
प्रधानमंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह ने प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया था। पूर्णिया एयरपोर्ट पर उन्होंने बाढ़ की त्रासदी को स्वीकारते हुए, बाढ़पीड़ितों के लिए एक हजार करोड़ रुपये की तत्काल सहायता और सवा लाख टन अनाज प्रदान करने की घोषणा की थी।
इससे पहले, जुलाई 2007 में वे बिहार आए थे जब नीतीश कुमार की अगुवाई में NDA की सरकार बनी थी। तब पटना में आयोजित नेशनल डेवेलपमेंट काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता उन्होंने की थी। यह बताया जाता है कि वे 27 जुलाई, 2004 को भी प्रधानमंत्री के रूप में पटना आए थे।
बिहार को विशेष राज्य का दर्जे की मांग ने जब जोर पकड़ा, तब प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने रघुराम राजन की अध्यक्षता में इस मांग पर गौर करने के लिए एक विशेष कमेटी की स्थापना की थी। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार की पहल पर उनके नेतृत्व में सरकार ने पटना में डॉल्फिन रिसर्च सेंटर के निर्माण को मंजूरी दी थी।
इन सभी घटनाओं के माध्यम से, डॉ. मनमोहन सिंह ने बिहार की विकास संबंधित समस्याओं और चुनौतियों के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता और सहायता प्रदर्शित की है। उनके द्वारा उठाए गए कदम राज्य के समग्र विकास और बेहतरी के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं।












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