Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

बिहार के पूर्व IPS अमिताभ दास ने बताया CM नीतीश की हालत क्यों है नाज़ुक, क्या बन रहे समीकरण

Former IPS Amitabh Das News: बिहार में फ्लोर टेस्ट से पहले संभावनाओं की सियासत पर चर्चा तेज़ हो गई है। सियासी गलियारों में मौजूदा राजनीतिक समीकरण चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी क्रम में बिहार के पूर्व आईपीएस अमिताभ दास ने चौंकाने वाला दावा किया है।

पूर्व आईपीएस अमिताभ दास ने वन इंडिया हिंदी से बात करते हुए कहा कि बिहार में कुल विधायकों की तादाद 243 है। बहुमत के लिए 122 विधायकों की ज़रूरत होती है। 28 जनवरी को पलटु राम (नीतीश कुमार) छठी बार पलटी मारके 9वीं बार मुख्यमंत्री बने।

Former IPS of Bihar Amitabh Das told why CM Nitish Kumar condition is critical, Politics of NDA

सीएम बनने के बाद 12 फरवरी को उन्हे बहुमत साबित करना है। शुरू में तो यह लग रहा था कि फ्लोर टेस्ट पास करना उनके लिए बाएं हाथ का खेल होगा। बहुत ही आराम से बहुमत साबित कर देंगे। पिछले कुछ दिनों में जो समीकरण बदले हैं, उससे लग रहा है कि नीतीश कुमार की स्थिति नाज़ुक हो चुकी है।

नीतीश कुमार की हालत पतली कैसे हुई, यह बात कुछ इस तरह से समझिए। नीतीश कुमार ने कांग्रेस के अशोक चौधरी को सुपारी दी थी कि कांग्रेस विधायक दल में टूट पैदा कर दें। अशोक चौधरी खुद प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी पार्टी में काफी अच्छी पकड़ है।

कांग्रेस आलाकमान को इसकी भनक लग चुकी थी। मल्लकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस विधायकों को दिल्ली बुला लिया। दिल्ली से तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद भेज दिया गया। वहां कांग्रेस की सरकार है, नीतीश कुमार की दाल वहां गल नहीं सकती थी।

हैदराबाद में कांग्रेस विधायक पार्टी कर रहे थे, यहां (पटना, बिहार) में नीतीश कुमार हाथ मल रहे थे। पहला दांव उनका फेल हो गया। दूसरा झटका नीतीश कुमार को तब लगा जब जीतन राम मांझी के सुर बदलने लगे।

जीतन राम मांझी इशारों इशारों में नीतीश कुमार को धमका भी रहे हैं, कि महागठबंधन से मुख्यमंत्री पद का ऑफर भी मिला हुआ है। अगर इधर सही सम्मान नहीं मिला तो उधर (महागठबंधन) में चले जाएंगे। तीसरा फ़ैक्टर विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी हैं, चूंकि विधानसभा अध्यक्ष राजद से हैं। एनडीए गठबंधन के लोगों ने अविश्वास प्रस्ताव लाया लेकिन उन्होंने इस्तीफ़ा नहीं दिया।

राजनीतिक संकट की स्थिति जब भी आती है, उसमे विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका काफी अहम हो जाती है। उनके पास यह अधिकार होता है कि दल से टूटे हुए विधायक को अलग गुट की श्रेणी दे सकते हैं। जिसके बाद उन विधायकों पर दल बदल क़ानून नहीं लग सकता है।

फ्लोर टेस्ट में अंतिम छण तक सौदेबाज़ी होगी, जिसका सौदा पक्का होगा वह सरकार बना लेगा। अभी जो समीकरण हैं इसे 50 फीसदी एनडीए की सरकार बचने और 50 फीसदी एनडीए की सरकार गिरने की संभावना है। भारता के संविधान में आर्टिकल 356 के तहत राष्ट्रपति शासन का प्रावधान है।

राजनीतिक संकट आने पर राष्ट्रपति शासन लग जाता है। संबंधित प्रदेश में राज्यपाल ही शासन चलाता है। आज के मौजूदा हालात में अगर राष्ट्रपति शासन लगता है तो यह समझ लीजिए की अप्रत्यक्ष रूप से शासन केंद्र की भाजपा सरकार ही करेगी।

बिहार में समीकरण सही नहीं बैठा तो यह मुमकिन है कि एनडीए बौखलाहट में राष्ट्रपति शासन ही लगा दो, क्योंकि अगर बहुमत साबित नहीं हो पाया तो फजीहत हो जाएगी। राष्ट्रपति शासन लगेगा तो महागठबंधन की तरफ़ से कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। लेकिन फ़ैसला आने में वक्त तो लगेगा। इस दौरान यह लोग सत्ता का सुख भोगते रहेंगे।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+