Flashback 2022: मद्य निषेध दिवस के अवसर पर सारण के SP को CM ने किया था सम्मानित, फिर भी नहीं बदली तस्वीर
सारण जिला के पुलिस अधीक्षक को सरकार ने शराबबंदी को लागू करने की दिशा में अच्छा काम करने के लिए सम्मानित किया था लेकिन साल भर बाद भी जिले की तस्वीर नहीं बदली है। ज़हरीली शराब पीने से मौत के आंकड़े बढ़ते ही जा रहे हैं।

Flashback 2022: बिहार में शराबबंदी तो है लेकिन उसका असर नहीं दिख रहा है। आये दिन ज़हरीली शराब पीने से मौत की खबर सामने आ रही है, तो कही अवैध शराब की तस्करी के मामले उजागर हो रहे हैं। बिहार के सारण ज़िले में ज़हरीली शराब पीने से हुई मौत को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सिर्फ़ सारण ज़िले की बात की जाए तो साल भर में ज़हरीली शराब पीने से सैकड़ों लोगों की मौत हुई है, लेकिन प्रशासन सही आंकड़े देने से बचती हुई नज़र आ रही है। ग़ौरतलब है कि जिले का ऐसा मंज़र तब है जब प्रदेश सरकार की तरफ़ सारण जिले के एसपी को शराबबंदी को सफल बनाने के लिए सम्मानित किए हुए साल बीत गए। साल भर बाद ही शराबबंदी का कोई फायदा नज़र नहीं आया। नज़र आई तो सिर्फ़ ज़हरीली शराब पीने से हुई मौत की खबर।

जिला प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप
बिहार में शराबबंदी को लेकर फिर से मुद्दा गरमाया हुआ है, कथित तौर पर ज़हरीली शराब पीने से सैकड़ों लोगों की मौत हुई है, लेकिन प्रशासन द्वारा सही आंकड़े पेश नही किए जा रहे हैं। संदिग्ध मौत से प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है। विपक्ष के नेता लगातार सरकार को घेरते हुए नज़र आ रहे हैं। जहरीली शराब पीने से कई परिवार के घरों में मातम छाया हुआ है। वहीं स्थानीय लोगों ने भी सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि सरकार ने इस ज़िले की पुलिस अधीक्षक को मद्य निषेध दिवस के अवसर सम्मानित किया था। क्योंकि उन्होंने शराबबंदी की दिशा में बेहतर काम को अंजाम दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि अगर शराबबंदी को लेकर अच्छे काम हुए होते तो ज़हरीली शराब पीने से कई घर नहीं उजड़ते। बच्चों के सिर से बाप और महिलाओं के सिर से पति का साय नहीं होता। मां का बेटा और बहन का भाई हमेशा के लिए उनसे दूर नहीं हुए होते।

सारण जिला में शराबबंदी पूरी तरह से नाकाम
सारण जिला में शराबबंदी पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है, हाल ही में हुए शराब कांड इसकी जीती जागती तस्वीर है। शराबबंदी के बावजूद ज़िले अवैध धड़ल्ले से बिक रही है। सारण में कथित तौर पर सैंकड़ों लोगों की ज़हरीली शराब पीने से मौत हुई है। अगस्त महीने में ही 23 लोगों की जान ज़हरीली शराब के सेवन से गई थी, वहीं दिसंबर में सैंकडों लोग मौत की गाल में समा गये लेकिन प्रशासन सही आंकड़ों को पेश नहीं कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस की मिली भगत से ही अवैध शराब का कारोबार बढ़ रहा है। मद्य निषेध दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सारण के पुलिस अधिक्षक संतोष कुमार को शराबबंदी बेहतर तरीक़े से लागू करने के लिए सम्मानित किया गया। अगर एसपी ने सही काम किया तो फिर शराबबंदी के बावजूद खुलेआम शराब कैसे मिल रही है।

शराब पीने से जा रही लोगों की जान !
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने सिर्फ़ कागज़ों और दिखावे के लिए शराबबंदी की है, हकीकत में तस्वीर कुछ और ही बयान कर रही है। अगर इसी तरह जनता को बेवकूफ बनाना है तो फिर शराब पीने के लिए ही दे दिया जाए। शराबबंदी के नाम पर ब्लैक मार्केटिंग कर पुलिस वालों को कमाई करने के लिए रास्ता क्यों दिया जा रहा है। सारण डीएम राजेश मीणा और एसपी संतोष कुमार शराबबंदी को कामयाब बनाने में अगर काम कर रहे होते तो शराब पीने से लोग नहीं मर रहे होते।
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