बिहार में पकड़ बनाने के लिए दिल्ली दरबार नहीं जयपुर से कंट्रोल होगी BJP, जानिए वजह
बिहार में इन दिनों सियासी फ़िज़ा बदली हुई नज़र आ रही है। एनडीए गठबंधन के साथी आपस में ही एक दूसरे पर हमलावर हैं।
पटना, 9 मई 2022। बिहार में इन दिनों सियासी फ़िज़ा बदली हुई नज़र आ रही है। एनडीए गठबंधन के साथी आपस में ही एक दूसरे पर हमलावर हैं। इसी कड़ी में अब बिहार में अपनी पकड़ मज़बूत करने के लिए भाजपा दिल्ली दरबार से नहीं बल्की जयपुर से कंट्रोल होगी। सूत्रों के हवाले से यह ख़बर आ रही है कि भाजपा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बिहार का प्रभार दे सकती है। बिहार के सियासी गलियारों में यह चर्चा इसलिए तेज़ है। इस मामले में सियासी जानकारों का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान को बिहार का प्रभार देने की चर्चा इस वजह से तो है क्योंकि भाजपा के सिर पर राष्ट्रपति चुनाव का भी प्रेशर है।

जयपुर से कंट्रोल होगी बिहार में BJP
बिहार में कुछ दिनों पहले यह चर्चा तेज़ थी कि नीतीश कुमार राज्य की सियासत से किनारा कर केंद्र की राजनीति में सक्रिय होंगे क्योंकि उन्हें राष्ट्रपति की कुर्सी मिलने वाली है। हालांकि कुछ दिनों बाद ही इस चर्चा पर वीराम लग गया था। चूंकि अब बिहार में सियासी समीकरण बदल रहे हैं इसलिए भाजपा कोई भी ग़लती नहीं करना चाहती। इसलिए भाजपा बिहार के लिए ऐसे कुशल प्रबंधक की तलाश में है जो एनडीए गठबंधन के सभी साथियो को साथ लेकर चले। कुठ दिनों पहले जदयू और भाजपा नेताओं की बयानबाज़ी की वजह से एनडीए गठबंधन में तकरार देखने को मिल रहा था। इसलिए सबकुछ ठीक करने के लिए भाजपा आलाकमान धर्मेंद्र प्रधान पर दांव खेलना चाह रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और धर्मेंद्र प्रधान के मुलाक़ात को इसी रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

धर्मेंद्र प्रधान को इसी महीने मिल सकती है नई जिम्मेदारी
बिहार के सियासी समीकरण को देखते हुए सूत्रों के हवाले ये खबर है कि धर्मेंद्र प्रधान को इस महीने ही बिहार की नई ज़िम्मेदारी मिल सकती है। मिली जानकारी के मुताबिक भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की जयपुर में 20-21 मई को बैठक हो सकती है। बैठक में संगठनात्मक गतिविधियों को कार्यक्रम तय करने के साथ ही संगठनात्मक चुनाव की घोषणा भी की जा सकती है। इसी दौरान धर्मेंद्र प्रधान को बिहार में समन्वय की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। धर्मेंद्र प्रधान को बिहार की कमान सौंपने के पीछे नीतीश कुमार से अच्छा तालमेल और पहले भी बिहार भाजपा प्रभारी रहना तर्क दिया जा रहा है।

अमित शाह के क़रीबियों में से एक हैं धर्मेंद्र प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान मूल रूप से ओडिशा के रहने वाले हैं लेकिन हिंदी क्षेत्रों में संगठन का काम करने का उनका लंब तजुर्बा रहा है। ग़ौरतलब है कि हिंदी क्षेत्रों में भी बिहार के सियासत में उनका तजुर्बा काफ़ी ज्यादा रहा है। आपको बता दे कि बिहार के 3 विधानसभा और 3 लोकसभा चुनाव में उन्होंने बिहार की सियासत में खुद को कुशल रणनीतिकार के तौर पर साबित कर चुके हैं। धर्मेंद्र प्रधान ओबीसी वर्ग से ताल्लुक रखते हैं, इसके साथ ही वह अमित शाह के करीबियों में से एक है। 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा को बिहार में जीत दिलाने में उनका काफी योगदन था।
ये भी पढ़ें: बिहार : परीक्षा से पहले लीक हुआ BPSC PT का पेपर, अभ्यर्थियों ने किया हंगामा












Click it and Unblock the Notifications