Bihar Politics: मुख्यमंत्री नीतीश का मास्टर स्ट्रोक, JDU के दांव से कैसे बदलेंगे बिहार के सियासी समीकरण
Bihar JDU News: बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करेंगे, उनकी तारीफ़ में कसीदे पढ़ने वाले जीत राम मांझी ने खुद को नीतीश से किनार कर लिया है। जीतन राम मांझी के दूर जाने से जो वोट बैंक बिगड़ता, जदयू ने इसका डैमेज कंट्रोल कर लिया है। पार्टी से एक मांझी आउट हुए तो दो मांझी इन हो गए। नीतीश कुमार के मास्टस्ट्रोक से कितना सियासी फायदा मिलेगा, एक्सपर्ट का क्या मानना है आइए जानते हैं।
बिहार के माउंटेन मैन के दशरथ मांझी के बेटे भागीरथ मांझी और दामाद मिथुन मांझी के जदयू में शामिल होने के बाद संभावनाओं की सियासत पर चर्चा तेज़ हो चुकी है। स्व. दशरथ मांझी सियासी चेहरा तो नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपने मज़बूत इरादे से पूरे देश में एक अलग पहचान बनाई थी।

बिहार के गया जिले के निवासी दशरथ मांझी ने पहाड़ काटने में दिन रात एक कर दिए और सड़क का निर्माण कर दिया। पहाड़ के बीच सड़क बनाने के बाद से ही दशरथ मांझी को माउंटेन मैन बिहार का खिताब मिला। संतोंष मांझी के आउट होने से जदयू को महादलित वोटों के खिसकने की चिंता होने लगी थी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मांझी समुदाय को साधने के लिए दशरथ मांझी के बेटे भागीरथ मांझी और दामाद मिथुन मांझी का पार्टी में शामिल कर लिया। अब रहा सवाल ये कि दशरथ मांझी ने जिस तरह अपनी पहचान बनाई थी तो क्या उसका सियासी फायदा मांझी के बेटे और दामाद JDU को दिलवा पाएंगे।
जीतन राम मांझी लगातार सरकार पर ही हमलावर थे, उन्होंने शराबबंदी पर, मुसहरों को जेल भेजने पर सरकार के खिलाफ ही बयान दिया था। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ थी कि मांझी के जदयू से किनारा करने पर एक समुदाय का वोट बैंक खिसक सकता है। इसी वहज से सीएम नीतीश के मंत्रीमंडल में रत्नेश सदा को जगह दी गई।
मांझी के दामाद और बेटा को पार्टी की सदस्यता दिलाने के पीछे भी यही वजह है कि इस समुदाय के वोट बैंक पर कब्जा बना रहे । सियासी जानकारों की मानें तो जीतन राम मांझी जदयू के मांझी समीकरण की काट जवाब ज़रूर देंगे। क्योंकि वह सियासत का दिग्गज चेहरा हैं।
सियासी जानकारों का कहना है कि दशरथ मांझी के बेटे और दामाद के जदयू में शामिल होने से एक समुदाय के वोटों का ध्रुवीकरण पर लगाम लग सकता है। वहीं मांझी के बेटे भागीरथ मांझी और दामाद मिथुन मांझी को माउंटेन मैन (दशरथ मांझी) के नाम पर अपने समुदाय में सियासी ज़मीन मज़बूत करनी होगी। अगर दोनों अपनी पकड़ बनाने में मज़बूत हुए तो उनका सियासी सफर काफी उज्जवल हो सकता है। जदयू को भी इसका फायदा मिलने की उम्मीद है।












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