बिहार में कंटेनमेंट जोन भी बन गया मजाक, दूसरा सबसे असुरक्षित राज्य बनने का खतरा
बिहार की राजधानी पटना कोरोना संक्रमण से कराह रही है। राज्य में सबसे अधिक कोरोना संक्रमित पटना में हैं। यहां कोरोना मरीजों की संख्या चार हजार के पार हो गयी है। पटना में सरकार की नाक के नीचे कंटेनमेंट जोन और बफर जोन के नियमों की धज्जियां उड़ायी जा रही हैं। लेकिन कोई रोकने वाला नहीं है। जब पटना में घोर लापरवाही है तो अन्य जिलों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। विश्व प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल 'द लैसेंट’ के एक सर्वे के मुताबिक कोरोना संक्रमण की दृष्टि से बिहार देश का दूसरा सबसे संवेदनशील प्रांत हो सकता है। कोरोना मरीजों की संख्या के हिसाब से बिहार अभी 11वें स्थान पर है। यह सर्वे सामाजिक-आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य सुविधा, साफ-सफाई और कोरोना से बचाव के नियमों के अनुपालन के आधार पर किया गया है। लैसेंट की यह रिपोर्ट पिछले हफ्ते प्रकाशित हुई है। मंगलवार को पटना के कंटेनमेंट जोन और बफऱ जोन में जिस तरह लोग मनमानी करते नजर आये उसको देख कर कहा जा सकता है कि बिहार एक खतरनाक रास्ते पर बढ़ रहा है। नियमों के अनुपालन के लिए नीतीश सरकार क्यों सख्त नहीं हो रही, यह हैरानी का विषय है। बिहार सरकार के ढीले-ढाले रवैये पर अब तो केन्द्र ने भी एडवायजरी जारी कर दी है।

आ बैल मुझे मार
दिन मंगलवार। मुकाम पटना। बफर जोन घोषित कंकड़बाग और पोस्टल पार्क का मुहल्ला। दोपहर में गतिविधियां कम रहीं। शाम चार बजे से सड़कों पर चहल-पहल शुरू हो गयी। बफर जोन में आने की वजह से इन मुहल्लों में केवल आवश्यक वस्तुओं की दुकाने खुलनी चाहिए थीं। लेकिन यहां कपड़े की दुकान, बिजली की दुकान, इलेक्ट्रोनिक्स की दुकान, टेंट हाउस और सैलून भी खुले हुए थे। पार्क के पास एक सिपाही दिखा जो मोटरसाइकिल बैठा रहा। पुलिस टीम की कोई गश्ती नहीं दिखी। कंकड़बाग और पोस्टल पार्क में सब्जी और फल की दुकानें सजी हुई हैं। कुछ ठेले पर कुछ जमीन पर। खरीदारी करने वालों की भीड़ है। किसी को सोशल डिस्टेंसिंग की परवाह नहीं। कंकड़बाग सब्जी मंडी के पास पुलिस बल तैनात था। लेकिन उसने कोई एक्शन नहीं लिया। पोस्टल पार्क इलाके में दुकानदार आधा शटर खोल कर सामान बेच रहे थे। कंकड़बाग के अशोक नगर में वे दुकानें भी खुली थीं जिनको खोलने की इजाजत नहीं थी। बाजार में जिस तरह भीड़ थी और लोग एक दूसरे से सट कर सामान खरीद रहे थे उससे बफर जोन का मतलब ही खत्म हो गया। लॉकडाउन-1 के समय पुलिस ने कुछ सख्ती दिखायी थी लेकिन इसके बाद से पटना के अधिकतर मुहल्लों में मनमानी का आलम है। पुलिस सब देख कर भी अंजान है। पटना में तेजी से संक्रमण फैलने का यह भी एक प्रमुख कारण है।

कंटेनमेंट जोन और बफर जोन में भी मनमानी
19 जुलाई पटना जिला प्रशासन ने कंकड़बाग इलाके के 8 कंटेनमेंट जोन को मिला कर एक बड़ा बफर जोन बनाया था। कंकड़बाग से लेकर पोस्टपार्क तक के इस इलाके में 40 कोरोना मरीज हैं। बफर जोन का मतलब वह क्षेत्र जहां कोरोना के केस अचानक बढ़ जाते हैं और फिर घट जाते हैं। बफर जोन में कोरोना की रोकथाम के के लिए विशेष सतर्कता और निगरानी की जरूरत होती है ताकि संक्रमण आसपास न फैल सके। बफर जोन में सामाजिक दूरी का पालन अनिवार्य होता है। दुकानों के खुलने और बंद होने के अलग नियम होते हैं। खरीदारी करने वालों को हर हाल में फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करना होता है। व्यापक स्तर पर जांच और साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होती है। पटना जिले में सबसे अधिक कंटेनमेंट और बफर जोन हैं। अधिकांश क्षेत्रों में गाइडलाइंस का पालन नहीं हो रहा। इसका ही नतीजा है कि पटना में अब कोरोना संक्रिमतों की संख्या 4024 तक पहुंच गयी है। बिहार में सबसे अधिक कोरोना मरीज राजधानी पटना में ही हैं।
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नियमों की सख्ती के लिए एडवायजरी
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बिहार सरकार को एक एडवायजरी जारी कर कहा है कि वह कंटेनमेंट जोन के गाइडलाइंस का सख्ती से पालन कराये। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल के नेतृत्व में एक टीम कोरोना संक्रमण का जायजा लेने के लिए पटना आयी थी। 20 जुलाई के जब केन्द्रीय टीम पटना जिला प्रसासन के अफसरों के साथ राजीव नगर इलाके में दौरा करने पहुंची तो वहां की स्थिति देख कर हैरान रह गयी। राजीव नगर का वह इलाका कंटेनमेंट जोन में था लेकिन इसके वावजूद वहां लोग बिना रोक-टोक के सड़कों पर आ जा रहे थे। जब कंटेनमेंट जोन में नियमों का सख्ती से अनुपालन नहीं है तो स्थिति की गंभीरता समझी जा सकती है। केन्द्रीय टीम ने पटना जिला प्रशासन के अफसरों से जब इस लापरवाही पर सवाल पूछे तो वे गोलमोल जवाब देने लगे। प्रशासन की यह लापरवाही अब राज्य पर भारी पड़ रही है।












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