कांग्रेस के बिहार प्रभारी के सामने पूर्व MLA ने काटा बवाल, कभी असेंबली में पटक दिया था गमला
आरा। बिहार विधानसभा में गमला पटकने वाली कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक डॉ. ज्योति का गुस्सा एक बार फिर देखने को मिला है। इस बार उनके गुस्से के शिकार हुए कांग्रेस के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास। कांग्रेस के बिहार प्रभारी के सामने पूर्व एमएलए ने बवाल काट दिया और भोजपुर में सीट नहीं देने पर पैर-हाथ पटकने लगी। बिहार विधानसभा में बतौर एमएलए गमला पटकने के कारण चर्चा में रही पूर्व विधायक डॉ ज्योति ने सोमवार को बिहार कांग्रेस के नए प्रभारी भक्त चरण दास और प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर मदन मोहन झा के सामने जमकर बवाल काटा।

बिहार विधानसभा चुनाव में भोजपुर से कांग्रेस को सात में से किसी सीट पर प्रत्याशी नहीं देने पर गुस्सा ऐसा था कि अभिनंदन समारोह हंगामा सभा में बदल गया। डॉक्टर कुमारी ज्योति लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक दिवंगत रामविलास पासवान की समधन हैं।
आरा शहर के शहीद भवन स्थित जिला कार्यालय में बिहार कांग्रेस के प्रभारी भक्त चरण सिंह का अभिनंदन समारोह आयोजित समारोह के बीच में ही डॉक्टर ज्योति ने जमकर हंगामा किया। किसी तरह वरिष्ठ नेताओं व कार्यकर्ताओं ने समझा-बुझाकर उन्हें शांत कराया।
डॉ ज्योति ने कहा कि जिले में 7 विधानसभा सीटों में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं दी गई, जहां यहां के कार्यकर्ता कहां जाते दूसरी ओर सीपीआई और सीपीआई ( एमएल ) के 3-3 कैंडिडेट को यहां उतार दिया गया। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल पूछा कि क्या यहां के कांग्रेस कार्यकर्ता काम नहीं करते संगठन की जब बात आएगी तो काम चाहिए लेकिन जब चुनाव का समय आएगा तो टिकट किसी और को दे दिया जाएगा
वहीं बिहार प्रभारी भक्त चरण दास बोले नाराजगी स्वाभाविक है। कांग्रेस के बिहार प्रभारी भक्त चरण सिंह ने कहा कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी स्वाभाविक है। पूर्व विधायक ज्योति जी यह बात मुझे बता चुकी हैं मैं उनकी सारी बात नोट कर चुका हूं। अभिनंदन समारोह के दौरान हुआ अचानक बोलने लगी और लोग उन्हें रोक नहीं पाए उनकी बातों को हम आगे हाईकमान तक पहुंचाएंगे।
साथ ही कहा कि भोजपुर महान विभूतियों का स्थान है और यहां मुझे अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं एवं जनता के बीच काम करने में अच्छा लगेगा। इस मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा जो बीत गई सो बात गई।
इस मामले में एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा यह स्वाभाविक है जिन 70 सीटों पर हम चुनाव लड़े उन पर राजद या वामपंथी पार्टी नहीं लड़ पाए। जब गठबंधन करते हैं तो कई प्रकार की कठिनाई आती है कार्यकर्ताओं को तकलीफ होती है यह स्वभाविक है। अब चुनाव भी खत्म हो चुका है और सरकार भी बन चुकी है जो बीत गई सो बात गई। नए प्रभारी आए हैं नए सिरे से पार्टी को संगठित कर रहे हैं एवं सभी कार्यकर्ताओं को जोड़ने का काम कर रहे हैं।












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