बिहार की सियासत को लेकर कांग्रेस में पक रही खिचड़ी, क्या फिर पलटेंगे नीतीश कुमार ?
बिहार में उपचुनाव और विधान परिषद चुनाव के बाद सियासी समीकरण बदलते हुए नज़र आ रहे हैं।
पटना, 25 अप्रैल 2022। बिहार में उपचुनाव और विधान परिषद चुनाव के बाद सियासी समीकरण बदलते हुए नज़र आ रहे हैं। इसी कड़ी में बिहार की सियासत को लेकर कांग्रेस में अलग ही खिचड़ी पक रही है। हाल ही में राबड़ी देवी की इफ़्तार पार्टी में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शिरकत करने के बाद संभावनाओं की सियासत को हवा मिल गई है। सूत्रों की मानें तो इसी मौक़े को भुनाने के लिए कांग्रेस ने प्रशांत किशोर के सहारे रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है।

कांग्रेस की चुनावी रणनीति तैयार कर रहे प्रशांत किशोर
कांग्रेस के लिए प्रशांत किशोर 2024 के चुनाव की रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं। सोनिया गांधी के साथ प्रशांत किशोर की हुई बैठक के बाद सोनिया यह चर्चा तेज़ हो गई है कि कांग्रेस नीतीश कुमार को साधने की क़वायद तेज़ कर चुकी है। आपको बता दें कि नीतीश कुमार से प्रशांत किशोर के संबंध अच्छे हैं। बिहार की सियासत से दूर रहने के बावजूद प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार की नज़दीकियां बनी हुई थी। इसलिए अगले चार साल के चुनाव से पहले संभावनाओं की सियासत पर ज़ोर दिया जा रहा है। ऐसे में सबकी निगाह नीतीश कुमार के अगले क़दम पर टिकी हुई है।

नीतीश कुमार ने अपने एजेंडे से नहीं किया समझौता
बिहार की सियासत में भले ही नीतीश कुमार एनडीए गठबंधन के साथी हैं लेकिन उन्होंने कभी भाजपा के साथ अपने एजेंडे से समझौता नहीं किया। ग़ौरतलब है कि नीतीश कुमार लगातार अपने एजेंड पर क़ायम रहे चाहे बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की बात हो या फिर जातिगत जनगणना का मुद्दा हो। बिहार में कई अहम मुद्दों पर नीतीश कुमार ने जदयू एजेंडे के साथ भाजपा से समझौता नहीं किया। बिहार में राजद भाजपा की कट्टर विरोधी है इसके बावजूद नीतीश कुमार ने राबड़ी देवी की इफ्तार पार्टी में शिरकत की। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस नीतीश कुमार को साधने के लिए प्रशांत किशोर का सहारा ले रही है।
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नीतीश कुमार को साधने की क़वायद तेज़
सूत्रों की मानें तो प्रशांत किशोर की सोनिया गांधी के साथ हुई बैठक के बाद ये रणनीति तैयार की गई कि, नीतीश कुमार के उन सारे मुद्दों केंद्र में कांग्रेस की सरकार आने के बाद तरजीह दी जाएगी जिसे भाजपा की केंद्र सरकार ने तवज्जोह नहीं दी। कांग्रेस ने प्रशांत किशोर के सहारे इस योजना की पेशकश नीतीश कुमार के सामन रखने की रणनीति तैयार की है। अगर नीतीश कुमार को कांग्रेस की डील पसंद आती है तो बिहार की सियासत में एक बार फिर से बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं सियासी जानकारों की मानें तो राष्ट्रपति औऱ उपराष्ट्रपति के चुनाव का भी वक़्त क़रीब आ रहा है। बीच में नीतीश कुमार की केंद्र की सियासत में सक्रिय होने की चर्चा तेज़ थी। अब अगर कांग्रेस के साथ डील पक्की हुई तो नीतीश कुमार राज्य की सियासत से किनारा करते हुए केंद्र की सियासत का रुख कर सकते हैं।
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