Bihar News: CM नीतीश के पास है गृह विभाग, बद से बदतर प्रदेश के हालात, RJD-JDU में कौन बेहतर?
History Of Riots In Bihar: बिहार में छिटपुट वारदात की ख़बर तो आए दिन पढ़ने को मिलती है। वहीं चुनावी मौसम में प्रदेश में बिगड़ रहे माहौल से सीएम नीतीश कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दल के नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। वहीं सियासी गलियारों में राजद और जदयू के कार्यकाल में बेहतर कौन, पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
बिहार में बेकाबू हो रहे हालात के इतिहास पर नज़र डालें तो 1981 के बाद साल सीतामढ़ी ज़िले में साल 1992 में हिंसा भड़की थी। जिसमें 65 लोग मारे गए थे वहीं सैंकड़ो लोग ज़ख्मी हुए थे। इसके बाद साल 2000 में बिहार शरीफ़ नें मूर्ति स्थापना को लेकर माहौल बिगड़ा था। इस दौरान असमाजिक तत्वों ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की दुकानों को आगे के हवाले कर दिया था।

साल 2017 के आंकड़ों के मुताबिक देशभर में कुल 723 सांप्रदायिक/धार्मिक दंगे हुए थे। जिसमें सिर्फ बिहार में 163 मामले दर्ज हुए थे। वहीं साल 2016 में 139 सांप्रदायिक हिंसा के मामले सामने आये थे, जो कि साल 2017 के मुकाबले 24 कम थी। वहीं साल 2009 और 2010 में 40-40 सांप्रदायिक हिंसा के मामले सामने आये थे। साल 2011 में सांप्रदायिक हिंसा की 26 मामले थे।
बिहार में साल 2012 में सांप्रदायिक हिंसा के कुल 21 मामले सामने आए, जो कि पिछली वारदातों से कम थी। वहीं साल 2013 में सांप्रदायिक हिंसा के कुए 63 मामले सामने आए। साल 2018 में बिहार के भागलपुर ज़िले में रामनवमी मौक़े पर हिंसा भड़की थी।
17 मार्च 2018 को रामनवमी के दिन सांप्रदायिक हिंसा फैली थी, जिसका असर गया,सीवान,समस्तीपुर, कैमूर, मुंगेर, नालंदा, औरंगाबाद, हैदरगंज और रोसेरा में भी देखने को मिला था। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद 25 मार्च 2018 को दंगे पर काबू पाया था। यह बिहार में हुए बड़े दंगों के रिकॉर्ड थे जिसे याद कर आज भी लोग सहम जाते हैं। अब प्रदेश के मौजूदा हालात पर भी नज़र डालते हैं।
बिहार में नीतीश कुमार 'सुशान राज' दावा ज़रूर करते हैं, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही है। आए दिन प्रदेश के विभिन्न ज़िलों से आपराधिक वारदातों के मामले सामने आते रहते हैं। बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हैं कि पुलिस वालों पर भी गोली चलाने से नहीं डरते हैं। पिछले 15 दिनों में बदमाशों की गोली से दो पुलिस जवान के मरने की ख़बर मिल चुकी है।
मौजूदा व़क्त की बात की जाए तो एक महीने के अंदर दो बार बिहार की औद्योगिक राजधानी बेगूसराय में दो समुदाय के बीच हिंसा की ख़बर सामने आ चुकी है। बेगूसराय हिंसा मामले में विपक्षी दलों ने नीतीश कुमार जमकर निशाना साधा है। वहीं सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि लालू का राज को जंगलराज बताया जाता था लेकिन उससे बुरे हालात तो नीतीश के राज में हो गए हैं।
लालू का शासनकाल जंगलराज था तो नीतीश कुमार का कार्यकाल दंगाराज हो चुका है। सीएम नीतीश कुमार के पास गृह विभाग होने के बाद भी प्रदेश के हालात बद से बदतर हो रहे हैं। इनके कार्यकाल में प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में दंगों के कई मामले सामने आ चुके हैं। सीएम नीतीश कुमार लॉ एंड ऑर्डर क़ायम रखने में नाकाम साबित हो रहे हैं। उन्हें प्रदेश के बिगड़ रहे हालात को संज्ञान में लेते हुए ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।












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