Bihar Chunav 2025: रोजगार-शिक्षा चाहिए, लालू-नीतीश का रंगीन खेल नहीं चाहिए, डर-मजबूरी की सियासत ख़त्म- PK
PK Bihar Chunav 2025: बिहार की राजनीति में नई हलचल मचाते हुए जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) ने मंगलवार को मधेपुरा के मुरलीगंज के परवा नवटोल हाई स्कूल मैदान में बड़ी जनसभा की। सभा में उमड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए पीके ने कहा कि बिहार की जनता अब 30 साल पुराने चुनावी समीकरणों और मजबूरियों से निकलने को तैयार है। लोगों को अब जात-पात के नाम पर राजनीति नहीं चाहिए, बल्कि रोजगार और शिक्षा चाहिए।
लालू यादव पर सीधा हमला
प्रशांत किशोर ने लालू प्रसाद यादव को पुराने रंग में लौटने की कोशिश करने पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा -
"बिहार की जनता लालू जी के सभी रंग देख चुकी है। वे पहले दलितों के नेता बने, फिर पिछड़ों के, फिर यादवों के। अब वे सिर्फ अपने परिवार और पार्टी राजद के नेता रह गए हैं। जनता पर अब उनके किसी भी रंग का असर नहीं होने वाला।"

पीके ने यह भी कहा कि लोग अब डर और मजबूरी में वोट नहीं करना चाहते। दशकों तक भाजपा के डर से लालू और लालू के डर से भाजपा-नीतीश को वोट देना पड़ा, लेकिन अब जनता ने आगे बढ़ने का मन बना लिया है।
राहुल गांधी पर तीखा वार
सभा के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा -
"राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच की लड़ाई से बिहार के युवाओं को कोई लेना-देना नहीं है। बिहार के युवाओं का सवाल है कि यहां फैक्ट्री कब लगेगी, रोजगार कब मिलेगा और पलायन कब रुकेगा। राहुल गांधी बिहार की धरती पर इन सवालों के जवाब देने से बचते हैं।"
जन सुराज का संदेश
प्रशांत किशोर ने जनता से कहा कि अब बिहार को नया विकल्प मिल गया है। जन सुराज का मकसद बच्चों के लिए अच्छी पढ़ाई, युवाओं के लिए रोजगार और पलायन पर रोक लगाना है। उन्होंने दावा किया कि लोग अब जातीय समीकरणों से ऊपर उठकर 'जनता का राज' चाहते हैं।
राजनीतिक महत्व
पीके का यह बयान साफ करता है कि जन सुराज खुद को तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहता है। उनका सीधा निशाना लालू यादव (राजद) और राहुल गांधी (कांग्रेस) पर रहा, जबकि नीतीश कुमार का नाम लेकर भी उन्होंने पुराने गठजोड़ों को अप्रासंगिक बताया।
मधेपुरा और कोसी इलाका हमेशा से वामपंथी, सामाजिक न्याय और कांग्रेस की राजनीति का गढ़ रहा है। पीके यहां से अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह जनसभा उनके लिए कोसी से मिथिलांचल तक जन सुराज के जनाधार को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
क्या है पीके का संदेश?
मधेपुरा से पीके का यह संदेश स्पष्ट करता है कि उनकी राजनीति जातीय समीकरणों से हटकर विकास के मुद्दों पर केंद्रित होगी। सवाल यह है कि क्या बिहार की जनता दशकों पुराने 'लालू बनाम नीतीश' समीकरण से निकलकर वाकई जन सुराज को अपनाने का जोखिम लेगी? या फिर एक बार फिर से चुनाव पुराने जातीय और गठबंधन के दांव-पेंच पर टिके रहेंगे।












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