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IPS सुसाइड केस पर चिराग पासवान का अल्टीमेटम, CM सैनी को लिखा पत्र, दोषियों को फौरन जेल भेजने की मांग

केन्द्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले में हस्तक्षेप किया है। पासवान ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को एक पत्र लिखकर इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष, हाई-लेवल और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।

बिहार की राजनीति में अपनी मजबूत पैठ रखने वाले पासवान का यह कदम दलित उत्पीड़न के एक राष्ट्रीय मुद्दे को सामने लाकर राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है।

chirag paswan

पासवान ने अपने पत्र में 7 अक्टूबर, 2025 को हुई आईपीएस अधिकारी की मौत पर गहरा दुःख व्यक्त किया। उन्होंने इस घटना को केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि 'हमारे प्रशासनिक ढांचे में व्याप्त मानसिक और जातिगत उत्पीड़न का भयावह संकेत' बताया है, जो आज भी समाज में जहर की तरह फैला हुआ है।

उन्होंने कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक है कि जिस हाई रैंकिंग ऑफिसर ने अपना पूरा जीवन कानून, अनुशासन और सेवा में समर्पित किया, उसे अंततः इस अमानवीय व्यवस्था के आगे झुकना पड़ा। पासवान ने जोर देकर कहा कि अधिकारी के सुसाइड नोट में लिखी गई बातें संविधान की आत्मा पर चोट करती हैं।

कानून से ऊपर कोई नहीं, न पद, न प्रभाव

केन्द्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री सैनी से इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह घटना किसी राजनीतिक बहस का विषय नहीं है, बल्कि यह मानवता, न्याय और समानता के मूल्यों की परीक्षा है। पासवान ने सख्त लहजे में कहा कि इस मामले में सख्त, पारदर्शी और निर्भीक कार्रवाई पूरे देश को यह संदेश देगी कि 'कानून से ऊपर कोई नहीं है- न पद, न प्रतिष्ठा, न प्रभाव।'

उन्होंने यह भी मांग की कि हरियाणा सरकार इस प्रकरण में किसी को भी नहीं बख्शे, चाहे वह कितना भी बड़ा पद या प्रभावशाली स्थिति क्यों न रखता हो, ताकि प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमा, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा हो सके।

गौरतलब है कि यह पत्र ऐसे समय में आया है जब मृतक अधिकारी की आईएएस पत्नी, अमनीत पूरन कुमार की शिकायत पर हरियाणा के DGP शत्रुजीत सिंह कपूर और अन्य अधिकारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और जातिगत उत्पीड़न की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। इससे पहले, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस घटना को दलित उत्पीड़न करार देते हुए दोषियों को सख़्त सज़ा देने की मांग की थी।

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