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Chirag Paswan को 'z' security मिलने से अटकलों का बाज़ार गर्म, निकाले जा रहे सियासी मायने

Chirag Paswan को 'z' security मिलने के बाद संभावनाओं की सियासत को फिर से हवा मिल गई है। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि चिराग पासवान फिर से एनडीए का दामन थाम सकते हैं।

Chirag Paswan Security News: बिहार सियासी फिज़ा बदलती हुई नज़र आ रही है, महागठबंधन के नेता पने ही सहयोगी दलों के नेताओं के खिलाफ़ बयानबाज़ी कर रहे हैं। वहीं चिराग पासवान को जेड सिक्योरिटी मिलने के बाद सियासी गलियारों में अटकलों का बाज़ार गर्म हो चुका है। इसके साथ ही कई सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ़ से चिराग पासवान को जेड कैटेगरी की सुरक्षा मिलने के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वह एनडीए में वापसी कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो आईबी थ्रेट परसेप्शन रिपोर्ट के मद्देनज़र चिराग पासवान को बिहार में सुरक्षा प्रदान की गई है।

एनडीए का दामन थाम सकते हैं चिराग !

एनडीए का दामन थाम सकते हैं चिराग !

खुफिया विभाग ने चिराग पासवान की जान को खतरा बताया था। सुरक्षा मिलने के बाद चिराग पासवान वीआईपी कैटेगरि में गए हैं। उनकी सुरक्षा में 33 सुरक्षा गार्ड तैनात रहेंगे, वहीं उनके आवास पर 10 सुरक्षा कर्मी हथियार के साथ तैनात रहेंगे। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले चिराग पासवान ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके साथ ही बिहार के हालातों पर भी चर्चा की थी। चिराग पासवान ने उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव प्रचार भी किया था। इसके बाद से सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ थी कि आने वाले दिनों में चिराग पासवान फिर से एनडीए का दामन थामेंगे।

एनडीए में जाने की राह नहीं आसान!

एनडीए में जाने की राह नहीं आसान!

चिराग पासवान की एनडीए में वापसी अटकलें तेज़ तो हुईं हैं लेकिन उनका एनडीए में जाने का रास्ता अभी भी पूरी तरह से साफ नहीं है। पशुपति पारस ने हाल ही में बयान दिया था कि दल टूटने पर जुड़ जाता है लेकिन चिराग पासवान ने तो दिल तोड़ा है। पशुपति पारस ने कहा था कि चिराग पासवान से किसी पंडित ने एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ने की सलाह दी थी, कि अगर वह एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़े बिहार के सीएम बन जाओगे। पंडित की बात में आकर चिराग ने पार्टी और परिवार को तोड़ दिया। आपको बता दें कि रामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी और परिवार में दरार पड़ गई। जिसके बाद एलजेपी के सभी सांसद चिराग पासवान का साथ छोड़कर उनके चाचा पशुपति पारस का दामन थाम लिया। इसके बाद पशुपति पारस को मोदी सरकार में रामविलास पासवान की जगह हासिल हो गई। चिराग पासवान ने एलजेपी (रामविलास) पार्टी बनाई और उसके साथ सियासी ज़मीन मजबूत करने में जुट गए।

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    सियासी ज़मीन मजबूत करने में जुटे चिराग

    सियासी ज़मीन मजबूत करने में जुटे चिराग

    रामविलास पासवान (चिराग पासवान के पिता) एनडीए में शामिल थे। इसके साथ-साथ वह मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री की ज़िम्मेदारी भी संभाल रहे थे। 2020 में जब रामविलास पासवान का निधन हुआ तो उनके सियासी विरासत को संवारने के लिए चिराग पासवान और पशुपति पारस (चिराग के चाचा) के बीच तकरार भी हुई। पशुपति पारस ने ऐसा दांव खेला कि एलजेपी के सभी सांसद उनके साथ हो गए और पशुपति पारस केंद्रीय मंत्री बन गए। चिराग पासवान अपनी नई पार्टी के साथ अकेले रह गए। पिता के निधन के बाद पार्टी टूटी तो चिराग पासवान को अपना वजूद बचाने के लिए सहारे की ज़रूरत पड़ने लगी। यह बात चिराग भी बखूबी जानते हैं कि वह बिहार की सियासत में अकेले खुद के बल पर कामयाब नहीं हो सकते हैं। वहीं क्षेत्रीय पार्टी तो महागठबंधन के साथ है। ऐसे में उन्हें विकल्प के तौर पर भाजपा ही दिखी जहां उनका सियासी भविष्य सुरक्षित रह सकता है। इसलिए वह भविष्य में एनडीए के साथ जा सकते हैं।

    ये भी पढ़ें: Liqour Ban In Bihar: शराब मामले पर बोले चिराग- 200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, सच दबाया जा रहा है

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