Bihar Chunav: चंद्रशेखर की पार्टी 100 सीटों पर लड़ेगी चुनाव, जहां पिछली बार हारा महागठबंधन, वहीं होगा खेला!
Bihar Assembly Election 2025 (Chandrashekhar Azad): बिहार की सियासत में अब तक एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही थी, लेकिन अब मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। उत्तर प्रदेश के भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की पार्टी आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने बिहार में चुनावी दांव खेलने का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने 100 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर बिहार के सियासी समीकरणों में हलचल मचा दी है।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जौहर आजाद ने प्रेस वार्ता कर बताया कि जिन 100 सीटों पर पार्टी चुनाव लड़ेगी, उनमें से 64 पर पिछली बार महागठबंधन की हार हुई थी। इन सीटों पर इस बार भी महागठबंधन की स्थिति कमजोर बताई जा रही है। पार्टी के आंतरिक सर्वे के मुताबिक आजाद समाज पार्टी इन सीटों पर पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगी।

जौहर आजाद ने कहा, ''अगर बिहार में भाजपा की सरकार बनती है, तो इसका श्रेय दो युवराजों को जाएगा,'' जिसमें उनका इशारा राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की ओर था।
60 सीटों पर प्रभारी घोषित, तैयारी अंतिम चरण में
आजाद समाज पार्टी ने 100 में से 60 सीटों पर विधानसभा प्रभारियों की घोषणा कर दी है। शेष सीटों पर भी तैयारियां अंतिम दौर में हैं। पार्टी का दावा है कि 46 सीटों पर उसका सीधा मुकाबला महागठबंधन से होगा और वह इन सीटों पर बूथ स्तर तक संगठन खड़ा कर चुकी है।
21 जुलाई को होगा राष्ट्रीय अधिवेशन, तय होगी अंतिम रणनीति
पार्टी ने घोषणा की है कि 21 जुलाई को पटना के बापू सभागार में भीम आर्मी का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित होगा, जिसमें पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद खुद मौजूद रहेंगे और बिहार चुनाव के लिए रणनीति को अंतिम रूप देंगे। साथ ही बाकी 143 सीटों पर चुनाव लड़ने या गठबंधन के फैसले का एलान भी उसी दिन किया जाएगा।
लोजपा बोली- ''बिहार चुनाव में हम पर कोई असर नहीं"
आजाद समाज पार्टी की इस घोषणा पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रवक्ता शशि भूषण प्रसाद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''लोकतंत्र में सबको चुनाव लड़ने का हक है, लेकिन इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा।'' उन्होंने दावा किया कि दलित समाज आज भी चिराग पासवान के साथ मजबूती से खड़ा है और वे दलित राजनीति के सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे हैं।
किसका वोट बैंक काटेंगे चंद्रशेखर?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (आसपा) बिहार में दलित वोट बैंक, खासकर रविदास समाज को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति बना रही है। ठीक वैसे ही जैसे उत्तर प्रदेश में उन्होंने मायावती के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की थी, वैसा ही प्रयास अब बिहार में भी देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर चंद्रशेखर रविदास समुदाय के कुछ वोटरों को भी अपने पक्ष में करने में सफल हो जाते हैं, तो इसका सीधा असर महागठबंधन, विशेष रूप से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर पड़ सकता है। यहां तक कि अगर आजाद समाज पार्टी किसी सीट पर केवल 500 से 1000 वोट भी काट लेती है, तो भी कई सीटों पर चुनावी परिणाम पलट सकते हैं।
हालांकि, जानकार यह भी मानते हैं कि एनडीए को चंद्रशेखर की पार्टी से कोई सीधा नुकसान होने की संभावना कम है। इसका कारण यह है कि पासवान वोटर और रविदास वोटर आमतौर पर अलग-अलग राजनीतिक ध्रुवों पर खड़े रहते हैं। पासवान समुदाय का समर्थन अब भी चिराग पासवान के नेतृत्व में एनडीए के साथ मजबूती से बना हुआ है।
बिहार चुनाव 2025 अब त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ता दिख रहा है। चंद्रशेखर आजाद की पार्टी की सक्रियता ने चुनावी हवा का रुख बदलना शुरू कर दिया है। अब देखना यह होगा कि वे सिर्फ वोट काटने तक सीमित रहते हैं या वाकई में राजनीतिक प्रभाव दिखा पाते हैं।












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