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लालू की राह चलेंगे केजरीवाल, पत्नी को सौंपेंगे CM की कुर्सी? और क्या हैं विकल्प

Delhi Cm Arvind Kejriwal Arrest: प्रवर्तन निदेशालय यानी कि ED ने दिल्ली शराब नीति केस में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को गिरफ्तार कर लिया है। ED की टीम गुरुवार शाम 7 बजे केजरीवाल के घर 10वां समन और सर्च वारंट लेकर पहुंची थी। जांच एजेंसी ने दो घंटे तक पूछताछ के बाद रात 9 बजे यह कार्रवाई की।

दिलचस्प बात ये है कि गिरफ्तारी से पहले अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है। दिल्ली के स्पीकर रामनिवास गोयल ने केजरीवाल की गिरफ्तारी से पहले ये कहा था कि प्रदेश के सभी विधायकों, पंजाब के विधायकों, राज्यसभा सांसदों ने एकमत से फैसला किया है कि केजरीवाल ही दिल्ली के मुख्यमंत्री रहेंगे और वे जेल से ही सरकार चलाएंगे।

Sunita Kejriwal will become CM

इस्तीफा नहीं देंगे केजरीवाल

दिल्‍ली सरकार में मंत्री आतिशी ने भी ये साफ कह दिया कि अगर मुख्‍यमंत्री केजरीवाल जेल गए तो वह वहीं से सरकार चलाएंगे। ऐसे में ये सवाल खड़ा हो गया है कि क्या कोई सीएम जेल से सरकार चला सकता है? क्या उसे इसका अधिकार है? इस मामले में कानून और नियम क्‍या कहते हैं?

कानून के जानकारों का ये कहना है कि जब तक अपराध सिद्ध नहीं हो जाता तब तक कोई भी दोषी नहीं कहलता है। ऐसे में सीएम की गिरफ्तारी के बाद भी उनसे इस्‍तीफा नहीं लिया जा सकता है। हालांकि इस्तीफा न भी लिया जाए फिर भी किसी भी सीएम के लिए जेल के भीतर से सरकार चलाना बिल्कुल भी व्यवहारिक नहीं है।

जेल से सरकार चलाने में मुश्किलें

अगर अरविंद केजरीवाल जेल से सरकार चलाते हैं तो उन्‍हें शासन चलाने के लिए कई प्रकार की मंजूरियां लेनी होंगी। सीएम केजरीवाल को कई चीजों के लिए जेल प्रशासन पर निर्भर रहना पड़ सकता है। ऐसे में सीएम केजरीवाल अपनी कुर्सी किसी विश्वसनीय को सौंप सकते हैं।

सुनीता केजरीवाल बनेंगी सीएम?

बीजेपी लंबे समय से ये दावा करती आ रही है कि अगर अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हुए तो वह अपनी पत्नी को दिल्ली की कमान सौंप देंगे। अगर इस दावे में तनिक भी सच्चाई है तो ये घटना 27 साल पुराने बिहार की राजनीतिक ताजपोशी को याद दिला रही है। बिहार में तब आरजेडी प्रमुख लालू यादव की गिरफ्तारी पर तलवार लटकी थी और उन्होंने सीएम की कुर्सी बचाने के लिए अपनी पत्नी राबड़ी देवी को नया सीएम बनाकर चौंका दिया था।

बिहार में राबड़ी बनीं थीं सीएम

साल 1996 में बिहार के सीएम लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाले का आरोप लगा। सीबीआई ने लालू पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। जल्द ही राजनीतिक हालात कुछ ऐसे बने कि लालू को सरकार चलाना मुश्किल हो गया। लालू पर किसी भी वक्त गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी।

इस बीच, 25 जुलाई 1997 को लालू यादव ने सभी को चौंकाते हुए पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का नया मुख्यमंत्री बना दिया। सिर्फ पांचवीं कक्षा तक पढ़ी राबड़ी देवी ने तब तक कोई चुनाव भी नहीं लड़ा था। इसके बावजूद वह देश के सबसे अहम राजनीतिक प्रदेश बिहार की मुख्यमंत्री बना दी गईं।

दरअसल यह संविधान के अनुच्छेद 164 से मुमकिन हो पाया। अनुच्छेद 164 में राज्य के मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की नियुक्ति से संबंधित नियम दर्ज है। इस अनुच्छेद को हम विस्तार से समझते हैं। अनुच्छेद 164 (1) के मुताबिक मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा। इसके अलावा बाकी मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करेगा।

अनुच्छेद (2) राज्य मंत्रिपरिषद राज्य की विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगा। अनुच्छेद (3) किसी मंत्री द्वारा अपना पद ग्रहण करने से पहले, राज्यपाल उसको पद की और गोपनीयता की शपथ दिलाएगा। अनुच्छेद (4) कोई मंत्री अगर निरन्तर छह महीने की अवधि तक राज्य के विधान मण्डल का सदस्य नहीं है तो उस अवधि की समाप्ति पर उसके मंत्री का कार्यकाल भी समाप्त हो जाएगा।

अनुच्छेद 164 (4) के मुताबिक मंत्री बनने के लिए जरूरी नहीं कि वो शख्स राज्य के विधानमंडल का सदस्य हो। लेकिन एक बार इस तरीके से किसी शख्स को मंत्री बनाए जाने के बाद, उस शख्स को 6 महीने की भीतर चुनाव जीतकर राज्य के विधानमंडल का सदस्य बनना पड़ता है।

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