Bihar BJP Politics: कौन हैं हरि सहनी जो बने नेता प्रतिपक्ष, क्या मज़बूत कर पाएंगे भाजपा का किला?
Bihar BJP Politics: लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनज़र भाजपा ने बिहार वोट बैंक को साधने के लिए सियास दांव लगाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में बिहार विधना परिषद में MLC हरि सहनी को भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष बना दिया है। दरभंगा के रहने वाले हरि सहनी को सम्राट चौधरी की जगह प्रतिपक्ष बनाया है। वहीं अब सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ हो गई है कि क्या हरि सहनी बिहार में भाजपा के किला को मज़बूत कर पाएंगे।
दरभंगा में BJP के जिला अध्यक्ष रह चुके हरि साहनी ने विधानसभा चुनाव 2005 चुनीव बिगूल फूंका था। इसके बाद केवटी सीट से 2020 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर उनके नाम घोषणा हुई, लेकिन बाद में टिकट कट गया। साल 2022 में उन्होंने एमएलसी पद पर कब्ज़ा जमाया।

बिहार भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने MLC हरि सहनी को नेता प्रतिपक्ष बनाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी की सहमति से फैसला लिया गया है। वहीं सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को प्रदेश की जनता की चिंता नहीं है।
बिहार की जनता पर पिछले कई महीनों से लगातार हमले हो रहे हैं। सीएम नीतीश कुमार आराम से सो रहे हैं। किसी बात पर सवाल किया जाता है तो कहते कि मामले की जानकारी नहीं है। बिहार की स्थिति पर अब भाजपा उन्हें अलग से एक चश्मा देना चाहती है। बिहार में गवाहों की हत्या हो रही है।
अररिया ज़िला में पत्रकार विमल कुमार यादव, बेगूसराय में पिता और पुत्र की हत्या यह सभी लोग गवाह थे। गवाहों की हत्या से यह साफ है कि बिहार में कानून राज पूरी तरह से ख़त्म हो गया है। वहीं हरि सहनी ने कहा कि नीतीश कुमार जब शुरू में मुख्यमंत्री बने थे तो गर्व हुआ था। अब गांव से लेकर देश भर में लोग उन्हे 'पलटू राम' बुलाते हैं तो ख़राब लगता है।
MLC हरि सहनी ने कहा कि बिहार में सबकुछ ठीक चल रहा था, अचानक नीतीश कुमार के मन में प्रधानमंत्री बनने का खयाल आया। जिस तरह गुजरात के मुख्यमंत्री देश के प्रधानमंत्री बने उसी तरह वह भी कोशिश करने की सोचने लगे। बिहार सरकार अपनी पार्टी और गठबंधन को बचाने में लगी हुई है।
हरि सहनी को बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के बाद सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि, मुकेश सहनी एनडीए के साथ नहीं हैं। सहनी समुदाय के लोगों को साधने के लिए भाजपा के पास चेहरा नहीं था। इसलिए हरि सहनी को अहम ज़िम्मेदारी दी गई है, ताकि लोकसभा चुनाव में भाजपा उसका सियासी माइलेज ले सके। हालांकि राजनीति के जानकारों का मानना है कि हरि सहनी पर जो भाजपा ने दांव खेला है, उससे ज़्यादा कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला है।












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