Lalu Yadav Birth Day: लालू यादव के मशहूर किस्से, जिनपर आज भी सियासी गलियारों में होती है चर्चा
Lalu Yadav Birth Day Special: राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आज अपना 77वां जन्मदिन मनाएंगे। 11 जून 1948 को उनका जन्म बिहार के गोपालगंज ज़िले में हुआ था। बिहार की सियासत के दिग्गज नेताओं का ज़िक्र जहां भी होता है, वहां लालू यादव का नाम ज़रूर लिया जाता है। उनकी पुरानी बातों पर चर्चा ज़रूर होती है।
लालू यादव के जन्मदिन के मौक़े पर आज हम आपको उनके कुछ दिलचलस्प किस्से बताने जा रहे हैं, जो कि आज भी लोगों को गुद गुदाते हैं। यह बात है 2008 के 22 जुलाई का, जब लालू यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री की ज़िम्मेदारी निभा रहे थे।

लोकसभा में अपनी बात रखते-रखते उन्होंने बहुत ही बेबाक अंदाज़ में कहा कि पीएम बनने का किसे मन नहीं करता है। हमारा मन पीएम बनने का करता है। मायावती जी का भी प्रधानमंत्री बनने का मन करता है। दलित, पिछड़े या फिर अल्पसंख्यकों को कोई प्रधानमंत्री बनने नहीं देता है।
मन तो मेरा भी पीएम बनने का करता है, लेकिन मुझे कोई जल्दबाज़ी नहीं है। बिना मेल बियाह, कनपट्टी ले सेनुर से कोई पीएम नहीं बनता। देश में अभिजात्य वर्ग का जो वर्चस्व है, उसमें कोई दलित, पिछड़ा या फिर माइनारिटी का पीएम कैसे बन सकता है ?
लालू यादव का दूसरा किससा भी काफी दिलचस्प है, जब लालू यादव रेल मंत्री थे, उस दौरान जार्ज फर्नांडीस एनडीए के सहयोगी दलों में थे। विपक्ष में एनडीए था। भाषण देते हुए लालू यादव ने अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में हुए पोखरण परमाणु विस्फोट पर सवाल उठाया।
जार्ज फर्नांडीस पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा था कि पता नहीं जार्ज साहब आज वहां क्यों बैठे हैं। हमें उन्होंने ही समाजवाद का पाठ पढ़ाया। टीवी पर हमने गुप्ता जी को सुना। वह कह रहे थे हमें रोटी चाहिए। लगता है कि बेचारे अभी तक भूखे हैं। रोटी आसमान से नहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर से आएगा।
गुप्ता जी, रोटी इंकलाब जिंदाबाद से नहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर से आएगा। एड़ी अलगा के भाषणबाज़ी करने से रोटी नहीं आने वाला है। इन्फ्रास्ट्रक्चर की जब भी बात आती है, कहीं मेधा पाटकर खड़ी हो जाती हैं, तो कहीं बहुगुणा जी अनशन करते हैं, कहीं एनजीओ आ जाते हैं। भाजपा का हाल पुतवो मीठ, भतरो मीठ जैसा है।












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