Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

क्या नीतीश कुमार 2005 की तरह 2020 में भी अपनी गलती सुधारेंगे?

क्या नीतीश कुमार 2005 की तरह 2020 में भी अपनी गलती सुधारेंगे?

बिहार के मौजूदा शिक्षा मंत्री डॉ. मेवालाल चौधरी की नियुक्ति पर विवाद हो गया है। राजद का आरोप है कि मेवालाल चौधरी चूंकि भ्रष्टाचार के आरोपी हैं इसलिए उन्हें पद से हटा दिया जाना चाहिए। भाकपा माले ने उनकी बर्खास्तगी के लिए आंदोलन शुरू करने का एलान किया है। दूसरी तरफ मेवालाल चौधरी ने कहा है कि सारा मामला कोर्ट में है और वे चार्जशीटेड नहीं हैं। उन्होंने आरोपों को निराधार बताया है। विवाद के तूल पकड़ने से क्या नीतीश कुमार, मेवालाल चौधरी को मंत्री पद से हटाएंगे ? 2005 में जब नीतीश ने जब पहली बार बहुमत की सरकार का गठन किया था तब जीतन राम मांझी को भी मंत्री बनाया था। लेकिन जैसे ही पता चला कि मांझी का नाम बीएड डिग्री घोटला से जुड़ा है तो शपथ के कुछ घंटे बाद ही उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। क्या नीतीश कुमार फिर ऐसा कर पाएंगे ?

Recommended Video

    Nitish Kumar Oath Ceremony: BJP के खाते में 21 तो JDU को मिले 20 Ministry | Bihar | वनइंडिया हिंदी
    2005 में कुछ ही घंटों में हटा दिये गये थे मांझी

    2005 में कुछ ही घंटों में हटा दिये गये थे मांझी

    2005 में नीतीश कुमार ने भाजपा के सहयोग से पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी थी। जीतन राम मांझी पहले राजद में थे। फिर जदयू में आ गये थे। 1995 में लालू यादव की सरकार थी। तब बिहार के मगध और मिथिला विश्वविद्यालय से राजस्थान, उत्तर प्रदेश के कुछ बीएड कॉलजों को मान्यता दी गयी थी। इन कॉलेजों में बीएड की डिग्री दो से ढाई लाख रुपये में बेची जा रही थी। बिहार के निगरानी ब्यूरो ने 1999 में इस संबंध में छह अलग-अलग FIR दर्ज किये थे। उस समय बिहार में राबड़ी देवी की सरकार थी। राजद के जयप्रकाश यादव शिक्षा मंत्री थे और जीतन राम मांझी शिक्षा राज्यमंत्री थे। बीएड डिग्री घोटला के आरोप में तत्कालीन शिक्षा मंत्री जयप्रकाश यादव को जेल भी जाना पड़ा था। लेकिन शिक्षा राज्यमंत्री जीतन राम मांझी को जमानत मिल गयी थी। तब से जीतन राम मांझी पर ये मामला चल रहा था। इस बीच 2005 में उन्हें नीतीश कुमार ने मंत्री बना दिया। लेकिन डिग्री घोटला की वजह से नीतीश कुमार ने आनन-फानन में उन्हें पद से हटा दिया। 2008 में जब जीतन राम मांझी इस आरोप से बरी हो गये तब जाकर नीतीश कुमार ने उन्हें फिर मंत्री बनाया।

    मेवा लाल चौधरी के खिलाफ क्या है मामला ?

    मेवा लाल चौधरी के खिलाफ क्या है मामला ?

    डॉ. मेवालाल चौधरी पहले बिहार कृषि विश्वविद्यालय ( सबौर,भागलपुर) के कुलपति थे। 2013-14 के दौरान विश्वविद्यालय में 160 प्राध्यापकों और कनीय वैज्ञानिकों की भर्ती हुई थी। बहाली के लिए बनी चयन समिति के अध्यक्ष कुलपति मेवालाल चौधरी थे। नियुक्ति में गड़बड़ी का आरोप लगा था। राज्यपाल ने इस नियुक्ति में हुई धांधली के जांच के आदेश दिये थे। हाईकोर्ट के रिटायर जज ने इस मामले की जांच की थी। राजभवन के निर्देश पर 2017 में मेवालाल चौधरी के खिलाफ सबौर थाना में FIR दर्ज किया गया था। तब तक मेवालाल चौधरी कुलपति पद से हट कर जदयू के विधायक बन चुके थे। पुलिस की जांच में उन पर लगे आरोप सही पाये गये थे। लेकिन उनके खिलाफ अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकी है। इस मामले में भागलपुर के एसएसपी का कहना है कि मेवालाल चौधरी ने कोर्ट से बेल ले लिया है। उनके खिलाफ अभी कुछ और बिन्दुओं पर जांच चल रही है इसलिए चार्जशीट दाखिल नहीं की गयी है। इस मामले में मेवालाल चौधरी के भतीजे रमेश चौधरी की गिरफ्तारी हुई थी। सुल्तानगंज के हिमांशु कुमार ने आरोप लगाया था कि उन्होंने बहाली के लिए रमेश चौधरी को दो लाख रुपये का चेक दिया था।

    मेवालाल 2017 में जदयू से हुए थे निलंबित

    मेवालाल 2017 में जदयू से हुए थे निलंबित

    2010 में मेवालाल चौधरी की पत्नी नीता चौधरी तारापुर से जदयू की विधायक थीं। मेवालाल चौधरी 2015 में इस सीट से जदयू के विधायक बनने में कामयाब रहे थे। जब मेवालाल को नियुक्ति घोटला में आरोपी बनाया गया तो जदयू ने इन्हें निलंबित कर दिया था। 2017 में उनके खिलाफ FIR दर्ज होने से जदयू की बहुत किरकिरी हुई थी। मेवा लाल पर आरोप था कि उन्होंने बहाली में वाइवा और पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के अंक खुद भरे थे। नेट में फेल करीब 18 उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया था। कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए पक्षपात और घपला किया गया था। करप्शन पर जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाले नीतीश कुमार की इस मामले से भारी फजीहत हुई थी। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने मेवालाल को फरवरी 2017 में निलबंति कर दिया था। उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट भी जारी हुआ था। लेकिन इस बीच उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गयी थी। फरवरी 2017 में सुशील मोदी विपक्ष में थे और तब उन्होंने मेवालाल चौधरी की गिरफ्तारी की मांग की थी। मेवालाल चौधरी के खिलाफ अभी भी नियुक्ति घोटला की जांच चल रही है। उनका जदयू से निलंबन कब वापस लिया गया ? कैसे किसी घपले के आरोपी को टिकट मिल गया ? कैसे एक आरोपी को मंत्री पद मिल गया ? इन सवालों से नीतीश कुमार की परेशानी बढ़ गयी है। क्या नीतीश कुमार 2005 की तरह एक बार फिर अपनी गलती सुधारेंगे ?

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+