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Bihar SIR: 'लोकतंत्र पर बर्बर हमला टला, EC बेनकाब हुआ', कांग्रेस का SC के फैसले पर जोरदार रिएक्शन

Congress On Bihar SIR: कांग्रेस ने शुक्रवार (22 अगस्त) को बिहार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और कहा कि चुनाव आयोग पूरी तरह बेनकाब और बदनाम हो गया है। कांग्रेस के महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया कि लोकतंत्र ने चुनाव आयोग की बर्बर कोशिशों को झेलते हुए अपनी रक्षा की है। लोकतंत्र पर बर्बर हमला टल गया है।

जयराम रमेश ने कहा, "आज का सुप्रीम कोर्ट का फैसला लोकतंत्र के लिए राहत भरा है। कांग्रेस बिहार SIR मुद्दे पर आज के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करती है। लोकतंत्र भारत के चुनाव आयोग (ECI) के क्रूर हमले से बच गया है। 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए चुनाव आयोग के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें हटाए गए मतदाताओं की सूची को जनता से छुपाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि हटाए गए मतदाताओं की सूची को अब केवल प्रकाशित ही नहीं किया जाएगा, बल्कि सूची में नाम हटाने के कारण भी साथ में बताना अनिवार्य होगा।''

Congress On Bihar SIR

जयराम रमेश बोले- 'ECI पूरी तरह बेनकाब और अविश्वसनीय साबित हुआ'

जयराम रमेश ने आगे कहा,

"आज ECI पूरी तरह बेनकाब और अविश्वसनीय साबित हुआ। उसके G2 कठपुतली हार गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि SIR प्रक्रिया में राजनीतिक पार्टियों को शामिल किया जाए और हटाए गए मतदाताओं के दावे ऑनलाइन और ऑफलाइन स्वीकार किए जाएं।"

आधार कार्ड को अब चुनाव आयोग को अनिवार्य रूप से स्वीकार करना होगा: जयराम रमेश

जयराम रमेश ने कहा,

''14 अगस्त को ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उनके लिए आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार किया जाए। आज अदालत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि आधार एक मान्य पहचान पत्र है, जिसे चुनाव आयोग को अनिवार्य रूप से स्वीकार करना होगा। आज सुप्रीम कोर्ट ने संशोधन प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के लिए सुरक्षा उपाय तय किए हैं, जिनमें राजनीतिक दलों की भागीदारी को भी शामिल किया गया है। अब तक चुनाव आयोग का रवैया बाधा उत्पन्न करने वाला है और मतदाताओं के हितों के विपरीत रहा है। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि यह हमें एक ऐसा अधिकार प्रदान करता है, जिसे चुनाव आयोग अनदेखा नहीं कर सकता।''

सरल शब्दों में कहें तो, सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि मतदाता अपने नाम हटाए जाने के कारण जान सकें और लोकतंत्र की प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या-क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड या किसी मान्यता प्राप्त 11 दस्तावेजों में से कोई भी पहचान के लिए स्वीकार्य होगा। साथ ही, लगभग 65 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए जाने पर राजनीतिक पार्टियों ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी, इस पर भी न्यायालय ने चिंता जताई और उन्हें प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि हटाए गए मतदाताओं के दावे ऑनलाइन आधार या अन्य मान्य दस्तावेजों के साथ जमा किए जा सकते हैं, और सभी राजनीतिक पार्टियां अगली सुनवाई तक इस प्रक्रिया में अपनी भूमिका की रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

इस मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी। वहीं ECI के वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने अदालत से 15 दिन का समय मांगा ताकि यह साबित किया जा सके कि किसी मतदाता को गलत तरीके से हटाया नहीं गया।

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