बिहार में CBI एक्शन के लिए नियम बदलने जा रही है नीतीश सरकार! रेड मारने से पहले लेनी होगी मंजूरी
पटना, अगस्त 29। बिहार में नीतीश कुमार के महागठबंधन के साथ मिलकर नई सरकार बनाने के बाद से ही आरजेडी के कई नेताओं के घरों और अन्य ठिकानों पर सीबीआई की रेड पड़नी शुरू हो गई। पिछले दिनों सीबीआई ने बिहार में लैंड फॉर जॉब स्कैम मामले में कई नेताओं के यहां छापेमारी की थी, जिसे आरजेडी और जेडीयू ने बदले की कार्रवाई बताया था। ऐसे में अब खबरें हैं कि बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन ने रविवार को इस बात पर सहमित बनाई है कि राज्य में अब सीबीआई को जांच करने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी लेनी होगी।

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, महागठबंधन ने आरोप लगाया है कि केंद्र की भाजपा सरकार राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। इन आरोपों के बीच सीबीआई की जांच को रोकने के लिए महागठबंधन में एक आम सहमति बनी है कि अब राज्य में कोई भी जांच शुरू करने के लिए सीबीआई को राज्य सरकार की अनुमति लेनी होगी।
वैसे तो दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टेबलिशमेंट एक्ट 1946 की धारा 6 के अनुसार, सीबीआई को अपने अधिकार क्षेत्र में जांच शुरू करने के लिए राज्य सरकारों से सहमति लेनी होती है, लेकिन पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब और मेघालय सहित 9 राज्यों ने सीबीआई को दी गई यह मंजूरी वापस ले ली है। अब इन राज्यों में सीबीआई को कार्रवाई करने से पहले मंजूरी लेनी होती है। इन 9 राज्यों में अभी विपक्षी पार्टियों की सरकार है। अब इनमें बिहार भी शामिल होने जा रहा है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता शिवानंद तिवारी का कहना है कि भाजपा के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने के लिए जिस तरह से केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है उसे देखते हुए बिहार में महागठबंधन सरकार को सीबीआई को दी गई आम सहमति को वापस ले लेना चाहिए। इसके अलावा केंद्रीय जांच एजेंसियों के हो रहे दुरुपयोग की जांच के लिए न्यायपालिका से संपर्क करने का विकल्प भी तलाशना चाहिए। शिवानंद तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार में केंद्रीय जांच एजेंसियों ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है।
इस मामले में जेडीयू का कहना है कि सीबीआई से आम सहमति वापस लेने का यह सही समय है, क्योंकि सीबीआई का दुरुपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। जेडीयू के मंत्री मदन साहनी ने कहा, "जिस तरह से सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों का विपक्षी नेताओं की छवि खराब करने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है, बिहार के लोग देख रहे हैं, और वे उचित समय पर मुंहतोड़ जवाब देंगे।"
आपको बता दें कि बिहार में महागठबंधनमें सात दल शामिल हैं जिनमें जेडीयू, आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआईएमएल (एल), सीपीआई, सीपीआई (एम) और एचएएम, जिनके पास 243 सदस्यीय विधानसभा में 160 से अधिक विधायक हैं। यह सभी सीबीआई को दी गई आम सहमति को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।












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