लालू के करीबी और पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह हत्या के मामले में दोषी, कोर्ट ने भेजा जेल
लालू प्रसाद यादव के करीबी और पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह को कोर्ट ने आज 22 साल पुराने एक हत्या के मामले में दोषी सुनाते हुए जेल भेज दिया। कोर्ट सजा का ऐलान 23 मई को करेगी।
पटना। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खास कहे जाने वाले पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह को आज हजारीबाग की एक अदालत ने 22 साल पुराने हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया है। जदयू के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह पर विधायक अशोक सिंह की हत्या का मामला दर्ज था।

क्या है पूरा मामला?
आज से 22 साल पहले विधायक अशोक सिंह की दर्दनाक हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह सहित कई अन्य पर हत्या का आरोप लगाया गया था। अशोक सिंह मशरक विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे। विधायक की हत्या मामले में प्रभुनाथ सिंह के साथ-साथ उनके दोनों भाई दीनानाथ सिंह और रितेश सिंह को भी आरोपी बनाया गया था जिसे कोर्ट ने दोषी करार दिया था। इस मामले में हजारीबाग की अदालत 23 मई को अंतिम फैसला सुनाएगी। फिलहाल प्रभुनाथ सिंह लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल पार्टी के नेता हैं और उनकी पहचान बिहार के दबंग नेता के तौर पर की जाती है।

उस वक्त लालू यादव थे मुख्यमंत्री
बात उस वक्त की है जब बिहार में लालू यादव मुख्यममंत्री थे, प्रभुनाथ सिंह उस वक्त सांसद थे। इसी दौरान पटना के फ्लैट में विधायक अशोक सिंह की दर्दनाक हत्या कर दी गई थी। कोर्ट के द्वारा सुनाए गए फैसले और गिरफ्तार हुए पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की गिरफ्तारी के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने लालू नीतीश को आड़े हाथ लेते हुए ट्वीट के जरिए कहा कि जदयू के पूर्व सांसद और नीतीश-लालू के सबसे खास करीबी और विश्वसनीय नेता को आज कोर्ट ने हत्या के मामले में दोषी ठहराया है। 22 साल पहले उन्होंने हत्या की थी और सजा आज मिली है।

प्रभुनाथ सिंह का राजनैतिक कैरियर
बता दें कि बिहार की राजनीति में दबंगई कोई नई बात नहीं है। अभी भी महा गठबंधन की सरकार में कई ऐसे नेता हैं जिनकी छवि राज्य में दबंगों के रूप में दिखती है। वैसे ही एक नेता प्रभुनाथ सिंह थे जो बिहार के सिवान से अपनी चुनावी कैरियर की शुरुआत की थी। सिवान के महाराजगंज संसदीय सीट से 2004 में राजनीतिक कैरियर की शुरुआत करने वाले प्रभुनाथ सिंह पहले जनता दल फिर जदयू से जुड़कर सिवान की राजनीति में सक्रिय रहे। वहीं 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में राजद के उम्मीदवार उमाशंकर सिंह ने प्रभु नाथ को 3000 वोट से हरा दिया। जिसके बाद 2012 में वह जदयू से अलग होकर राजद में शामिल हो गया।

जानिए प्रभुनाथ सिंह की दबंगई के बारे में
सिवान के महाराजगंज से जदयू कोटे से सांसद बने प्रभुनाथ सिंह की राजनीतिक छवी दबंगई से भरी हुई थी। क्योंकि जिस क्षेत्र से वह सांसद बने थे उस क्षेत्र में बिहार के बाहुबली शहाबुद्दीन का राज चलता था। इसी वजह से शहाबुद्दीन और प्रभुनाथ सिंह दोनों आमने सामने दुश्मन के रुप में हमेशा खड़े रहते थे। पर लालू यादव के खास होने के कारण शहाबुद्दीन और प्रभुनाथ सिंह के रिश्ते धीरे धीरे सुधर गए। भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्ति की मार झेल रहे लालू प्रसाद यादव अपनी मुश्किलों के बीच 27 अगस्त को विपक्ष रैली की घोषणा की थी और इस रैली की सारी जवाबदेही प्रभुनाथ सिंह को सौंपा गया था। अब उनके जेल चले जाने के बाद नई तरीके से रैली की तैयारी की जाएगी इससे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को काफी नुकसान हुआ है।
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