Bihar Pride: पहली कोशिश में सिमरन शेखर बनी देश की टॉपर, जानिए कामयाबी के राज़
Bihar Pride: मीडिया से मुखातिब होते हुए सिमरन के माता-पिता ने बताया कि उनकी बेटी शुरुआत से ही पढ़ने में काफी ज़हीन थी। कोरोना काल के दौरान भी उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी। सिमरन की पढ़ाई में दिलचस्पी का ही नतीजा है कि...
Bihar Pride: बिहार की बेटियां भी बेटों से कम नहीं है, दरभंगा जिले की रहने वाली सिमरन ने पूरे देश में प्रदेश के नाम का नाम रोशन किया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यूजी प्रवेश परीक्षा में सिमरन ने पूरे देश में टॉप किया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की तरफ से ली गई परीक्षा में कई हज़ार बच्चों ने भाग लिया था। हज़ारों बच्चों के बीच बिहार की बेटी सिमरन शेखर ने पहली कोशिश में अपने हुनर का परचम लहराया है। उन्होंने पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। रिजल्ट घोषित होने के बाद से ही सिमरन के घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

पहली कोशिश में सिमरन बनी देश की टॉपर
दरभंगा जिले पोखर भिंडा (तारडीह प्रखंड क्षेत्र) की रहने वाली सिमरन की कामयाबी के बाद ग्रामीणों में खुशी की लहर है। वहीं सिमरन के परिवार वालों ने बताया कि वह शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई में काफी तेज थी। उसकी शुरुआती शिक्षा जीसस एंड मैरी एकेडमी दरभंगा में हुई इसके साथ ही पटना से हायर सेकेंडरी की पढ़ाई मुकम्मल हुई। सिमरन के पारिवारिक पृष्टभूमि की बात कि जाए तो उनके परिवार का सियासी वर्चस्व रहा है। सिमरन के पिता दिनकर प्रसाद (पिंटू सिंह) जदयू से तारडीह प्रखंड के अध्यक्ष रह चुके हैं। वहीं उनकी मां मीना कुमारी पूर्व जिला परिषद सदस्य रह चुकी हैं।

परिवार और शिक्षक को दिया कामयाबी का श्रेय
मीडिया से मुखातिब होते हुए सिमरन के माता-पिता ने बताया कि उनकी बेटी शुरुआत से ही पढ़ने में काफी ज़हीन थी। कोरोना काल के दौरान भी उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी। सिमरन की पढ़ाई में दिलचस्पी का ही नतीजा है कि वह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की प्रवेश परीक्षा में पूरे देश में प्रथम स्थान हासिल की है। वहीं सिमरन ने अपनी कामयाबी का श्रेय माता पिता और शिक्षकों को दिया। उसने कहा कि परिवार और शिक्षक की मदद से ही यह मुकाम हासिल कर पाई है। इंसान के सामने मुश्किलें आती हैं लेकिन उसका सामना करने से कामयाबी ज़रूर मिलती है।

भाई-बहन को एक साथ मिली कामयाबी
बिहार लोक सेवा आयोग 31वीं न्यायिक सेवा परीक्षा के परिणाम में भावना नंदा (रांची) ने टॉप किया है। वहीं दिव्यांशु गुप्ता (मध्य प्रदेश) सेकंड टॉपर हैं। बिहार के मोतिहारी जिले के रहने वाले राघव कुमार ने तीसरा स्थान हासिल किया है। वहीं चौथे स्थान पर मधुबनी की रहने वाली स्नेहा मिश्रा हैं। पांचवें स्थान पर मधेपुरा की पायल मिश्रा ने कामयाबी हासिल की है। वहीं इन सबके अलावा एक ही परिवार के तीन सदस्यों को पहली बार में मिली कामयाबी भी सुर्खियों में बनी हुई है। आइए जानते हैं उनके संघर्ष की कहानी।

एक ही परिवार के 3 बच्चों ने लहराया परचम
बिहार लोक सेवा आयोग की 31वीं न्यायिक सेवा परीक्षा में दरभंगा की दो बटियों ने कामयाबी का परचम लहराया है, इसके साथ ही उनके भाई ने भी पहली कोशिश में ही कामयाबी हासिल की है। शिप्रा कुमारी और नेहा कुमारी सगी बहने हैं और अनंत कुमार उनके चचेरे हैं। एक ही परिवार से भाई-बहनों को मिली कामयाबी से परिवार वालों समेत गांव में जश्न का माहौल है। उनके परिवार में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

पहली कोशिश में मिली कामयाबी
बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में पहली कोशिश में कामयाबी मिलने पर ग्रामीणों ने खुशी ज़ाहिर की। उन्होंने बताया कि इस परिवार के बच्चे शुरुआत से ही पढ़ाई में काफी आगे रहते आए हैं। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने पहले ही प्रयास में सफलता पाई है, यह हम सभी लोगों के लिए गर्व की बात है। इन्होंन चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी एलएलएम तक की पढ़ाई की है।
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