Bihar Politics: चुनाव में RJD की करारी हार पर महामंथन, Tejashwi Yadav की ये 4 गलतियां बनी हार की वजह!
Bihar Politics Tejashwi Yadav: बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी की हुई दयनीय हालत ने पार्टी के शीर्ष नेताओं से लेकर आम कार्यकर्ताओं तक को हैरत में डाल दिया है। चुनाव से पहले तक तेजस्वी यादव सीएम बनने के दावे कर रहे थे। नतीजों के बाद पार्टी अब मजबूत विकल्प भी नहीं बन सकी है। इस हार के बाद तेजस्वी यादव ने पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक की थी। हार की समीक्षा के लिए जिला और प्रखंड स्तर पर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
समीक्षा रिपोर्ट में हार के कारणों की विस्तार से समीक्षा की गई है। इसमें संजय यादव और हरियाणा से आई उनकी पेड टीम के साथ कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल के अभाव की बात कही गई है। इसके अलावा, तेजस्वी यादव की रणनीतिक चूकों को भी हाईलाइट किया गया है।

Tejashwi Yadav की गलतियों पर भी चर्चा
- आरजेडी के महामंथन में तेजस्वी यादव की भूमिका पर भी बात की गई। इसमें माना गया कि आम कार्यकर्ताओं के लिए ही नहीं वरिष्ठ नेताओं को भी तेजस्वी और संजय यादव से मिलने में दिक्कत होती थी। संवाद की कमी का असर चुनावी रणनीति पर पड़ा।
- जिला और प्रखंड स्तर पर की गई सर्वे रिपोर्ट में सामने आया कि तेजस्वी यादव ने हर घर नौकरी का वादा किया था। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने इस वादे पर ही पूरा जोर लगाया, लेकिन जनता ने इसे विश्वसनीय नहीं माना।
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- तेजस्वी यादव चुनावी रणनीति और प्रत्याशियों के चयन से लेकर माइक्रो-मैक्रो मैनेजमेंट तक के लिए संजय यादव और उनकी पेड टीम पर निर्भर थे। संजय यादव की टीम निचले स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत संवाद नहीं कर सकी। इस वजह से बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं का उत्साह ठंडा पड़ गया।
- तेजस्वी यादव से कार्यकर्ताओं और पार्टी के पुराने नेताओं की मुलाकात और वन-टू-वन बातचीत नहीं हुई। इसकी वजह से कार्यकर्ता ग्राउंड रिपोर्ट नहीं दे सके और चुनाव प्रचार में आरजेडी बुरी तरह से पिछड़ गई।
Bihar Politics: रिपोर्ट में सुझाव, 'कार्यकर्ताओं से संवाद जरूरी'
विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तेजस्वी यादव ने पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ बैठक की थी। इसमें प्रखंड और जिला स्तर के पार्टी पदाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई थी। इस रिपोर्ट में संजय यादव और उनकी टीम के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी गई है। टिकट बंटवारे में धांधली से लेकर माई-बहिन योजना के फॉर्म भरने में पैसे लेने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया कि 33 नेताओं के टिकट काटे गए, लेकिन उन्हें बगावत से रोकने के लिए कुछ नहीं किया गया। चुनाव से पहले तेज प्रताप यादव को निकालने और रोहिणी आचार्य की नाराजगी और बगावत की खबरों ने भी पार्टी को नुकसान पहुंचाया।
इस रिपोर्ट में बिहार की राजनीति को लेकर कुछ सुझाव भी हैं। इसमें कहा गया है कि पार्टी के शीर्ष नेताओ और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद होना चाहिए। तेजस्वी यादव से पार्टी नेताओं, जिला प्रभारियों की नियमित मुलाकात और वार्ता संगठन मजबूत करने के लिए जरूरी है।
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