'CM कोमा में हैं, सरकार नहीं चल रही'-तेजप्रताप ने साधा निशाना, क्यों बार-बार उठ रहा नीतीश के हेल्थ का मुद्दा
Bihar Election 2025 (Tej Pratap Yadav Nitish Kumar): बिहार की राजनीति इस वक्त गरमाई हुई है। जाले से बीजेपी विधायक और नीतीश कैबिनेट के मंत्री जीवेश मिश्रा पर पत्रकार (यूट्यूबर) की पिटाई का आरोप लगा तो विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव खुद पीड़ित को लेकर दरभंगा थाने पहुंचे और मंत्री पर एफआईआर दर्ज करवाई। इसी बीच पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव ने नीतीश कुमार की सेहत को लेकर चौंकाने वाला बयान देकर माहौल और गरमा दिया।
तेजप्रताप ने मीडिया से बातचीत में कहा-"यह जेडीयू-भाजपा का गुंडा राज है। मुख्यमंत्री अब कोमा में जा चुके हैं और उनसे सरकार नहीं चल रही है।" उनके इस बयान के बाद एक बार फिर सीएम नीतीश के स्वास्थ्य को लेकर विपक्षी हमले तेज हो गए हैं। तेजस्वी और राहुल गांधी भी कई बार नीतीश हेल्थ को लेकर तंज कस चुके हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि चुनाव से पहले विपक्ष क्यों मुख्यमंत्री नीतीश के हेल्थ को लेकर हमलावर है।

क्यों विपक्ष बार-बार सीएम नीतीश की हेल्थ पर कर रहा अटैक?
बीते कुछ महीनों से सीएम नीतीश कुमार की तबीयत को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कभी उनके गिरने की घटनाओं का हवाला दिया जाता है, तो कभी सार्वजनिक मंच पर उनकी थकान या भूलने की आदत को मुद्दा बनाया जाता है। तेजप्रताप का "कोमा" वाला बयान इसी कड़ी को और आगे बढ़ाता है।
अभी हाल ही में राजद सांसद सुधाकर सिंह ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा था कि वह (नीतीश) 'चिकित्सकीय रूप से तो जिंदा हैं', लेकिन 'दिमागी रूप से मृत हो चुके हैं।
नीतीश कुमार 74 साल के हैं। कई सार्वजनिक मौकों पर नीतीश कुमार के व्यवहार के बाद विपक्ष उनके स्वास्थ्य को लेकर निशाना साध रहे है। हालांकि नीतीश के बेटे निशांत कुमार का कहना है कि उनके पिता बिल्कुल फिट एंड फाइन हैं।
चुनावी रणनीति: नीतीश की हेल्थ पर विपक्ष को कैसे हो सकता है फायदा?
🔹 लीडरशिप पर सवाल - विपक्ष बार-बार यह संदेश देना चाहता है कि नीतीश अब बिहार की बागडोर संभालने में सक्षम नहीं हैं। इससे जनता के मन में विश्वास की कमी पैदा हो सकती है।
🔹 एनडीए की कमजोरी उजागर करना - सीएम नीतीश की सेहत को टारगेट कर विपक्ष यह दिखाना चाहता है कि एनडीए सरकार का चेहरा ही कमजोर हो चुका है। यह NDA की एकजुटता पर भी असर डाल सकता है।
🔹 चुनाव में एजेंडा सेट करना - हेल्थ इश्यू को उठाकर विपक्ष जनता का ध्यान बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों से जोड़ते हुए कह सकता है कि "जो मुख्यमंत्री खुद स्वस्थ नहीं, वह राज्य को कैसे संभालेंगे।"
🔹 जनता में सहानुभूति को तोड़ना - नीतीश लंबे समय से "सुधारक और अनुभवी नेता" की छवि के साथ जनता में सहानुभूति पाते रहे हैं। हेल्थ पर हमले से इस छवि को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
🔹 वैकल्पिक चेहरा मजबूत करना - जैसे ही नीतीश पर भरोसा कमजोर होगा, विपक्षी नेता खासकर तेजस्वी यादव खुद को "युवा और ऊर्जावान विकल्प" के तौर पर पेश कर सकते हैं। इससे चुनावी समीकरण बदल सकता है।
तेजप्रताप यादव का 'नीतीश कोमा में हैं' वाला बयान सिर्फ एक विवादित टिप्पणी नहीं है, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। नीतीश कुमार की छवि और स्वास्थ्य दोनों को निशाने पर रखकर विपक्ष मतदाताओं को यह जताना चाहता है कि अब बदलाव का वक्त आ गया है।












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