Bihar News: बिहार में बड़ा घोटाला! 7 विधायक-सांसद सैलरी के साथ ले रहे 'पेंशन', लिस्ट में मोदी-नीतीश के मंत्री
Bihar leaders Pension and Salary: बिहार की राजनीति में RTI के जरिए एक बड़ा नियम उल्लंघन का मामला सामने आया है, जहां मोदी और नीतीश सरकार के कई मंत्री और वरिष्ठ नेता एक साथ सरकारी वेतन और पेंशन का लाभ ले रहे हैं। यह कृत्य सीधे तौर पर नियमों के खिलाफ है, क्योंकि वर्तमान में किसी भी सदन का सदस्य होने पर पूर्व पद की पेंशन बंद हो जानी चाहिए।
इस सूची में केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे, बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, उपेंद्र कुशवाहा और देवेश चंद्र ठाकुर जैसे कद्दावर नेताओं के नाम शामिल हैं। RTI कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय द्वारा उजागर किए गए इस 'डबल पेमेंट' घोटाले ने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है और नैतिकता तथा जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।

कौन-कौन से हैं वो केंद्रीय और राज्य मंत्री?
इस सूची में सबसे चौंकाने वाले नाम मोदी और नीतीश सरकार के प्रमुख मंत्रियों के हैं।
- सतीश चंद्र दुबे: वर्तमान में केंद्रीय राज्य मंत्री (राज्यसभा सांसद) हैं। उन्हें 2019 से 59,000 रुपए पेंशन मिल रही है।
- बिजेंद्र प्रसाद यादव: बिहार सरकार में वरिष्ठ मंत्री (वित्त, ऊर्जा) हैं। उन्हें 2005 से 10,000 रुपए पेंशन मिल रही है। उनकी छवि एक ईमानदार नेता की है।
ये दोनों नेता, ऊंचे पदों पर वेतन लेने के बावजूद, अपनी पूर्व पद की पेंशन भी ले रहे हैं।

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अन्य वरिष्ठ नेता जो ले रहे हैं डबल लाभ
- उपेंद्र कुशवाहा: (राज्यसभा सांसद) 2005 से 47,000 रुपए पेंशन ले रहे हैं, साथ ही सांसद का वेतन भी ले रहे हैं।
- देवेश चंद्र ठाकुर: (लोकसभा सांसद) 2020 से 86,000 रुपए पेंशन ले रहे हैं। वे विधान परिषद में सभापति रह चुके हैं।
- ललन सर्राफ: (विधान परिषद सदस्य) 2020 से 50,000 रुपए पेंशन ले रहे हैं।
- नीतीश मिश्रा: (विधायक) 2015 से 43,000 रुपए पेंशन ले रहे हैं।
- संजय सिंह: (विधान पार्षद) 2018 से 68,000 रुपए पेंशन ले रहे हैं।
RTI कार्यकर्ता ने उजागर किया गड़बड़झाला
यह पूरा गड़बड़झाला बिहार के RTI कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय के एक आवेदन पर दी गई सूचना से उजागर हुआ है। इस खुलासे ने यह गंभीर सवाल खड़ा किया है कि इतने बड़े पदों पर बैठे नेता, जो नियम-कानून बनाने वाले हैं, वे स्वयं ही नियमों का उल्लंघन क्यों कर रहे हैं। जबकि सामान्य नौकरी वाले लोगों को भी हर साल 'जिंदा होने का सर्टिफिकेट' देना पड़ता है, इन माननीय सदस्यों को यह पता होता है कि वे पद पर रहते हुए पेंशन नहीं ले सकते, फिर भी वे इसे जारी रखे हुए हैं।
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क्या कहता है नियम?
दोहरी भुगतान पर रोक: किसी भी माननीय सदस्य (जैसे विधायक, सांसद, एमएलसी) को वर्तमान में किसी भी सदन (राज्य या केंद्र) से वेतन मिल रहा हो, तो उन्हें पूर्व पद के लिए मिल रही पेंशन को बंद कर देना चाहिए।
रिटायरमेंट के बाद ही पेंशन: माननीय सदस्य अपनी पेंशन तभी ले सकते हैं जब वे पद पर न हों, यानी रिटायर होने के बाद।
शपथ पत्र आवश्यक: पेंशन प्राप्त करने के लिए लाभार्थी को एक शपथ पत्र (undertaking) देना होता है, जिसमें उन्हें यह लिखकर पुष्टि करनी होती है कि वे वर्तमान में राज्य या केंद्र सरकार में कहीं भी सेवा (यानी वेतनभोगी पद) नहीं दे रहे हैं।
हर साल जीवित होने का प्रमाण: सामान्य नौकरीपेशा और माननीय सदस्यों, दोनों को ही हर साल अपनी पेंशन जारी रखने के लिए यह प्रमाणित करना होता है कि वे जीवित हैं और पेंशन के हकदार हैं।
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