Bihar News: 11 सालों के बाद परिवार से मिला बेटा, मिलने की ख़ुशी से ज़्यादा ग़म
Bihar News: कला देवी (सतीश की मां) ने बताया कि उसके बेटे को बांग्लादेश की जेल में काफी प्रताड़ित किया गया जिसकी वजह से दिमागी हालत बिगड़ गई है। अब इस काबिल नहीं है कि कुछ काम कर परिवार का ख़र्च उठा सके। उन्होंने कहा...
Bihar News: परिवार से अगर उसका बच्चा दूर हो जाए तो मां-बाप से ज्यादा ग़म शायद ही किसी और को होता है। लेकिन वहीं बच्चा अगर सालों बाद परिवार से मिले तो खुशी का ठिकाना नहीं रहता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी खबर से रूबरू करवाने जा रहे हैं जिसे पढ़ कर आप भी कहेंगे बेटे के मिलने की खुशी से ज्यादा परिवार को ग़म मिला है। दरभंगा जिले के मनोरथा (हायाघाट प्रखंड) का यह पूरा मामला है। सतीश चौधरी जिसमें 11 साल के बाद अपने परिवार से मिला है, लेकिन उसकी हालत देखकर परिवार वाले खुशी से ज्यादा गम में मुबतला है। आइए विस्तार से जानते हैं बेटे के बिछड़ने से लेकर मिलने तक की कहानी।

घर में भी ज़ंजीरों से बंधा रहता है सतीश
सतीश कुमार 11 सालों तक बांग्लादेश की जेल में क़ैद रहा और जब वापस परिवार से मिला तो वह मानसिक तौर पर बीमार है। वह बांग्लादेश कैसे पहुंचा, इस बात की जानकारी हम आपको आगे बताएंगे। उससे पहले सतीश के परिवार के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। सतीश की मां ने कला देवी ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि खोया हुआ बेटा 11 सालों बाद मिला तो काफी खुशी हुई, लेकिन उसके हालत को देखते हुए हम लोग गमजदा हो गए। वह मानसिक तौर पर बीमार हो चुका है, कुछ काम नहीं कर सकता है, जेल से छूटने के बाद भी उसे जंजीरों में बांधकर रखना पड़ता है। जंजीरों में इसलिए बांधना पड़ता है ताकि वह कहीं भाग नहीं जाए।

बांग्लादेश की जेल में किया गया प्रताड़ित
कला देवी (सतीश की मां) ने बताया कि उसके बेटे को बांग्लादेश की जेल में काफी प्रताड़ित किया गया जिसकी वजह से दिमागी हालत बिगड़ गई है। अब इस काबिल नहीं है कि कुछ काम कर परिवार का ख़र्च उठा सके। उन्होंने कहा कि वह खुद मज़दूरी कर बहुत ही मुश्किल से परिवार का गुज़ारा कर रही हैं, अब उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि सतीश के इलाज का ख़र्च उठा सकें। उन्होंने कहा कि जब सतीश को बांग्लादेश से घर लाया गया तो उन लोगों ने आर्थिक मदद का आश्वासन दिया था। सतीश की पत्नी और उनके दो छोटे बच्चों का खयाल रखने वाला कोई नहीं है। कहीं से भी कुछ मदद नहीं मिल रही है।

2008 में अचानक लापता हुआ था सतीश
सतीश का घर फूंस से बना हुआ है, बारिश होने के बाद छत से पानी टपकता है। प्लास्टिक टांग कर किसी तरह से वक़्त गुज़रता है। परिवार के लोगों को बहुत मुश्किल से दो वक्त की रोटी मिलती है। सतीश के घर की स्थिति तो आपने जान ली। अब जानते हैं कि सतीश किस तरह का काम करता था और कैसे वह बांग्लादेश में सलाखों के पीछे पहुंचा। पटना के कदमकुआं में सतीश अपने भाई के साथ पंडाल निर्माण का काम करता था। एसके मेमोरियल हॉल में काम करने के दौरा 15 अप्रैल 2008 अचानक वह लापता हो गया। सतीश की तलाश की गई लेकिन कुछ भी पता नहीं चल पाया।

बांग्लादेश की आर्मी ने बनाया बंदी
पटना के गांधी मैदान थाने में सतीश के भाई मुकेश ने गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई थी। इसके बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया। करीब 4 साल बीत जाने के बाद 17 मार्च 2012 को मुकेश (सतीश का भाई) को पता चला कि उसका भाई बांग्लादेश के जेल में बंद है। 11 साल तक रिहाई की कानूनी प्राक्रिया चली और सतीश की तीन साल पहले वतन वापसी हुई। सतीश के परिवार वालों की मानें तो पश्चिम बंगाल में सतीश की ससुराल है। बांग्लादेश बॉर्डर वहां से करीब है। गलती से सतीश बॉर्डर क्रॉस कर गया था। जिसके बाद वहां की सेना ने उसे बंदी बना लिया था।
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