Bihar Temple Stampede: नालंदा के शीतला मंदिर में भगदड़ से 8 महिलाओं की मौत, नीतीश कुमार ने किया मुआवजे का ऐलान
Bihar Nalanda Temple Stampede: बिहार के नालंदा जिले से 31 मार्च को एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां के प्रसिद्ध माता शीतला मंदिर में पूजा के दौरान अचानक मची भगदड़ में कम से कम 8 महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि 12 से अधिक श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
यह हादसा उस समय हुआ जब चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार (शीतला अष्टमी) के अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए उमड़े थे।

कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, हर मंगलवार को शीतला माता मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जुटती है, लेकिन आज चैत्र का अंतिम मंगलवार होने के कारण सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास की गलियों में तिल रखने की जगह नहीं थी। सुबह पूजा के मुख्य पहर के दौरान अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया।
ANI से बातचीत में चश्मदीदों ने बताया, कतार में लगे लोग आगे निकलने की होड़ करने लगे, जिससे धक्का-मुक्की शुरू हुई। देखते ही देखते चीख-पुकार मच गई और लोग एक-दूसरे को रौंदते हुए भागने लगे। इस भगदड़ की चपेट में सबसे ज्यादा बुजुर्ग महिलाएं और बच्चे आए। दम घुटने और भीड़ के नीचे दबने के कारण 8 महिलाओं ने मौके पर ही या अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।
मृतकों की पहचान और घायलों की स्थिति
जिला प्रशासन ने अब तक 8 मौतों की पुष्टि की है, जिनमें से दो महिलाओं की शिनाख्त हो गई है:
- रीता देवी (50 वर्ष): पत्नी दिनेश रजक, निवासी सकुन्त, बिहार।
- रेखा देवी (45 वर्ष): पत्नी कमलेश प्रसाद, निवासी मथुरापुर, नूरसराय।
अन्य मृतकों की पहचान के प्रयास जारी हैं। वहीं, 12 से अधिक घायलों को स्थानीय प्रशासन की मदद से तुरंत 'मॉडल अस्पताल' में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है।
CM नीतीश कुमार का ने किया 6 लाख रुपए मुआवजे की घोषणा
इस घटना पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने इस हादसे को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए मृतकों के आश्रितों के लिए भारी मुआवजे का ऐलान किया है। नीतीश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा जारी बयान के अनुसार, प्रत्येक मृतक के परिवार को कुल ₹6 लाख की आर्थिक मदद दी जाएगी। यह राशि दो अलग-अलग मदों से दी जा रही है। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से ₹4 लाख की और मुख्यमंत्री राहत कोष की ओर से ₹2 लाख की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस दुख की घड़ी में शोकाकुल परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने घायलों के समुचित और मुफ्त इलाज के लिए भी स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश दिए हैं।
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ट्वीट कर कहा कि नालंदा के प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर में जो कुछ भी हुआ, वह अत्यंत पीड़ादायक है। नालंदा के माता शीतला मंदिर में हुई भगदड़ की दुखद घटना अत्यंत हृदयविदारक है। इस हादसे में जान गंवाने वाले और घायल हुए सभी श्रद्धालुओं के परिजनों के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। सरकार प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता और राहत प्रदान कर रही है। घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था की गई है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिवारों को इस दुख की घड़ी में शक्ति दें।"
प्रशासन पर उठे सवाल: क्या सुरक्षा में हुई चूक?
घटना की सूचना मिलते ही एसडीपीओ (SDPO) और जिले के आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। हालांकि, स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आज 'शीतला अष्टमी' जैसे बड़े अवसर पर जितनी भीड़ की उम्मीद थी, उसके अनुपात में पुलिस बल की तैनाती नहीं की गई थी। बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थिति अनियंत्रित हो गई।
क्या है शीतला अष्टमी का धार्मिक महत्व
चैत्र महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन माता शीतला की पूजा करने से चेचक और अन्य बीमारियों से मुक्ति मिलती है। चूंकि यह इस चैत्र मास का आखिरी मंगलवार था, इसलिए ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में महिलाएं 'बासोड़ा' (बासी भोजन का भोग) चढ़ाने और सुख-समृद्धि की कामना करने पहुंची थीं। लेकिन आस्था का यह उत्सव मातम में बदल गया।












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