कौन हैं नीतीश के मंत्री जीवेश मिश्रा? जिनके खिलाफ तेजस्वी यादव खुद पहुंचे थाने, जेल भेजने की कर रहे हैं मांग
Jivesh Mishra Journalist Attack: बिहार के दरभंगा से लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। जाले विधानसभा क्षेत्र में सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय पत्रकार दिवाकर सहनी ने जब नीतीश सरकार में मंत्री और बीजेपी विधायक जीवेश कुमार से सवाल किया, तो सत्ता के प्रतिनिधि बौखला उठे। मंत्री ने पत्रकार का मोबाइल छीनने का आदेश दिया और उसके बाद उनकी पिटाई कर दी गई।
इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसने पूरे राज्य में आक्रोश फैला दिया। अब इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव खुद दरभंगा पहुंचे, पीड़ित पत्रकार से मुलाकात की और उनके साथ थाने जाकर एफआईआर दर्ज कराई।

क्या है पूरा मामला?
बिहार के दरभंगा जिले के जाले विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय पत्रकार दिवाकर सहनी ने सड़क की बदहाल स्थिति के बारे में बिहार सरकार में मंत्री और स्थानीय विधायक जीवेश कुमार से सड़क की मरम्मत और नागरिक सुविधाओं के बारे में सवाल किया। इस पर मंत्री का रवैया अत्यंत आक्रामक रहा। उन्होंने पत्रकार को धमकाया, उनके मोबाइल को छीनने और डिलीट करने का आदेश दिया, और इसके बाद पत्रकार की शारीरिक पिटाई भी की गई। इस पूरी घटना का वीडियो सामने आया, जिसने स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया में हलचल मचा दी।
तेजस्वी यादव ने प्रशासन को दी चुनौती
घटना के सामने आने के बाद विपक्षी दल भी सक्रिय हो गया। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव खुद दरभंगा पहुंचे और पीड़ित पत्रकार दिवाकर सहनी के साथ खड़े होकर सिंहवाड़ा थाने में FIR दर्ज करवाई। तेजस्वी ने मंत्री जीवेश कुमार पर किडनैप और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चक्का जाम जैसी सख्त कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाएंगे।
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वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर के गृह क्षेत्र में पत्रकार पर हमला
इस घटना ने लोगों को गहरा दुख पहुंचाया है और सोशल मीडिया पर भारी प्रतिक्रिया मिली है। द टेलीग्राफ के पूर्व संपादक और वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर, जिनका हाल ही में गुरुग्राम के अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हुआ, इसी सिंहवाड़ा के निवासी थे। संकर्षण ठाकुर की पत्रकारिता का लोहा पूरे देश में माना जाता था और उनके उठाए गए मुद्दों से अक्सर सरकारें जवाबदेह होती थीं। ऐसे प्रतिष्ठित पत्रकार के गृह क्षेत्र में स्थानीय पत्रकारों के साथ मार-पीट की घटना ने लोकतंत्र, प्रेस की स्वतंत्रता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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