बिहार: चारा घोटाले पर फैसले के बाद खतरे में महागठबंधन, नीतिश ने साधी चुप्पी

जदयू के नेता लालू यादव पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं क्योंकि पहले मिट्टी घोटला फिर शहाबुद्दीन से बातचीत और अब चारा घोटाले पर फैसले के बाद द्वारा नीतिश सरकार का बचाव करना काफी मुश्किल साबित हो रहा है।

पटना। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। पहले मॉल घोटाले और मिट्टी घोटाले में उनके और उनके मंत्री बेटे का नाम आना और फिर बाहुबली डॉन शहाबुद्दीन से जेल के अंदर से खास बातचीत का मामला का अभी पूरी तरह शांत हुआ ही नहीं थी कि इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाले पर फैसला सुनाते हुए लालू यादव पर केस चलाने की इजाजत दे दी। इस फैसले के आने के बाद से विपक्ष ने लालू यादव के साथ-साथ मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को भी आड़े हाथों लेने शुरू कर दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि आखिरकार मुख्यमंत्री इन मामलों पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं।

'नीतिश कुमार के चेहरे पर लगा काला धब्बा'

'नीतिश कुमार के चेहरे पर लगा काला धब्बा'

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश कुमार के चेहरे पर एक ऐसा काला धब्बा लग गया है जिसे मिटाने के लिए उन्हें लालू का साथ छोड़ना होगा नहीं तो उन्हें इस बात को कबूलना होगा की बिहार में चल रही महा गठबंधन की सरकार घोटालेबाज और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का काम करती है। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि नितीश कुमार सत्ता के लिए चुपचाप खामोश बैठे हैं। अगर उनमें हिम्मत है तो इन मामलों में लालू यादव पर कार्रवाई करके दिखाएं। वही जब सुशील कुमार मोदी से नीतीश सरकार की समर्थन के बारे में बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि पहले नीतीश कुमार खुद फैसला करें फिर केंद्र इस में हस्तक्षेप करेगा।

छवि बचाने में लगे महागठबंधन के नेता

छवि बचाने में लगे महागठबंधन के नेता

राजद सुप्रीमो पर जबसे घोटाले का आरोप लगा है जदयू के नेताओं द्वारा इन सभी मुद्दे पर कुछ भी बोलने से परहेज किया जा रहा है। क्योंकि इन घोटालों के बीच महागठबंधन के नेताओं द्वारा नीतिश सरकार का बचाव करना काफी मुश्किल साबित हो रहा है। हालांकि कुछ नेताओं ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है जिससे महागठबंधन में मनमुटाव के हालात पैदा हो गया है। हाल फिलहाल जदयू के वरिष्ठ नेता और नीतीश के खास माने जाने वाले आरसीपी सिंह ने इन सभी मामलों पर बयान देते हुए कहा था कि सुशील मोदी के द्वारा जो आरोप लगाए जा रहे हैं उस पर जदयू के नेता कुछ भी बोले यह जरूरी नहीं है। हमारी पार्टी जदयू हमेशा से ही परिवारवाद के खिलाफ रही है। तो दूसरी तरफ लालू प्रसाद यादव के खास कहे जाने वाले विधायक बिरेंद्र भाई ने महागठबंधन के नेताओं पर ही निशाना साधते हुए कहा कि कुछ ऐसे नेता महा गठबंधन में शामिल है जो भीतरघात का काम कर रहे हैं। वही लालू शहाबुद्दीन की जेल से खास बातचीत के मामले सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा बड़े जोर शोर पर है कि जदयू और महागठबंधन के नेता एक खास रणनीति बनाते हुए लालू परिवार को बचाने का काम कर रही है। पर जो कुछ भी हो इन सभी मामलों की बीच महागठबंधन खतरे में है।

प्रधानमंत्री पद पर नीतिश कुमार की निगाह

प्रधानमंत्री पद पर नीतिश कुमार की निगाह

बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार अपनी बेदाग छवि और धुरंधर राजनीति के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि उन्हें तीसरी बार बिहार की कुर्सी पर बैठाया गया है। अब विपक्ष के नेताओं द्वारा सरकार में शामिल राज्य की सबसे बड़ी पार्टी राजद पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं उसमें कुछ भी बोलने से नीतिश कुमार बचते दिख रहे हैं और इस बचाव के लिए जदयू को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों का कहना यह भी है कि मुख्यमंत्री नीतिश कुमार अब प्रधानमंत्री पद के लिए मेहनत कर रहे हैं और इस मामले में कुछ भी बोलने से उनकी छवि धूमिल हो जाएगी इसी वजह से वह और उनकी पार्टी के नेता कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं।

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