Bihar News: बिहार में मखाना खेती पर बंपर सब्सिडी, किसानों को मिलेंगे ₹72,750 तक, जानिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया
Makhana farming Bihar 2026: नए साल की शुरुआत बिहार के किसानों के लिए बड़ी सौगात लेकर आई है। राज्य सरकार ने मिथिला की पहचान रहे मखाना (Mithila Makhana) को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इस योजना के तहत राज्य के 16 जिलों में 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मखाने की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत लागू इस योजना में खेती की लागत पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Bihar government subsidy on Makhana: 16 जिलों में मखाने की 'सफेद क्रांति'
मखाने की खेती अब कुछ सीमित इलाकों तक नहीं रहेगी। बिहार के 16 प्रमुख जिलों, जिनमें दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया और समस्तीपुर शामिल हैं, को इस विशेष मिशन के लिए चुना गया है। समस्तीपुर जिले को अकेले 20 हेक्टेयर का लक्ष्य मिला है। सरकार का उद्देश्य उन्नत प्रभेदों (वैरायटी) के बीजों का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाना है। विभागीय पोर्टल पर पंजीकृत किसान इस योजना का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिसमें नए किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी।
72 हजार से ज्यादा का अनुदान और दो किस्तों में भुगतान
मखाना खेती की प्रति हेक्टेयर लागत ₹97,000 निर्धारित की गई है, जिस पर सरकार ₹72,750 का अनुदान देगी। यह राशि किसानों को दो किस्तों में मिलेगी। पहली किस्त के रूप में ₹36,375 वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिए जाएंगे, जबकि दूसरी किस्त अगले वर्ष मिलेगी। इससे छोटे किसानों पर आर्थिक बोझ कम होगा और वे मखाने की खेती को व्यावसायिक रूप से अपना सकेंगे। अनुदान की राशि सीधे बीज आपूर्तिकर्ताओं और किसानों के खातों से जुड़ी पारदर्शी व्यवस्था के तहत दी जाएगी।
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Makhana online application: मखाना टूल्स किट पर भी मिलेगी आर्थिक मदद
मखाने की खेती और प्रसंस्करण (Processing) काफी कठिन होता है, जिसमें परंपरागत औजारों की जरूरत पड़ती है। सरकार ने इसके लिए मखाना टूल्स किट पर भी अनुदान का प्रावधान किया है। ₹22,100 की लागत वाली इस किट पर किसानों को 16,575 रुपये की सहायता मिलेगी। इस किट में बांस और लकड़ी से बने पारंपरिक उपकरण जैसे औका, गांज, खैन्ची और चलनी शामिल होंगे। इससे मखाने की कटाई और उसे तैयार करने की प्रक्रिया सुगम और वैज्ञानिक बनेगी।
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दिसंबर से अगस्त तक चलेगा आय बढ़ाने का चक्र
मखाने की खेती का चक्र दिसंबर से शुरू होकर अगस्त के अंतिम सप्ताह तक चलता है। राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केन्द्र दरभंगा और पूर्णिया कृषि कॉलेज जैसे संस्थान उन्नत बीजों की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे। न्यूनतम 0.25 एकड़ से लेकर अधिकतम 5 एकड़ तक की खेती पर अनुदान का लाभ लिया जा सकता है। सरकार के इस मास्टरप्लान से न केवल मखाने की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि परंपरागत उपकरणों के इस्तेमाल से स्थानीय कारीगरों को भी रोजगार मिलेगा और किसानों की तकदीर बदलेगी।
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