बिहार में बढ़ गई 'भूमि सर्वेक्षेण' की डेडलाइन,लाखों जमीन मालिकों को मिली राहत भरी मोहलत
बिहार सरकार ने जमीन मालिकों के लिए संपत्ति से जुड़े स्व-घोषणा पत्र अपलोड करने की समय सीमा बढ़ा दी है। नई समय सीमा अब मार्च 2025 कर दी गई है,जो पिछली कट-ऑफ अगस्त 2024 की जगह लेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। शुरुआत में अधिकारियों ने संशोधित तिथि के तौर पर फरवरी 2025 का ज़िक्र किया था।
एस सिद्धार्थ,अतिरिक्त मुख्य सचिव (कैबिनेट सचिवालय) ने बताया की कि कैबिनेट ने राजस्व और भूमि सुधार विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें समय सीमा को 180 कार्य दिवसों तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। अब भूमि मालिकों के पास आधिकारिक वेबसाइट पर अपने दस्तावेज जमा करने के लिए मार्च 2025 तक का समय है। इसके अलावा,राजस्व मानचित्रों और अन्य भूमि-संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन के लिए 90 कार्य दिवस आवंटित किए गए हैं,जो दस्तावेज जमा करने के बाद शुरू होंगे।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि इस विस्तार का उद्देश्य भूमि मालिकों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना है, जिससे उन्हें आवश्यक कदम उठाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। उन्होंने कहा,'भूमि मालिकों के लिए भूमि संपत्ति से संबंधित स्व-घोषणा दस्तावेज अपलोड करने की समय सीमा बढ़ाने के निर्णय से लोगों को प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।'
विशेष भूमि सर्वेक्षण पहल
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने बताया कि इस कदम से दस्तावेजों को अपलोड करने में होने वाली कठिनाइयों से बचने में मदद मिलेगी। यह विस्तार बिहार में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण का हिस्सा है,जिसका उद्देश्य भूमि अभिलेखों को अद्यतन करना है। आखिरी व्यापक सर्वेक्षण 1911 में ब्रिटिश शासन के दौरान किया गया था।
सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इस सर्वेक्षण के माध्यम से भूमि विवादों को कम करना है,जिसके अगस्त 2025 तक समाप्त होने की उम्मीद है। बिहार में लाखों भू-स्वामियों को जरूरी दस्तावेज जुटाने में बहुत ही ज्यादा कठिनाइयां आ रही हैं। इसमें काफी समय लग रहा है। बिहार के लाखों लोग प्रदेश से बाहर काम करते हैं। ऐसे में उनके लिए यह डेडलाइन बढ़ना बड़ी राहत की तरह है।












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