Bihar Exit Polls 2025: P-Marq सर्वे में NDA या INDIA किसे मिला भारी बहुमत, कौन मुकाबले से बाहर?
Bihar Exit Polls 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग समाप्त होते ही एग्जिट पोल के नतीजे आने शुरू हो गए हैं। देश की प्रतिष्ठित सर्वे एजेंसी P-Marq ने अपने एग्जिट पोल में बड़ा अनुमान जताते हुए कहा है कि इस बार भी एनडीए (भाजपा-जदयू गठबंधन) एक बार फिर से बिहार में सत्ता पर काबिज होता दिख रहा है।
एजेंसी के अनुसार, एनडीए को इस बार 142 से 162 सीटें मिल सकती हैं, जबकि विपक्षी महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) 80 से 98 सीटों पर सिमट सकता है। वहीं, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को 1 से 4 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। बाकी अन्य दलों के खाते में 0 से 3 सीटें जा सकती हैं।

P-Marq एग्जिट पोल्स में NDA की लहर
P-Marq के एग्जिट पोल के अनुसार, एनडीए को स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने की संभावना है। भाजपा-जदयू गठबंधन ने इस बार एकजुट होकर चुनाव लड़ा और दोनों दलों के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिला। जहां भाजपा (BJP) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रचार अभियान को मजबूती दी, वहीं नीतीश कुमार ने अपनी साख और "सुशासन" के नारे के दम पर जनसमर्थन जुटाया।
दूसरी ओर, महागठबंधन (राजद-कांग्रेस-लेफ्ट) मतदाताओं को पूरी तरह आकर्षित करने में असफल रहा। तेजस्वी यादव ने बेरोजगारी और पलायन के मुद्दे उठाए, लेकिन जनता के बीच उस स्तर की लहर नहीं दिखी जो सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा करे।
एनडीए की जीत के पीछे कौन से फैक्टर?
महिला मतदाताओं का भरोसा: नीतीश कुमार के शासनकाल में महिलाओं के हित में चलाई गई योजनाओं - जैसे साइकिल योजना, शराबबंदी और महिला रोजगार योजना - ने महिला वोट बैंक को NDA के पक्ष में मजबूत किया है।
मोदी-नीतीश की जोड़ी: भाजपा के विकास एजेंडे और नीतीश की विश्वसनीय छवि ने एनडीए को "डबल इंजन सरकार" की ताकत दी।
जातीय संतुलन और EBC रणनीति: NDA ने पिछड़े, अति पिछड़े, दलित और सवर्ण सभी वर्गों में संतुलन बनाए रखा। वहीं महागठबंधन की अपील यादव-मुस्लिम समीकरण तक सीमित रह गई।
महागठबंधन की मुश्किलें
महागठबंधन का मुख्य चेहरा तेजस्वी यादव इस बार युवाओं और ग्रामीण वोटरों को एकजुट करने में नाकाम दिखे। कांग्रेस का प्रदर्शन भी कमजोर रहने की संभावना है, जो सिर्फ कुछ गिनी-चुनी सीटों तक सीमित हो सकता है।CPI(ML) और वामदलों के खाते में भी सीमित सीटें आने की संभावना जताई गई है। राजद का कोर वोट बैंक (यादव-मुस्लिम) मजबूत जरूर है, लेकिन अन्य जातीय वर्गों से उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
जन सुराज पार्टी का सीमित असर
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जो इस बार पहली बार बड़े स्तर पर चुनाव मैदान में उतरी, ने राज्य के कई हिस्सों में अभियान चलाया। हालांकि, वोट शेयर के लिहाज से उन्हें कुछ असर दिखा, लेकिन सीटों में इसका बड़ा अनुवाद नहीं हो पाया। P-Marq का मानना है कि जन सुराज 1 से 4 सीटों के बीच सीमित रह सकती है, हालांकि भविष्य में यह पार्टी तीसरे मोर्चे का चेहरा बन सकती है।
बता दें कि, बिहार में दो चरणों में मतदान हुआ। पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर 65.08% मतदान हुआ था, जो अपने आप में रिकॉर्ड था। दूसरे चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर वोटिंग हुई, जिसमें पहले चरण से भी ज्यादा उत्साहपूर्ण मतदान देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिकॉर्ड वोटिंग प्रतिशत ने इस बार ग्रामीण और महिला मतदाताओं की भूमिका को निर्णायक बना दिया है - और यही फैक्टर एनडीए को फायदा पहुंचा सकता है।












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