Bihar Elections: थर्ड इनिंग को जमाने के लिए सीमांचल-कोसी की पिच पर ज्यादा वक्त गुजारेंगे नीतीश
पटना। एक्सपर्ट का कहना है फर्स्ट इनिंग में महागठबंधन ने बेहतर बल्लेबाजी की। सेकेंड इनिंग में एनडीए को मामूली बढ़त मिलने का अनुमान है। इसलिए एनडीए की थर्ड इनिंग को जमाने के लिए कप्तान नीतीश कुमार ने फैसला किया है कि वो सीमांचल और कोसी की पिच पर ज्यादा से ज्यादा वक्त गुजारेंगे। वे पिच पर रहेंगे तो साथी बल्लेबाजों के साथ लंबी साझेदारियां मुमकिन हो पाएंगी। नीतीश कुमार ने बुधवार को किशनगंज, अररिया और सहरसा की पिचों पर लंगर डाल कर ठोस बल्लेबाजी की। इस पिच पर राजद, पप्पू यादव और असदुद्दीन ओवैसी के तेज गेंदबाज 145 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बॉलिंग कर रहे हैं। पहले पावर प्ले में नीतीश ने तूफानी गेंदबाजों के सामने खुद स्ट्राइक ले रखी है ताकि विकेट बचा रहेगा तो बीच के ओवरों में साथी बल्लेबाज स्कोर को एक्सलरेट कर सकेंगे। आलू-प्याज की चिंता से मुक्त हो कर उन्होंने टिक कर बल्लेबाजी की रणनीति अपनायी है।

पहले टिक कर खेलो फिर एक्सलरेट करो
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मोटिवेशनल सेशन अब सम्पन्न हो चुका है। वे एनडीए की टीम में आत्मविश्वास भरने के लिए 23 अक्टूबर, 28 अक्टूबर और 3 नवम्बर को गुरुमंत्र दे चुके हैं। अब टीम को संभालने की जिम्मेवारी कप्तान नीतीश कुमार के कंधों पर है। मंगलवार को मिथिला के हरलाखी पिच पर उन्होंने धैर्य के साथ विपक्षियों का सामना किया। दर्शक दीर्घा से आलू-प्याज फेंके गये। लेकिन उन्होंने अपना पूरा ध्यान बैटिंग पर लगाये रखा। उनके ध्यान को भटकाने की कोशिश हुई लेकिन वे कैप्टन कूल की तरह खेले। नीतीश कुमार को इस तीसरी पारी की अहमियत मालूम है। पहली पारी की डेफसिट को पूरा करने का यही मौका है। 2019 के मुकाबलों में मिथिलांचल, कोसी और सीमांचल की पिचों नीतीश कुमार ने सधी हुई बल्लेबाजी की थी। झंझारपुर, पूर्णिया, कटिहार और भागलपुर जैसी टफ पिचों उनके खेल की बदौलत टीम को जीत मिली थी। भाजपा ने भी मधुबनी, दरभंगा, अररिया जैसी टर्न लेने वाली विकेट पर जीत हासिल की थी। इन इलाकों की पिच और मौसम के मिजाज को नीतीश कुमार बेहतर भांपते हैं। 2020 के अंतिम दौर के मुकबले में जदयू के 37 और भाजपा के 35, वीआइपी के 5 और हम के एक खिलाड़ी मैदान में हैं। 2015 में जदयू के 23 और भाजपा के 20 बल्लेबाजों ने मैच जिताऊ पारी खेली थी। यानी एनडीए की टीम 43 जीते हुए मैदान पर मैच खेल रही है। अब नीतीश कुमार पर ये जिम्मेवारी आन पड़ी है कि वे मैच फिनिशर की तरह खेलें और मैच के आखिर तक स्कोरिंग के मोमेंटम को बरकरर रखें।

राजद के कई प्लेयर नये मैदान में
कुल 78 मैच होने हैं। सबसे अधिक राजद के 46 बल्लेबाज मुकाबले में हैं। इनमें 20 पिछली दफा विनिंग शॉट खेल चुके हैं। राजद के कई प्रमुख बल्लेबाजों ने हार की आशंका में अपना मैदान बदल लिया है। टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज अब्दुल बारी सिद्दीकी इस बार अलीनगर के बदले केवटी से पैडअप हैं। टीम के कोच और कप्तान के खासमखास बल्लेबाज भोला यादव बहादुरपुर के बदले हायाघाट से मैदान में हैं। पिच के मिजाज को देख कर ही इन खिलाड़ियों ने अपने मैदान बदले हैं। मौसम को बदलते देर नहीं लगती। दो तीन दिनों में अगर यूं ही ठंड बढ़ती रही और हवा में नमी बढ़ती गयी तो एनडीए के तेज गेंदबजों को मदद मिल सकती है। ऐसे में राजद के बल्लेबाजों के लिए बैटिंग आसान नहीं होगी। 2015 में कांग्रेस के भी 11 बल्लेबाजों ने टीम को जीत दिलायी थी। इन पर भी बेहतर खेलने का दबाव है।

पप्पू यादव और ओवैसी भी की प्लेयर
हैदराबाद के चर्चित खिलाड़ी असदुद्दीन ओवैसी ने सीमांचल के 19 मैदानों पर अपने प्लेयर उतारे हैं। माइनॉरिटी प्रभाव वाली इन पिचों पर ओवैसी ने जम कर नेट प्रैक्टिस की है। कई पिचों पर वे तालमेल बैठा चुके हैं। 2019 के मुकाबले में उनका एक प्लेयर जीत भी चुका है। एक्सपर्ट की राय है कि टीम आवैसी की बैटिंग से ग्रैंड एलायंस के मौके ही कम होंगे। ओवैसी के प्लेयर को जीत मिले या न मिले लेकिन ग्रैंडएलायंस को हार मिल सकती है। ओवैसी ने कहा भी है कि वे जीतने से अधिक अपनी टीम की हैसियत बताने के लिए ये गेम खेल रहे हैं। ओवैसी के प्लेयर से नीतीश कुमार भी सतर्क हैं। पप्पू यादव कोसी इलाके के मजबूत बल्लेबाज माने जाते हैं। वे पीडीए की तरफ से कैप्टन (मुख्यमंत्री) भी घोषित हैं। पप्पू यादव और उनकी टीम का भविष्य थर्ड इनिंग की बैटिंग पर ही निर्भर है। अगर उनका बल्ला चला तो कई खिलड़ियों का गेम बिगड़ सकता है।












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