Bihar Elections 2025: निषाद वोट बैंक पर टिकी 22 सीटों की बाजी, किसे मिलेगा सपोर्ट, क्या कहता है गणित?
Bihar Elections 2025: उत्तर बिहार और मिथिलांचल के गांवों में जब चुनावी हवा चलती है, तो उसकी लहरें सबसे पहले नदियों के किनारे बसे इलाकों तक पहुंचती हैं। गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी और गंगा जैसी नदियों के तटवर्ती इलाकों में रहने वाला मछुआरा समुदाय - निषाद, मल्लाह, केवट और कश्यप- सिर्फ नाव चलाने या मछली पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि अब राजनीति की नाव भी यही चलाने लगे हैं।
इनकी संख्या भले ही हर सीट पर अलग-अलग हो, लेकिन जहां ये संगठित हैं, वहां जीत-हार का फैसला अक्सर यही करते हैं। यही वजह है कि इस बार भी उत्तर बिहार और मिथिलांचल की करीब 22 विधानसभा सीटों पर इनका वोट सबसे अहम माना जा रहा है।

इस बार मुकाबला सीधा है- एनडीए बनाम महागठबंधन, और बीच में खड़ा है यह समुदाय, जो दोनों खेमों की राजनीति की धारा को मोड़ सकता है।
एनडीए और महागठबंधन में निषादों को लुभाने की होड़
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए ने इन मतदाताओं को अपनी अति पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) नीति के जरिये सालों से अपने साथ जोड़े रखा है, लेकिन अब वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी के महागठबंधन में शामिल होने से यह समीकरण डगमगाने लगे हैं। दोनों पक्षों के नेता जानते हैं - अगर निषाद समुदाय का समर्थन मिल गया, तो नदी किनारे की ये सीटें चुनावी नक्शे पर सोने की तरह चमक सकती हैं।
निषाद वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए एनडीए और महागठबंधन दोनों खेमों में जोर-आजमाइश जारी है| एनडीए अब अपने पुराने निषाद मतदाताओं को साथ बनाए रखने के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा है।
2020 का प्रदर्शन दोहराने की चुनौती
पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए ने निषाद-बहुल 22 सीटों में से 14 पर जीत दर्ज की थी।
इन सीटों पर 10,000 से अधिक निषाद मतदाता हैं।
अब जब वीआईपी महागठबंधन के साथ है, एनडीए के लिए 2020 जैसा प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं होगा।
मुख्य निषाद-बहुल सीटें हैं -
- मुजफ्फरपुर जिले की मीनापुर, औराई, बचहा, कुरहानी, साहेबगंज और मुजफ्फरपुर शहर
- दरभंगा जिले की बहादुरपुर, गौरा बौराम, दरभंगा शहर
- समस्तीपुर जिले की हसनपुर, रोसड़ा, मोरवा, सरायरंजन और उजियारपुर
- खगड़िया की बेलदौर, मधेपुरा की आलमनगर
- वैशाली की लालगंज, पूर्वी चंपारण की सुगौली और केसरिया
- पश्चिम चंपारण की पिपरा और भागलपुर की कहलगांव सीट
एनडीए के निषाद नेता मोर्चे पर
एनडीए ने अपने निषाद नेताओं को जमीनी स्तर पर सक्रिय कर दिया है। केंद्रीय मंत्री राज भूषण चौधरी, राज्य मंत्री मदन साहनी, विधान पार्षद भीष्म साहनी और हरि साहनी निषाद बहुल इलाकों में लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं।
भाजपा ने अजय निषाद की पार्टी में वापसी करवा कर निषाद समुदाय में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की है।
2020 में अजय निषाद को टिकट न मिलने से जो असंतोष था, अब उनकी वापसी से भाजपा को उस नुकसान की भरपाई की उम्मीद है।
भाजपा की नई रणनीति
इस बार भाजपा ने अजय निषाद की पत्नी रमा निषाद को औराई सीट से उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने यहां अपने मौजूदा विधायक रामसूरत राय का टिकट काट दिया है। भाजपा को उम्मीद है कि अजय निषाद का परिवार, जो लंबे समय से निषाद समुदाय में प्रभावशाली रहा है, उसके समर्थन को फिर से मजबूत करेगा।
अजय निषाद के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन जय नारायण निषाद को समुदाय का बड़ा नेता माना जाता था, और भाजपा इस विरासत का फायदा उठाने की कोशिश में है। वहीं, महागठबंधन की ओर से मुकेश सहनी अपनी वीआईपी पार्टी के जरिए निषाद वोटरों को अपने पक्ष में लाने में जुटे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव तय करेगा कि सहनी अपने समुदाय के वोटों को कितनी मजबूती से अपने गठबंधन के पक्ष में जोड़ पाते हैं।












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